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आज Gold-Silver ETFs क्यों क्रैश हुए? सिल्वर ETFs 21% तक गिरे, गोल्ड ETFs 7% तक लुढ़के; शेयर बाजार भी लाल!

आज Gold-Silver ETFs क्यों क्रैश हुए? सिल्वर ETFs 21% तक गिरे, गोल्ड ETFs 7% तक लुढ़के; शेयर बाजार भी लाल!

आज 5 फरवरी 2026 को भारतीय बाजार में गोल्ड और सिल्वर ETFs में भारी गिरावट देखी गई। सिल्वर ETFs (जैसे Axis Silver ETF, Kotak Silver ETF, Edelweiss Silver ETF) 21% तक क्रैश हो गए, जबकि गोल्ड ETFs 5-7% तक नीचे आए। MCX पर सिल्वर फ्यूचर्स 10-14% तक गिरे (मार्च कॉन्ट्रैक्ट ₹2,42,000-2,44,000/kg तक लुढ़का), और गोल्ड फ्यूचर्स 1.5-7% नीचे आए। शेयर बाजार भी प्रभावित रहा—Sensex 500+ पॉइंट्स और Nifty 150+ पॉइंट्स गिरकर बंद हुआ, मुख्य रूप से मेटल्स, IT और ब्रॉड सेलिंग से।

मुख्य वजहें क्या हैं?

ग्लोबल प्रेशर और US डॉलर मजबूत होना: Comex पर सिल्वर 10-14% गिरकर $73-75/औंस तक पहुंचा, गोल्ड 1-3% नीचे। मजबूत US डॉलर (Fed के हॉकिश सिग्नल्स और Kevin Warsh को Fed चेयर नामित होने की वजह से) ने प्रेशर बढ़ाया। डॉलर मजबूत होने से गोल्ड-सिल्वर जैसे नॉन-यील्डिंग एसेट्स आकर्षक नहीं रहते।

प्रॉफिट बुकिंग और वोलेटिलिटी: पिछले दिनों गोल्ड-सिल्वर में रिकॉर्ड रैली (सिल्वर 70%+ YTD) के बाद भारी प्रॉफिट बुकिंग हुई। दो दिन की रिकवरी के बाद फिर सेलिंग प्रेशर बढ़ा, जिससे वोलेटिलिटी हाई रही।

MCX पर एक्स्ट्रा मार्जिन: MCX ने रिस्क रिव्यू के बाद सिल्वर फ्यूचर्स पर 4.5% और गोल्ड पर 1% एक्स्ट्रा मार्जिन लगाया, जो 5 फरवरी से लागू हुआ। इससे ट्रेडर्स ने पोजीशंस कम कीं, जिससे फ्यूचर्स क्रैश हुए और ETFs पर असर पड़ा।

सेफ-हेवन डिमांड कम: US-ईरान टॉक्स (ओमान में) की खबरों से जियोपॉलिटिकल टेंशन कम होने का अंदेशा, जिससे गोल्ड-सिल्वर का सेफ-हेवन अपील कम हुआ।

शेयर बाजार पर असर: मेटल्स सेक्टर में गिरावट (सिल्वर-गोल्ड से जुड़े स्टॉक्स) और ग्लोबल सेलऑफ (US टेक स्टॉक्स में प्रेशर) से Sensex-Nifty लाल रहे। IT सेक्टर में AI ऑटोमेशन की चिंता से अतिरिक्त दबाव।

इन्वेस्टर्स के लिए क्या करें?

एक्सपर्ट्स कहते हैं कि यह शॉर्ट-टर्म करेक्शन है—लॉन्ग-टर्म में गोल्ड-सिल्वर बुलिश रह सकते हैं (इन्फ्लेशन, जियोपॉलिटिकल रिस्क)।

अगर आपने हाई पर खरीदा है, तो पैनिक सेल न करें; डिप पर खरीदने का मौका देखें।

ETFs में लिक्विडिटी हाई है, लेकिन फ्यूचर्स की तुलना में ज्यादा वोलेटाइल हो सकते हैं।

MCX पर मार्जिन हाई होने से ट्रेडिंग कॉस्ट बढ़ी है—सावधानी बरतें।

यह क्रैश पिछले दिनों की पैराबोलिक रैली के बाद नॉर्मल करेक्शन लगता है, लेकिन वोलेटिलिटी जारी रह सकती है। अपडेट्स के लिए MCX, NSE और ग्लोबल न्यूज फॉलो करें।

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