अन्तर्राष्ट्रीय

तालाब में कूदकर भी नहीं बची जान: बांग्लादेश में हिंदू व्यापारी खोकन दास की अस्पताल में मौत, अल्पसंख्यकों पर हमलों की चौथी घटना

तालाब में कूदकर भी नहीं बची जान: बांग्लादेश में हिंदू व्यापारी खोकन दास की अस्पताल में मौत, अल्पसंख्यकों पर हमलों की चौथी घटना

ढाका/शरियतपुर, 3 जनवरी 2026: बांग्लादेश के शरियतपुर जिले में नववर्ष की पूर्व संध्या पर क्रूर हमले का शिकार हुए हिंदू व्यापारी खोकन चंद्र दास की आज सुबह ढाका के नेशनल बर्न इंस्टीट्यूट में मौत हो गई। गंभीर जलने की चोटों से जूझ रहे खोकन ने तीन दिन तक संघर्ष किया, लेकिन अंततः दम तोड़ दिया। हमलावरों ने उन्हें छुरा घोंपा, पेट्रोल डालकर आग लगा दी थी, लेकिन खोकन ने जान बचाने के लिए सड़क किनारे तालाब में छलांग लगा दी थी।

घटना 31 दिसंबर की रात करीब 9:30 बजे डामुड्या उपजिला के कनेश्वर यूनियन में केउरभांगा बाजार के पास हुई। खोकन चंद्र दास (उम्र करीब 50 साल) स्थानीय बाजार में फार्मेसी और मोबाइल बैंकिंग का कारोबार चलाते थे। दुकान बंद कर घर लौटते समय हमलावरों ने उन्हें रोका, धारदार हथियारों से हमला किया, पेट्रोल छिड़ककर आग लगा दी। चीखें सुनकर स्थानीय लोग दौड़े तो हमलावर फरार हो गए। खोकन को पहले शरियतपुर सदर अस्पताल ले जाया गया, फिर गंभीर हालत में ढाका रेफर कर दिया गया।

परिवार की व्यथा:

खोकन की पत्नी सीमा दास ने कहा, “मेरा पति शांतिप्रिय इंसान था, किसी से दुश्मनी नहीं थी। हम समझ नहीं पा रहे कि अचानक क्यों निशाना बनाया गया।” उन्होंने हमलावरों को पहचानने की बात भी कही।

परिवार ने न्याय की मांग की है और कहा कि हमले का मकसद पहचान छिपाना था।

पुलिस कार्रवाई:

डामुड्या थाने में खोकन के पिता परेश चंद्र दास ने तीन लोगों – सोहाग खान, राब्बी मौला और पलाश सरदार – के खिलाफ मामला दर्ज कराया।

पुलिस ने दो संदिग्धों की पहचान की है और गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं।

अल्पसंख्यकों पर बढ़ते हमले:

यह दिसंबर से बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर लक्षित हमलों की चौथी घटना है।

इससे पहले: दीपू चंद्र दास (ईशनिंदा के आरोप में पीट-पीटकर मार डाला), अमृत मंडल (उगाही के आरोप में लिंचिंग) और अन्य मामले।

इन घटनाओं से हिंदू समुदाय में डर का माहौल है। भारत ने भी अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर चिंता जताई है, जबकि बांग्लादेशी अधिकारी इन्हें अलग-थलग घटनाएं बता रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि राजनीतिक अस्थिरता और कट्टरपंथी ताकतों के उभार से अल्पसंख्यक असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। परिवार ने दोषियों को सजा और समुदाय की सुरक्षा की मांग की है। मामले की जांच जारी है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *