राजनीति

2025: भारत की राजनीति में उथल-पुथल का साल

2025: भारत की राजनीति में उथल-पुथल का साल

साल 2025 भारत की राजनीति के लिए बेहद उथल-पुथल भरा रहा। चुनावी जीत-हार, सुरक्षा संकट, विधायी बदलाव और बड़े प्रदर्शनों ने देश के सियासी माहौल को गरमा दिया। दिल्ली और बिहार जैसे प्रमुख राज्यों में विधानसभा चुनावों ने सत्ता के समीकरण बदले, जबकि पहलगाम आतंकी हमले और उसके जवाब में ऑपरेशन सिंदूर ने राष्ट्रीय एकता की भावना को जगाया। वक्फ संशोधन कानून और लद्दाख में राज्य दर्जे की मांग ने धार्मिक व क्षेत्रीय मुद्दों को उजागर किया। उपराष्ट्रपति का इस्तीफा और चुनाव आयोग पर लगे आरोपों ने संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए। आइए नजर डालते हैं उन सात बड़ी घटनाओं पर जिन्होंने भारत में हलचल मचाई।

दिल्ली विधानसभा चुनाव में BJP की ऐतिहासिक जीत: फरवरी 2025 में हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 27 साल बाद सत्ता हासिल की। 70 सीटों वाली विधानसभा में BJP को 48 सीटें मिलीं, जो दो-तिहाई बहुमत था। आम आदमी पार्टी (AAP) को करारी शिकस्त मिली, जबकि अरविंद केजरीवाल की छवि को बड़ा झटका लगा। यह जीत BJP के लिए राष्ट्रीय राजधानी में लंबे वनवास के अंत का प्रतीक बनी और विपक्षी एकता पर सवाल खड़े किए।

बिहार चुनाव में NDA की प्रचंड जीत: अक्टूबर-नवंबर में हुए बिहार विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने 243 में से 202 सीटें जीतकर भारी बहुमत हासिल किया। BJP सबसे बड़ी पार्टी बनी, जबकि नीतीश कुमार की JD(U) और चिराग पासवान की LJP(R) ने मजबूत प्रदर्शन किया। महागठबंधन को हार का सामना करना पड़ा। इस जीत ने 2029 लोकसभा चुनावों से पहले NDA की स्थिति मजबूत की और विपक्ष में हताशा पैदा की।

पहलगाम आतंकी हमला और ऑपरेशन सिंदूर: अप्रैल में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों ने 26 पर्यटकों की हत्या कर दी, जो धार्मिक आधार पर की गई। इसने देश में आक्रोश फैलाया। मई में भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाकर पाकिस्तानी ठिकानों पर हमले किए, जिससे पाकिस्तान को झुकना पड़ा। इसने राष्ट्रीय सुरक्षा पर बहस छेड़ी और मोदी सरकार की कड़ी नीति की सराहना हुई, हालांकि विपक्ष ने सीजफायर पर सवाल उठाए।

वक्फ (संशोधन) अधिनियम का पारित होना: अप्रैल में लागू हुआ वक्फ संशोधन कानून वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता लाने का दावा करता है, लेकिन विपक्ष और मुस्लिम संगठनों ने इसे धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला बताया। संसद में तीखी बहस हुई और सड़कों पर प्रदर्शन हुए। यह कानून हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण को बढ़ावा देने वाला साबित हुआ।

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का अचानक इस्तीफा: सितंबर में जगदीप धनखड़ के इस्तीफे से उपराष्ट्रपति पद खाली हुआ, जिसके बाद सी.पी. राधाकृष्णन नए उपराष्ट्रपति बने। इस घटना ने राजनीतिक अटकलों को जन्म दिया और संसद में हंगामा हुआ।

लद्दाख में राज्य दर्जे की मांग और प्रदर्शन: लद्दाख में राज्य दर्जे, छठी अनुसूची और भूमि-रोजगार सुरक्षा की मांग को लेकर बड़े प्रदर्शन हुए। सितंबर में हिंसा भड़की और सोनम वांगचुक को NSA के तहत गिरफ्तार किया गया। यह केंद्र की नीतियों पर सवाल उठाता रहा और क्षेत्रीय असंतोष को उजागर किया।

चुनाव आयोग पर मतदाता सूची में हेरफेर के आरोप: बिहार सहित कई राज्यों में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान लाखों नाम हटाए गए, जिस पर विपक्ष ने मुस्लिम और गरीब मतदाताओं को निशाना बनाने का आरोप लगाया। राहुल गांधी के नेतृत्व में प्रदर्शन हुए और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठे।

ये घटनाएं 2025 को भारत की राजनीति का यादगार साल बनाती हैं। एक तरफ NDA की मजबूती दिखी, तो दूसरी तरफ विपक्ष ने संस्थाओं की रक्षा के लिए संघर्ष किया। आने वाले सालों में ये मुद्दे सियासी बहस को प्रभावित करेंगे।

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