सोने-चांदी के भाव में अचानक भारी गिरावट: रिकॉर्ड हाई से क्रैश, ट्रंप के ग्रीनलैंड स्टैंड से बदला माहौल
सोने-चांदी के भाव में अचानक भारी गिरावट: रिकॉर्ड हाई से क्रैश, ट्रंप के ग्रीनलैंड स्टैंड से बदला माहौल
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर आज सोना और चांदी के भाव में तेज गिरावट देखी गई, जिसने निवेशकों को चौंका दिया। कुछ दिन पहले रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद अचानक प्रॉफिट बुकिंग और ग्लोबल सेंटिमेंट में बदलाव से कीमती धातुओं पर दबाव बढ़ गया। MCX पर गोल्ड फ्यूचर्स 1-2% तक गिरे, जबकि सिल्वर में 3-4% तक की भारी गिरावट दर्ज की गई। गोल्ड ETF और सिल्वर ETF में तो और भी तेज गिरावट आई—कुछ सिल्वर ETF 20-24% तक क्रैश हो गए!
क्यों आई इतनी बड़ी गिरावट?
मुख्य वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ग्रीनलैंड और यूरोपीय देशों पर टैरिफ थ्रेट को लेकर नरम रुख है। ट्रंप ने डावोस में NATO से मीटिंग के बाद कहा कि ग्रीनलैंड पर फोर्स का इस्तेमाल नहीं होगा, फरवरी से लगने वाले टैरिफ रद्द किए जा रहे हैं, और “डील” का आउटलाइन तैयार हो गया है। इससे ग्लोबल जियोपॉलिटिकल टेंशन कम हुआ, रिस्क-ऑन माहौल बना, और निवेशक सेफ-हेवन एसेट्स (सोना-चांदी) से बाहर निकलकर स्टॉक मार्केट की ओर मुड़े।
प्रॉफिट बुकिंग: पिछले हफ्तों में सोना $4,888/औंस और सिल्वर $95.87/औंस के रिकॉर्ड हाई पर पहुंचा था। तेज रैली के बाद ट्रेडर्स ने मुनाफा वसूल लिया।
US डॉलर में मजबूती: टेंशन कम होने से डॉलर इंडेक्स ऊपर चढ़ा, जो कीमती धातुओं के लिए नेगेटिव है।
ETF में एक्स्ट्रा वोलेटिलिटी: भारत में सिल्वर ETF (जैसे Tata Silver ETF) 13-24% तक गिरे, क्योंकि ये स्पेकुलेटिव प्रीमियम पर ट्रेड हो रहे थे। MCX सिल्वर में सिर्फ 3-4% गिरावट आई, लेकिन ETF में ज्यादा तेज सेल-ऑफ हुआ। गोल्ड ETF भी 8-12% तक नीचे आए।
इंडिया में प्रभाव: MCX गोल्ड ₹1,51,000-1,52,000 प्रति 10 ग्राम के आसपास ट्रेड कर रहा है (पिछले हाई से ₹4,000-6,000 तक गिरावट), जबकि सिल्वर ₹3,05,000-3,17,000 प्रति किलो के बीच (₹10,000-30,000 तक डाउन)।
एक्सपर्ट्स का क्या कहना है?
एनालिस्ट्स कहते हैं कि यह गिरावट “एक्सपेक्टेड करेक्शन” है—टेंशन कम होने पर सेफ-हेवन डिमांड घटती है।
लॉन्ग टर्म में सोना-चांदी मजबूत बने रहेंगे, क्योंकि ग्लोबल अनसर्टेन्टी, इंफ्लेशन और इंडस्ट्रियल डिमांड (सिल्वर के लिए सोलर, EV) बनी हुई है।
कुछ विशेषज्ञ सलाह दे रहे हैं कि डिप में ग्रेजुअल खरीदारी करें, लेकिन शॉर्ट टर्म में वोलेटिलिटी रह सकती है।
यह गिरावट ग्रीनलैंड इश्यू से जुड़ी राजनीतिक ड्रामा का डायरेक्ट असर है—जब टेंशन बढ़ता है तो सोना-चांदी उड़ान भरते हैं, और जैसे ही शांत होता है, क्रैश! निवेशक अब फेड की मीटिंग (27-28 जनवरी) और आगे के सिग्नल्स पर नजर रखे हुए हैं। क्या यह सिर्फ अस्थायी करेक्शन है, या बड़ा ट्रेंड रिवर्सल? बाजार का जवाब आने वाला है!
