Thursday, June 25, 2026
उत्तराखंड

श्रीनगर मेडिकल कॉलेज को बड़ी राहत: NMC से पीजी कोर्स में 10 नई सीटों की मंजूरी, कुल सीटें हुईं 62!

श्रीनगर मेडिकल कॉलेज को बड़ी राहत: NMC से पीजी कोर्स में 10 नई सीटों की मंजूरी, कुल सीटें हुईं 62!

श्रीनगर (पौड़ी गढ़वाल), 17 दिसंबर 2025: वीर चंद्र सिंह गढ़वाली राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं रिसर्च इंस्टीट्यूट, श्रीनगर को राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) के चिकित्सा मूल्यांकन एवं रेटिंग बोर्ड (MARB) से शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए स्नातकोत्तर (पीजी) पाठ्यक्रमों में 10 नई सीटों की स्वीकृति मिली है। इससे कॉलेज में पीजी सीटों की कुल संख्या 62 हो गई है।

NMC ने विशेषज्ञों की टीम और समीक्षा समिति द्वारा संस्थान के भौतिक निरीक्षण, मानक मूल्यांकन प्रपत्र (SAF) और संस्थान की स्व-मूल्यांकन रिपोर्ट की विस्तृत जांच के बाद यह स्वीकृति दी। पूरी प्रक्रिया NMC अधिनियम, चिकित्सा संस्थानों की स्थापना एवं रेटिंग विनियम और स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा नियमावली के प्रावधानों के अनुरूप पूरी की गई।

नई स्वीकृत सीटें:

एमडी बाल रोग (Paediatrics): 4 सीटें

एमडी एनेस्थीसियोलॉजी (Anaesthesiology): 4 सीटें

एमएस प्रसूति एवं स्त्री रोग (Obstetrics & Gynaecology): 2 सीटें

इन पाठ्यक्रमों के संचालन के लिए अनुमति पत्र (Letter of Permission) जारी करने का निर्णय लिया गया है।

इसके अलावा, NMC ने एमडी जनरल मेडिसिन, त्वचा एवं यौन रोग, जैव रसायन विज्ञान तथा एमएस जनरल सर्जरी और अस्थि रोग विभागों में आवश्यक मानकों की पूर्ति के लिए संस्थान को 15 दिनों के भीतर पुनः अपील प्रस्तुत करने का अवसर दिया है।

मंत्री और प्राचार्य का बयान

उत्तराखंड के चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के निरंतर प्रयासों से मेडिकल कॉलेज में फैकल्टी, इंफ्रास्ट्रक्चर और अन्य सुविधाओं का लगातार विस्तार हो रहा है, जिससे पीजी सीटें बढ़ रही हैं।

कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आशुतोष सयाना ने इसे संस्थान के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा, “यह स्वीकृति गढ़वाल क्षेत्र में चिकित्सा शिक्षा को मजबूत बनाएगी। पीजी सीटें बढ़ने से संस्थान की शैक्षणिक क्षमता बढ़ेगी और राज्य को अधिक विशेषज्ञ चिकित्सक मिलेंगे। शेष विभागों में जरूरी मानक पूरा कर शीघ्र पुनः आवेदन किया जाएगा।”

यह स्वीकृति उत्तराखंड में चिकित्सा शिक्षा के विस्तार की दिशा में एक और कदम है, जिससे विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी को दूर करने में मदद मिलेगी।

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