लोकसभा में वंदे मातरम बहस: ‘कांग्रेस ने राष्ट्रगीत का दर्जा दिया’, गौरव गोगोई का पीएम मोदी पर पलटवार
लोकसभा में वंदे मातरम बहस: ‘कांग्रेस ने राष्ट्रगीत का दर्जा दिया’, गौरव गोगोई का पीएम मोदी पर पलटवार
संसद के शीतकालीन सत्र के छठे दिन लोकसभा में राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के 150वें वर्षगांठ पर विशेष चर्चा के दौरान विपक्ष ने सरकार पर इतिहास को तोड़-मरोड़ने का आरोप लगाया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू हुई बहस में कांग्रेस के डिप्टी लीडर गौरव गोगोई ने कहा, “कांग्रेस ने ही वंदे मातरम को राष्ट्रगीत का दर्जा दिया। यह हमारी पार्टी ही थी जिसने इसे स्लोगन से ऊपर उठाकर राष्ट्रीय सम्मान दिलाया।” गोगोई ने पीएम मोदी पर ‘इतिहास री-राइट’ करने और बहस को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाते हुए नेहरू-कांग्रेस की भूमिका को रेखांकित किया।
गोगोई ने बहस में कहा, “1896 के कलकत्ता अधिवेशन में रवींद्रनाथ टैगोर ने पहली बार वंदे मातरम गाया। 1905 के बनारस अधिवेशन में सरला देवी चौधरानी ने इसे प्रस्तुत किया। 1937 के फैजाबाद अधिवेशन में मुस्लिम लीग के दबाव के बावजूद कांग्रेस ने पहले दो छंदों को राष्ट्रीय सभाओं में गाने का फैसला किया। यह फैसला जनभावना पर आधारित था, न कि हिंदू महासभा या लीग के आदेश पर।” उन्होंने मौलाना आजाद का हवाला देते हुए कहा, “मौलाना आजाद ने कहा था, ‘मुझे वंदे मातरम से कोई समस्या नहीं’। यही कांग्रेस और जिन्ना के बीच का फर्क था।” गोगोई ने बंगाल की भूमिका की तारीफ की: “बंगाल ने हमें ईश्वर चंद्र विद्यासागर, राजा राम मोहन राय, बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय, स्वामी विवेकानंद, अरविंद घोष, खुदीराम बोस, काजी नजरुल इस्लाम, टैगोर और सुभाष चंद्र बोस जैसे महान व्यक्तित्व दिए।”
पीएम मोदी ने बहस की शुरुआत में कांग्रेस पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा कि 1937 में कांग्रेस ने गीत के कुछ छंद हटा दिए, जो विभाजन का बीज बने। “नेहरू ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस को पत्र लिखा कि वंदे मातरम मुसलमानों को चिढ़ा सकता है। कांग्रेस ने मुस्लिम लीग के आगे सिर झुका लिया।” मोदी ने ‘मिसिंग स्टैंजास’ (गायत्री मंत्र जैसे छंद) पढ़े और कहा, “वंदे मातरम स्वतंत्रता का मंत्र था, बलिदान का मंत्र था।” उन्होंने कांग्रेस को 50 बार नाम लेते हुए इमरजेंसी और विभाजन से जोड़ा।
गोगोई ने पलटवार करते हुए कहा, “पीएम मोदी को नेहरू का नाम 14 बार और कांग्रेस का 50 बार लेना आदत हो गई है। वे बंगाल को कभी समझ ही नहीं पाए – न बंकिम चंद्र के विचारों को, न विज्ञान या स्वतंत्र भारत के सपनों को।” उन्होंने भाजपा के पूर्वजों पर सवाल उठाया: “1937 में कहां थे? 1942 के क्विट इंडिया मूवमेंट में कहां थे? लाखों ने ब्रिटिशों से लड़ा, जेल गए, जान दी। आज राष्ट्रवाद की बात करने वाले इतिहास नहीं बदल सकते।” गोगोई ने जोर दिया, “भाजपा कितना भी कोशिश करे, नेहरू की विरासत पर एक भी दाग नहीं लगा सकती।”
बहस में प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी हिस्सा लिया। उन्होंने कहा, “राष्ट्रीय गीत पर बहस क्यों? असली मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए?” बहस 10 घंटे चली, जिसमें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समापन करेंगे। राज्यसभा में मंगलवार को गृह मंत्री अमित शाह चर्चा शुरू करेंगे। विपक्ष ने टैगोर को ‘अपमानित’ करने का आरोप लगाया, जबकि सरकार ने इसे ‘एकता का प्रतीक’ बताया। यह चर्चा स्वतंत्रता संग्राम की विरासत को फिर से जीवंत कर रही है।
