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ब्रह्मांड की ‘फूलों वाली माला’: जेम्स वेब ने खोजी 20 आकाशगंगाओं की ‘कॉस्मिक वाइन’

ब्रह्मांड की ‘फूलों वाली माला’: जेम्स वेब ने खोजी 20 आकाशगंगाओं की ‘कॉस्मिक वाइन’

वाशिंगटन: ब्रह्मांड के रहस्यों को उजागर करने वाले नासा के जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप (JWST) ने एक बार फिर विज्ञान जगत को चकित कर दिया है। दूरबीन ने प्रारंभिक ब्रह्मांड में 20 जुड़ी हुई आकाशगंगाओं की एक विशाल संरचना की खोज की है, जिसे ‘कॉस्मिक वाइन’ नाम दिया गया है। यह संरचना आकाशगंगाओं की एक लंबी लता जैसी दिखाई देती है, जो फूलों की माला की याद दिलाती है – एक ऐसी माला जो अरबों वर्ष पुरानी है। यह खोज ब्रह्मांड की सबसे बड़ी संरचनाओं के निर्माण के रहस्यों को सुलझाने में मदद कर सकती है, जहां गुरुत्वाकर्षण ने गैस और आकाशगंगाओं को एक साथ बांधा है।

यह ‘वाइन’ जैसी संरचना लगभग 13 मिलियन प्रकाश वर्ष लंबी और 6,50,000 प्रकाश वर्ष चौड़ी है, जो हमारी मिल्की वे आकाशगंगा (1,00,000 प्रकाश वर्ष चौड़ी) से कहीं बड़ी है। खोजकर्ता, डेनमार्क के कॉस्मिक डॉन सेंटर (DAWN) के शोधकर्ताओं की टीम के नेतृत्व में पोस्ट-डॉक्टरल वैज्ञानिक शुओवेन जिन ने बताया कि यह संरचना रेडशिफ्ट 3.44 पर स्थित है। इसका मतलब है कि इसकी रोशनी ने 11 से 12 अरब वर्ष की यात्रा की है – जब ब्रह्मांड महज 2 अरब वर्ष का था। JWST की अवरक्त क्षमताओं ने इन प्राचीन आकाशगंगाओं को पहचाना, जो दृश्य प्रकाश से परे चली गई थीं। अध्ययन 8 नवंबर 2023 को arXiv पर प्रकाशित हुआ और बाद में एस्ट्रॉनॉमी एंड एस्ट्रोफिजिक्स जर्नल में विस्तार से आया।

‘कॉस्मिक वाइन’ की खोज एक्सटेंडेड ग्रोथ स्ट्रिप (EGS) क्षेत्र में हुई, जो उर्सा मेजर और बूट्स नक्षत्रों के बीच स्थित है। JWST के NIRCam इंस्ट्रूमेंट ने हबल स्पेस टेलीस्कोप के डेटा के साथ मिलकर 20 स्पेक्ट्रोस्कोपिक रेडशिफ्ट वाली आकाशगंगाओं और 6 ओवरडेंसिटी (4-7 सिग्मा) का पता लगाया, जो एक धनुषाकार लता बनाती हैं। इसकी कुल द्रव्यमान सूर्य के 260 अरब गुना है। दिलचस्प बात, इसमें दो विशाल ‘क्विएसेंट’ आकाशगंगाएं हैं – जहां तारों का निर्माण लगभग रुक चुका है। ये आकाशगंगाएं गैस और धूल की कमी से ‘शांत’ हो गई हैं, जो बताता है कि प्रारंभिक ब्रह्मांड में कैसे बड़े क्लस्टर बने। शोधकर्ताओं का अनुमान है कि यह वाइन भविष्य में एक विशाल आकाशगंगा क्लस्टर में बदल जाएगी, जैसे हमारा कोमा क्लस्टर।

यह खोज ब्रह्मांड के ‘कॉस्मिक वेब’ को समझने में मील का पत्थर है – एक जाल जैसी संरचना जहां फिलामेंट्स आकाशगंगाओं को जोड़ते हैं। JWST ने दिखाया कि प्रारंभिक ब्रह्मांड में ये संरचनाएं पहले से ही जटिल थीं, जो सिमुलेशंस (जैसे Cluster-EAGLE) से मेल खाती हैं। भविष्य में यूक्लिड टेलीस्कोप ऐसी और संरचनाओं का अध्ययन करेगा। जिन कहते हैं, “यह वाइन हमें बताती है कि आकाशगंगाएं कैसे गुरुत्वाकर्षण से बंधीं और विकसित हुईं।” क्या यह फूलों की माला ब्रह्मांड के जन्म की कहानी कह रही है? वैज्ञानिकों को अब और गहराई से खोजने का मौका मिला है।

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