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दिल्ली के मुखर्जी नगर में दिल दहला देने वाली घटना: मौसी ने 1 साल 9 महीने के भांजे का गला दबाकर की हत्या, पार्क में लाश गोद में लेकर बैठी मिली

दिल्ली के मुखर्जी नगर में दिल दहला देने वाली घटना: मौसी ने 1 साल 9 महीने के भांजे का गला दबाकर की हत्या, पार्क में लाश गोद में लेकर बैठी मिली

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के मुखर्जी नगर इलाके में शुक्रवार (20 फरवरी 2026) दोपहर एक बेहद दर्दनाक और सनसनीखेज वारदात सामने आई है। यहां SFS फ्लैट्स के पास एक पार्क में 30 वर्षीय महिला आजरा (अजरा) ने अपने ही 1 साल 9 महीने के भांजे हादी (पुत्र आदिल) का गला दबाकर कथित तौर पर हत्या कर दी। महिला ने बच्चे को घुमाने के बहाने पार्क ले जाकर यह वारदात अंजाम दी और फिर लाश को गोद में लेकर बैठी रही।

क्या हुआ पूरा मामला?

दोपहर करीब 1:30 बजे पुलिस को PCR कॉल मिली कि पार्क में एक महिला बच्चे का गला दबा रही है।

एक स्थानीय निवासी (माली या राहगीर) ने महिला को बच्चे का गला घोंटते देखा, तुरंत शोर मचाया और बच्चे को छुड़ाकर पास के न्यू लाइफ हॉस्पिटल पहुंचाया।

डॉक्टरों ने बच्चे को मृत घोषित कर दिया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गला दबाने से मौत की पुष्टि हुई है।

आरोपी महिला मौके पर ही बेहोश हालत में मिली, जिसे तुरंत बाबू जगजीवन राम मेमोरियल हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया।

पुलिस ने आजरा को हिरासत में ले लिया है और पूछताछ कर रही है। शुरुआती जांच में पता चला है कि महिला पिछले कुछ समय से अवसाद (डिप्रेशन) से जूझ रही थी।

परिवार का संबंध

बच्चा हादी उत्तर पूर्वी दिल्ली के ओल्ड सीलमपुर का निवासी था।

उसकी मां उज्मा बच्चे को लेकर अपनी मायके (मुखर्जी नगर) आई थीं।

आरोपी आजरा बच्चे की मौसी (मां की बहन) है और अविवाहित बताई जा रही है।

पुलिस को हत्या की सूचना बच्चे के मामा ने दी थी।

पुलिस जांच

दिल्ली पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज किया है और जांच शुरू कर दी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है, लेकिन प्रारंभिक जांच में गला दबाने से मौत की पुष्टि हुई है। पुलिस का कहना है कि महिला का मानसिक स्वास्थ्य जांच का विषय है, लेकिन हत्या का इरादा साफ नजर आ रहा है।

इलाके में सनसनी

इस घटना से पूरे मुखर्जी नगर में हड़कंप मच गया है। स्थानीय लोग इसे “रिश्तों का कत्ल” बता रहे हैं। कई लोग पूछ रहे हैं कि एक मासूम बच्चे के साथ ऐसा क्रूर व्यवहार क्यों? परिवार वाले सदमे में हैं।

ये घटना बच्चों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों को फिर से उजागर कर रही है। पुलिस आगे की जांच में और खुलासे कर सकती है। क्या आपको लगता है कि ऐसे मामलों में मानसिक स्वास्थ्य जांच को अनिवार्य करना चाहिए? कमेंट में अपनी राय जरूर बताएं।

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