राजनीति

वंदे मातरम बहस में अखिलेश यादव का तीखा प्रहार: ‘सिर्फ गाने के लिए नहीं, निभाने के लिए है… नकली राष्ट्रवादियों के लिए नहीं’

वंदे मातरम बहस में अखिलेश यादव का तीखा प्रहार: ‘सिर्फ गाने के लिए नहीं, निभाने के लिए है… नकली राष्ट्रवादियों के लिए नहीं’

लोकसभा में राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के 150वें वर्षगांठ पर विशेष चर्चा के दौरान समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और कन्नौज सांसद अखिलेश यादव ने भाजपा पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा, “वंदे मातरम सिर्फ गाने के लिए नहीं, निभाने के लिए है। यह नकली राष्ट्रवादियों के लिए नहीं है।” यादव ने गीत को राजनीतिक हथियार बनाने का आरोप लगाते हुए जोर देकर कहा कि यह स्वतंत्रता संग्राम का प्रतीक है, जो पूरे राष्ट्र की भावनाओं का प्रतिनिधित्व करता है, न कि किसी एक पार्टी का। उनका यह भाषण बहस का हाइलाइट बना, जिसमें उन्होंने गीत की ऐतिहासिक महत्वता को रेखांकित करते हुए वर्तमान राजनीति पर कटाक्ष किया।

अखिलेश ने बहस की शुरुआत बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय को याद करते हुए की। “यह गीत लाखों लोगों को जगाने वाला था। रवींद्रनाथ टैगोर ने इसे लोकप्रिय बनाया। ब्रिटिशों को इतना डर था कि 1905 से 1908 तक इसे प्रतिबंधित कर दिया, लेकिन क्रांतिकारियों ने इसे दिलों में रखा और आंदोलन फैलाया।” उन्होंने कहा कि गीत ने लोगों को एकजुट किया, ब्रिटिशों को डराया और आजादी की लड़ाई को मजबूत किया। लेकिन आज इसे ‘ओन’ करने की कोशिश हो रही है। “शासक दल सब कुछ अपना बनाना चाहता है। जो उनका नहीं, उसे भी हथियाना चाहते हैं। यह राष्ट्र-विवादी (राष्ट्र-विरोधी) है।”

यादव ने भाजपा के इतिहास पर तंज कसा: “स्वतंत्रता से पहले और बाद में भी उन्होंने यह गीत क्यों नहीं गाया? कुछ लोग ब्रिटिशों के लिए जासूस बने, लेकिन सच्चे क्रांतिकारियों ने इसे दिल से जिया।” उन्होंने अयोध्या से सांसद अवधेश प्रसाद को बीच में खड़ा कर हास्य का पुट दिया: “इनको देख लीजिए।” यह टिप्पणी भाजपा के सांसदों के हस्तक्षेप पर थी, जो यादव के भाषण को बीच में रोकने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने जोर दिया कि वंदे मातरम राजनीतिकरण का शिकार न बने। “यह हर भारतीय का है, किसी पार्टी का नहीं। सांप्रदायिक राजनीति नहीं चलेगी, क्योंकि यह हर नागरिक के दिल में भावना के रूप में जीवित है।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बहस शुरू करते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा था, लेकिन अखिलेश ने पलटवार किया। “प्रतीकवाद पर फोकस करने से ज्यादा महत्वपूर्ण है कार्रवाई। संविधान में कई निर्देश हैं, बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर ने रास्ता दिखाया। देश आजाद हो, कानून ठीक से चलें, न्याय मिले, सामाजिक न्याय सुनिश्चित हो – यही वंदे मातरम का सार है।” उन्होंने कहा कि गीत गाने से ज्यादा इसे जीना जरूरी है, अन्यथा यह खोखला हो जाता है। यादव का भाषण सदन में तालियां बटोर गया और विपक्ष ने एकजुटता दिखाई। प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी कहा कि असली मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए ऐसा हो रहा है।

यह 10 घंटे की बहस का हिस्सा थी, जहां भाजपा को 3 घंटे मिले। राज्यसभा में मंगलवार को गृह मंत्री अमित शाह चर्चा शुरू करेंगे। विशेषज्ञों का कहना है कि यह बहस राष्ट्रवाद को परिभाषित करने की कोशिश है, लेकिन अखिलेश ने इसे गैर-राजनीतिक बनाने का संदेश दिया। वंदे मातरम की विरासत को बचाने का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा, “यह एकता का प्रतीक है, विभाजन का नहीं।”

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