ट्रंप ने खोला ग्रीनलैंड का राज: ‘राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी, रूसी-चीनी जहाजों से घिरा हुआ है द्वीप’
ट्रंप ने खोला ग्रीनलैंड का राज: ‘राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी, रूसी-चीनी जहाजों से घिरा हुआ है द्वीप’
वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ग्रीनलैंड पर अपना दावा ठोका है और बताया कि क्यों अमेरिका को इस विशाल द्वीप की जरूरत है। जनवरी 2026 में एयर फोर्स वन पर पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने साफ कहा कि ग्रीनलैंड राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ‘जरूरी’ है। उन्होंने रूस और चीन के जहाजों का हवाला देते हुए कहा कि ये द्वीप उनके प्रभाव से घिरा हुआ है। यह बयान ऐसे समय आया है जब ट्रंप की विदेश नीति में वेनेजुएला ऑपरेशन के बाद ग्रीनलैंड पर फोकस बढ़ गया है, और यूरोपीय सहयोगी डेनमार्क ने इसे सिरे से खारिज किया है।
ट्रंप का पूरा बयान और वजह
ट्रंप ने कहा, “यह बहुत रणनीतिक है। अभी ग्रीनलैंड रूसी और चीनी जहाजों से घिरा हुआ है। हमें राष्ट्रीय सुरक्षा के नजरिए से ग्रीनलैंड की जरूरत है, और डेनमार्क यह करने में सक्षम नहीं है।”
ट्रंप ने खनिज संसाधनों को महत्व नहीं दिया और जोर दिया कि मुख्य वजह सुरक्षा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, ग्रीनलैंड आर्कटिक क्षेत्र में अमेरिका के लिए स्टेजिंग ग्राउंड हो सकता है – मिसाइल डिफेंस, रडार और सैन्य उपस्थिति बढ़ाने के लिए। यह द्वीप उत्तर अटलांटिक और आर्कटिक महासागर के बीच स्थित है, जो अमेरिका की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
हालांकि, कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि असली वजह खनिज और तेल-गैस भंडार हैं। ग्रीनलैंड में दुर्लभ पृथ्वी तत्व, तेल और गैस के बड़े भंडार हैं, जो ट्रंप और अमेरिकी कंपनियों के लिए आकर्षण का केंद्र हैं। लेकिन ट्रंप ने खुद इसे खारिज करते हुए सुरक्षा को प्राथमिकता बताई।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और विवाद
अमेरिका का ग्रीनलैंड पर रुचि पुरानी है। द्वितीय विश्व युद्ध में अमेरिका ने यहां ठिकाने बनाए थे, और अब थुले एयर बेस मौजूद है। ट्रंप ने 2019 में भी इसे खरीदने की बात की थी, लेकिन डेनमार्क और ग्रीनलैंड ने इसे ‘बिकाऊ नहीं’ बताकर ठुकरा दिया। अब 2026 में, ट्रंप ने इसे ‘पूर्ण नियंत्रण’ के लिए ‘आवश्यक’ बताया, जिससे NATO में तनाव बढ़ गया है। डेनमार्क ने चेतावनी दी कि यह गठबंधन को तोड़ सकता है।
ग्रीनलैंड के नेता और डेनमार्क ने कहा कि द्वीप की किस्मत वहां के लोग तय करेंगे, न कि कोई बाहरी शक्ति। ट्रंप ने सैन्य विकल्प को भी खारिज नहीं किया, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन होगा।
ट्रंप की यह महत्वाकांक्षा क्या NATO और वैश्विक सुरक्षा को प्रभावित करेगी? आने वाले महीने बताएंगे।
