ईरान का तफ्तान ज्वालामुखी: 7 लाख साल बाद जागने के संकेत, लेकिन फटने का तत्काल खतरा नहीं
ईरान का तफ्तान ज्वालामुखी: 7 लाख साल बाद जागने के संकेत, लेकिन फटने का तत्काल खतरा नहीं
ईरान के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में स्थित तफ्तान ज्वालामुखी लंबे समय से शांत पड़ा था, लेकिन हालिया वैज्ञानिक अध्ययनों ने इसमें हलचल के संकेत दिखाए हैं। यह ज्वालामुखी पाकिस्तान की सीमा के करीब है और पिछले लगभग 7 लाख सालों में कोई बड़ा विस्फोट नहीं हुआ था। इसे पहले ‘एक्सटिंक्ट’ (पूर्ण रूप से बुझा हुआ) माना जाता था, लेकिन अब वैज्ञानिक इसे ‘डॉर्मेंट’ (सुप्त) कह रहे हैं। क्या यह वाकई फटने वाला है? आइए तथ्यों पर नजर डालते हैं।
अक्टूबर 2025 में प्रकाशित एक रिसर्च पेपर (Geophysical Research Letters) के अनुसार, जुलाई 2023 से मई 2024 के बीच सैटेलाइट डेटा से पता चला कि ज्वालामुखी के शिखर के पास जमीन करीब 9 सेंटीमीटर ऊपर उठ गई है। यह उठाव अब तक कम नहीं हुआ, जो नीचे दबाव बढ़ने का संकेत है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह हाइड्रोथर्मल सिस्टम (गर्म पानी और गैसें) या संभवतः मैग्मा की हल्की हलचल से हो रहा है। ज्वालामुखी से सल्फर गैसें निकल रही हैं और फ्यूमरोल्स (गैस वेंट्स) सक्रिय हैं।
तफ्तान एक स्ट्रैटोवॉल्केनो है, जिसकी ऊंचाई करीब 3,940 मीटर है। यह मकरान सबडक्शन जोन में स्थित है, जहां अरेबियन प्लेट यूरेसियन प्लेट के नीचे धंस रही है। हालांकि, प्रमुख शोधकर्ता पाब्लो गोंजालेज ने स्पष्ट कहा है कि “तत्काल विस्फोट का कोई खतरा नहीं है”। यह अध्ययन लोगों में पैनिक फैलाने के लिए नहीं, बल्कि ईरानी अधिकारियों को चेतावनी देने के लिए है कि इस क्षेत्र में मॉनिटरिंग बढ़ानी चाहिए। दूरस्थ लोकेशन और राजनीतिक अस्थिरता के कारण यहां ग्राउंड मॉनिटरिंग मुश्किल है, इसलिए सैटेलाइट ही मुख्य स्रोत हैं।
भारतीय मीडिया में यह खबर “फटने को तैयार” जैसे सनसनीखेज शीर्षकों से वायरल हुई, लेकिन अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स (जैसे Live Science, ABC News, Popular Mechanics) में जोर इस पर है कि यह शुरुआती संकेत हैं और भविष्य में दबाव रिलीज हो सकता है – या तो शांतिपूर्वक या विस्फोटक रूप से। आसपास के इलाकों जैसे खाश शहर या पाकिस्तान का तफ्तान टाउन प्रभावित हो सकते हैं, जहां राख, जहरीली गैसें या एसिड रेन का खतरा है। लेकिन फिलहाल कोई इमिनेंट खतरा नहीं।
ईरान का एक और प्रमुख ज्वालामुखी दमावंद (तेहरान के पास) भी डॉर्मेंट है, लेकिन उसमें हालिया कोई नई हलचल नहीं दर्ज की गई। तफ्तान की यह गतिविधि वैज्ञानिकों के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह बताती है कि लंबे समय से सोए ज्वालामुखी भी जाग सकते हैं। विशेषज्ञों की सलाह है कि क्षेत्रीय खतरे की मैपिंग और मॉनिटरिंग नेटवर्क बढ़ाए जाएं।
संक्षेप में, हां – हलचल है, लेकिन “नई मुसीबत” या तत्काल विस्फोट की बात अतिशयोक्ति है। प्रकृति के संकेतों को गंभीरता से लेना चाहिए, पर पैनिक नहीं।
