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भारत का स्वदेशी ‘बाज’: आसमानी योद्धा सेना की ताकत बनेगा

भारत का स्वदेशी ‘बाज’: आसमानी योद्धा सेना की ताकत बनेगा

नई दिल्ली: भारतीय सेना के हथियारों में एक नया अध्याय जोड़ते हुए स्वदेशी ‘बाज’ अटैक ड्रोन को बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए हरी झंडी मिल गई है। आर्मी के वाइस चीफ लेफ्टिनेंट जनरल उपेंद्र द्विवेदी की मौजूदगी में मानेकशॉ सेंटर में आयोजित ‘इनोयोद्धा 25’ प्रदर्शनी के दौरान टेक्नोलॉजी ट्रांसफर (ToT) दस्तावेज दो निजी भारतीय कंपनियों को सौंप दिए गए। यह कदम ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को मजबूती प्रदान करता है, जहां अब ‘बाज’ पूरी तरह ‘मेड इन इंडिया’ होगा और जल्द ही सीमाओं पर तैनात हो जाएगा।

‘बाज’ ड्रोन की कहानी एक सैनिक की जंग से निकली है। रिटायर्ड कर्नल विकास चतुर्वेदी, जो जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर में काउंटर-इंसर्जेंसी ऑपरेशंस का नेतृत्व कर चुके हैं, ने इसकी डिजाइनिंग की। 2022 में जब वे राष्ट्रीय राइफल्स सेक्टर कमांड कर रहे थे, तो दुश्मन की हवाई निगरानी ने भारतीय सैनिकों को कई बार घायल किया। मौजूदा आयातित मिनी-ड्रोन पहाड़ी हवाओं में टिक नहीं पाते थे, उनकी उड़ान समय कम था और कीमतें इतनी ज्यादा कि खोना महंगा पड़ता। एक इजरायली सर्चर ड्रोन को छोटे हथियारों से गिरा दिया गया, जिसकी कीमत 42 करोड़ रुपये थी। इसी ‘फील्ड नाइटमेयर’ से प्रेरित होकर चतुर्वेदी ने ‘बाज’ को जन्म दिया – एक ऐसा ड्रोन जो न केवल निगरानी करे, बल्कि हमला भी करे।

यह दुनिया का पहला ड्रोन है जो हवा से रॉकेट लॉन्चर दाग सकता है। 8-10 घंटे की उड़ान क्षमता, ऊंचाई पर स्थिरता और रियल-टाइम सर्विलांस के साथ ‘बाज’ दुश्मन के ठिकानों पर सटीक प्रहार कर सकता है। इसमें एडवांस्ड इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल कैमरा, इन्फ्रारेड सेंसर और एंटी-पर्सनल वारहेड्स हैं, जो घने जंगलों या दुर्गम इलाकों में छिपे शत्रुओं को निशाना बना सकते हैं। उत्पादन लाइनें पहले से ही तैयार हो रही हैं, और सितंबर 2026 तक पहले 120 सिस्टम नॉर्दर्न, ईस्टर्न व सेंट्रल कमांड को सौंप दिए जाएंगे। प्रत्येक इन्फैंट्री ब्रिगेड को एक ‘बाज’ प्लाटून मिलेगा – छह ड्रोन, दो ग्राउंड स्टेशन और मोबाइल लॉन्च टीम के साथ।

इस इंडक्शन से भारतीय सेना की ड्रोन क्षमता में क्रांति आएगी। LAC और LoC पर घुसपैठ रोकना आसान हो जाएगा, जहां दुश्मन के BAT (बॉर्डर एक्शन टीम) जैसे ग्रुप्स अब आसानी से निशाने पर आ सकेंगे। कर्नल चतुर्वेदी कहते हैं, “यह ड्रोन मेरी यूनिट की रातों की नींद चुराने वाली समस्या का हल है। अब हमारी आंखें आसमान में हमेशा सतर्क रहेंगी।” सेना का लक्ष्य हर सैनिक को ड्रोन ऑपरेटर बनाना है – ‘ईगल इन द आर्म’ कॉन्सेप्ट के तहत।

‘बाज’ न केवल सैन्य क्षमता बढ़ाएगा, बल्कि निजी क्षेत्र को रक्षा उत्पादन में नया आयाम देगा। DRDO और स्टार्टअप्स के सहयोग से विकसित यह ड्रोन आधुनिक युद्ध की मांगों को पूरा करता है, जहां ड्रोन स्वार्म और लेजर-बेस्ड काउंटर सिस्टम्स भी शामिल हो रहे हैं। कुल मिलाकर, ‘बाज’ भारत की रक्षा प्रणाली को और मजबूत बनाते हुए, वैश्विक स्तर पर एक मिसाल कायम करेगा।

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