उत्तराखंड

ऋषिकेश में वन भूमि अतिक्रमण: सुप्रीम कोर्ट आदेश पर तार बाड़ लगाने पहुंची वन विभाग टीम, महिलाओं के तीव्र विरोध के आगे काम रुका

ऋषिकेश में वन भूमि अतिक्रमण: सुप्रीम कोर्ट आदेश पर तार बाड़ लगाने पहुंची वन विभाग टीम, महिलाओं के तीव्र विरोध के आगे काम रुका

ऋषिकेश (उत्तराखंड): सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद वन विभाग द्वारा वन भूमि पर तार बाड़ लगाने का काम शुरू होते ही स्थानीय लोगों का विरोध फिर तेज हो गया है। शनिवार (10 जनवरी 2026) को अमित ग्राम की गली नंबर 25 में वन विभाग की टीम दलबल के साथ पहुंची, लेकिन भूमि से जुड़े निवासियों ने तीव्र विरोध किया। विरोध इतना जोरदार रहा कि टीम को काम रोकना पड़ा और स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।

विरोध की वजह और प्रदर्शन

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उन्होंने अपनी मेहनत की कमाई से यह जमीन खरीदी है और पिछले पांच दशकों से अधिक समय से यहां खेती कर रहे हैं। वे वन विभाग को किसी भी कीमत पर कब्जा नहीं लेने देंगे। विरोध में महिलाओं की संख्या सबसे ज्यादा थी, जो वन विभाग और सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी और प्रदर्शन कर रही थीं।

वन विभाग की टीम ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देकर लोगों को समझाने की कोशिश की, लेकिन लोग अपने रुख से पीछे नहीं हटे। फिलहाल तार बाड़ का काम पूरी तरह रुक गया है।

एसडीओ अनिल रावत का बयान

एसडीओ अनिल रावत ने बताया कि एक दिन पहले जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक की गई थी, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के आदेश की जानकारी दी गई और सहयोग की अपील की गई। उन्होंने कहा, “हमने स्पष्ट किया था कि यह कार्रवाई सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर हो रही है। इसमें विरोध करना उचित नहीं है, लेकिन फिर भी लोग विरोध कर रहे हैं।”

सुप्रीम कोर्ट आदेश और पिछली घटनाएं

सर्वोच्च न्यायालय ने ऋषिकेश में वन भूमि अतिक्रमण मामले में उत्तराखंड वन विभाग को 5 जनवरी 2026 तक रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया था। इसी क्रम में 27 दिसंबर 2025 को सर्वे के दौरान विरोध हुआ था, जो 28 दिसंबर को और भड़क गया। उस समय लोगों ने रेल मार्ग अवरुद्ध किया, राष्ट्रीय राजमार्ग जाम किया, पुलिस पर पथराव किया और महिला वन रेंजर से बदसलूकी की।

इन घटनाओं में पुलिस ने रेल मार्ग रोकने, राष्ट्रीय राजमार्ग जाम करने, सरकारी कार्य में बाधा डालने, पुलिस पर पथराव और महिला अधिकारी से बदसलूकी के आरोपों में मुकदमा दर्ज किया। कुछ नामजद और अज्ञात लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई।

वर्तमान स्थिति

स्थानीय लोगों और वन विभाग के बीच तनाव जारी है। प्रदर्शनकारी अपनी जमीन छोड़ने को तैयार नहीं हैं, जबकि विभाग सुप्रीम कोर्ट आदेश का पालन करने के लिए बाध्य है। प्रशासन बातचीत की कोशिश कर रहा है, लेकिन फिलहाल कोई समाधान नहीं निकला है।

स्थिति पर सभी की नजरें टिकी हैं कि क्या बातचीत से विवाद सुलझेगा या कानूनी कार्रवाई और बढ़ेगी। यह मामला उत्तराखंड में वन भूमि अतिक्रमण और स्थानीय अधिकारों के बीच टकराव का एक और उदाहरण बन चुका है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *