अंकिता भंडारी हत्याकांड: कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल का बड़ा दावा — ‘भाजपा के कई नेता भी पर्दे के पीछे CBI जांच की मांग कर रहे थे’
अंकिता भंडारी हत्याकांड: कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल का बड़ा दावा — ‘भाजपा के कई नेता भी पर्दे के पीछे CBI जांच की मांग कर रहे थे’
उत्तराखंड की राजनीति में अंकिता भंडारी हत्याकांड का सियासी घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार ने मामले की CBI जांच की संस्तुति केंद्र को भेज दी है, लेकिन अब गेंद केंद्रीय एजेंसी के पाले में है। इसी बीच उत्तराखंड कांग्रेस कमेटी के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने एक नया और चौंकाने वाला दावा किया है, जिसने भाजपा खेमे में हलचल मचा दी है।
गणेश गोदियाल का दावा
गोदियाल ने कहा: अंकिता भंडारी मामले में जहां कांग्रेस और आम जनता सरकार के खिलाफ खुलकर सड़कों पर उतरी, वहीं भाजपा के कई नेता भी पर्दे के पीछे CBI जांच की मांग के साथ खड़े थे।
आंदोलन के दौरान कई भाजपाई नेताओं ने उनसे व्यक्तिगत रूप से संपर्क किया और सरकार पर दबाव बनाने की बात कही।
मुख्यमंत्री को समय-समय पर CBI जांच की सलाह दी जाती रही, लेकिन सरकार ने तब तक कोई कदम नहीं उठाया, जब तक जनदबाव चरम पर नहीं पहुंच गया।
भाजपा में कुछ नेताओं ने सार्वजनिक रूप से इस्तीफा तक दिया, जबकि अधिकांश पर्दे के पीछे समर्थन देते रहे।
यदि समय रहते निष्पक्ष जांच का फैसला लिया जाता, तो जनता में इतना आक्रोश नहीं फैलता।
गोदियाल ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार दबाव बढ़ने तक CBI जांच के पक्ष में नहीं थी, और अब जब जांच हो रही है तो ये सब “दिखावा” है।
भाजपा का पलटवार
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने गोदियाल के दावों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा:
गणेश गोदियाल को तथ्यों के साथ अपनी बात रखनी चाहिए।
कांग्रेस के बयानों से भाजपा के भीतर किसी तरह का संदेह पैदा नहीं होने वाला।
पार्टी को अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं पर पूरा भरोसा है।
भाजपा पूरी मजबूती के साथ सरकार के फैसले के साथ खड़ी है।
भाजपा ने इसे कांग्रेस की “राजनीतिक चालबाजी” करार दिया और कहा कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष होगी।
मामले की वर्तमान स्थिति
उत्तराखंड सरकार ने CBI जांच की संस्तुति केंद्र को भेज दी है।
अब CBI की औपचारिक स्वीकृति का इंतजार है, उसके बाद जांच शुरू होगी।
विपक्ष और कई सामाजिक संगठन सिटिंग जज की अध्यक्षता में CBI जांच की मांग को दोहरा रहे हैं।
जांच के दायरे और बिंदुओं पर अभी स्पष्टता नहीं आई है।
गोदियाल के दावे ने भाजपा के भीतर सवाल खड़े कर दिए हैं कि आखिर कौन-कौन से नेता पर्दे के पीछे सक्रिय थे और कौन चुप रहे। ये बयान 2027 विधानसभा चुनावों से पहले उत्तराखंड की राजनीति को और गरमा सकता है।
