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दुनिया में तेल संकट… लेकिन भारत का प्लान है तैयार, तुरंत उठाएगा ये कदम!

दुनिया में तेल संकट… लेकिन भारत का प्लान है तैयार, तुरंत उठाएगा ये कदम!

3 मार्च 2026: US-इज़राइल-ईरान युद्ध के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में टैंकर ट्रैफिक लगभग ठप हो गया है। वैश्विक तेल सप्लाई में 20% हिस्सा इसी चोकपॉइंट से गुजरता है, और अब ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें $79-82 प्रति बैरल के आसपास पहुंच चुकी हैं – कुछ रिपोर्ट्स में $90 तक जाने की आशंका जताई जा रही है। दुनिया भर में फ्यूल प्राइस बढ़ने की आशंका है, लेकिन भारत ने पहले से ही अपना इमरजेंसी प्लान एक्टिव कर दिया है। पेट्रोलियम मिनिस्टर हरदीप सिंह पुरी ने कहा है कि सरकार “सतत निगरानी” कर रही है और “सभी जरूरी कदम” उठाए जाएंगे ताकि देश में पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स उपलब्ध और सस्ते रहें।

भारत अपनी 85-88% क्रूड ऑयल जरूरत आयात करता है, जिसमें से आधा से ज्यादा हिस्सा होर्मुज से गुजरता है। लेकिन अच्छी खबर ये है कि भारत के पास 74 दिनों तक की क्रूड और रिफाइंड प्रोडक्ट्स की स्टॉक है (स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व + कमर्शियल स्टॉक मिलाकर)। तुरंत तीन बड़े कदम उठाए जा रहे हैं:

पेट्रोल-डीजल एक्सपोर्ट पर रोक लगाना

सरकार रिफाइनर्स से कह रही है कि वे पेट्रोल, डीजल और अन्य रिफाइंड फ्यूल के एक्सपोर्ट को कम करें या अस्थायी रूप से रोक दें। इससे घरेलू बाजार में ज्यादा सप्लाई रहेगी और कमी नहीं होगी। भारत दुनिया के बड़े फ्यूल एक्सपोर्टर्स में से एक है, तो यह स्टॉक को घरेलू उपयोग के लिए रीडायरेक्ट करने का सबसे तेज तरीका है।

रूस से क्रूड ऑयल आयात बढ़ाना

ईरान संकट के कारण मिडिल ईस्ट सप्लाई प्रभावित होने पर भारत रूस से सस्ता क्रूड खरीदने की तरफ तेजी से बढ़ रहा है। रूसी क्रूड पहले से एशिया में फ्लोटिंग स्टोरेज में उपलब्ध है। सरकार विदेश मंत्रालय से US से छूट लेने की कोशिश कर रही है ताकि रूसी ऑयल इंपोर्ट बढ़ सके। यह पहले भी भारत की स्ट्रैटेजी रही है, और अब फिर से एक्टिव हो रही है।

LPG (रसोई गैस) राशनिंग और डिमांड मैनेजमेंट

अगर संकट लंबा खिंचा तो LPG की सप्लाई पर राशनिंग लगाई जा सकती है – खासकर उन घरों पर जहां वैकल्पिक कुकिंग फ्यूल उपलब्ध हैं (जैसे ग्रामीण इलाकों में)। साथ ही, रिफाइनर्स से LPG प्रोडक्शन बढ़ाने और घरेलू मार्केट को प्राथमिकता देने को कहा जा रहा है। यह कदम घरेलू उपभोक्ताओं को सबसे ज्यादा प्रभावित होने से बचाएगा।

पेट्रोल-डीजल की कीमतें अभी तुरंत नहीं बढ़ाई जा रही हैं, लेकिन अगर क्रूड $100 पार करता है तो इंपोर्ट बिल पर भारी असर पड़ेगा। सरकार का फोकस “उपलब्धता और किफायती” रखने पर है। ऑयल मिनिस्ट्री ने कहा: “हम लगातार स्थिति पर नजर रख रहे हैं और जरूरी कदम उठाएंगे।”

यह संकट कितना लंबा चलेगा, ये युद्ध पर निर्भर है। लेकिन भारत तैयार है – क्या आपको लगता है कि ये कदम काफी होंगे, या पेट्रोल-डीजल महंगा होगा? कमेंट में बताएं!

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