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वंदे मातरम पर चर्चा में PM मोदी के प्रमुख बयान: ‘यह मंत्र आज भी एकजुट कर रहा है’

वंदे मातरम पर चर्चा में PM मोदी के प्रमुख बयान: ‘यह मंत्र आज भी एकजुट कर रहा है’

लोकसभा में राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के 150वें वर्षगांठ पर विशेष चर्चा की शुरुआत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भावुक और प्रेरणादायक भाषण दिया। उन्होंने गीत को स्वतंत्रता संग्राम का ‘मंत्र’ और ‘युद्धघोष’ बताया, जो ब्रिटिश शासन के खिलाफ जनता को एकजुट करने वाला था। पीएम ने कहा कि यह गीत आज भी ‘विकसित भारत 2047’ के सपनों को साकार करने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कांग्रेस पर भी निशाना साधा, लेकिन शुरुआत में सदन को एकजुट होने का आह्वान किया। आइए, उनके प्रमुख बयानों पर नजर डालें:

एकजुटता का संदेश: “यहां कोई नेतृत्व और विपक्ष नहीं है। हम वंदे मातरम के ऋण को सामूहिक रूप से स्वीकार करने और सराहने के लिए यहां हैं। इसी गीत के कारण हम सब यहां एक साथ हैं। आज का यह पवित्र अवसर है।” पीएम ने सदन के सभी सदस्यों को धन्यवाद देते हुए कहा कि यह चर्चा प्रेरणा का स्रोत बनेगी।

स्वतंत्रता संग्राम में भूमिका: “वंदे मातरम एक मंत्र, एक नारा है जिसने स्वतंत्रता आंदोलन को ऊर्जा, प्रेरणा दी और बलिदान व तपस्या का मार्ग दिखाया। जब ब्रिटिश ‘गॉड सेव द क्वीन’ को हर घर ले जाने की कोशिश कर रहे थे, तब वंदे मातरम ने देश को एकजुट किया। यह गीत 1947 में आजादी दिलाने वाली शक्ति था।” उन्होंने बंगाल की देशभक्ति की तारीफ की: “बंगाल ने देश को रास्ता दिखाया।”

ऐतिहासिक संदर्भ: “वंदे मातरम के 50 वर्ष पूरे होने पर देश गुलामी में था, और 100 वर्ष पर इमरजेंसी का काल। आज 150 वर्ष पर हम स्वतंत्र हैं और इसका साक्षी बन रहे हैं – यह गर्व का विषय है।” पीएम ने अन्य ऐतिहासिक घटनाओं का जिक्र किया: संविधान के 75 वर्ष, सरदार पटेल व बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती, गुरु तेग बहादुर की 350वीं शहादत। “यह कालखंड ऐतिहासिक मील का पत्थर है।”

कांग्रेस पर आरोप: चर्चा के दौरान पीएम ने कांग्रेस पर ‘वंदे मातरम’ को ‘विभाजित’ करने का आरोप लगाया। “1937 में मुस्लिम लीग ने विरोध किया, जिन्ना ने लखनऊ से नारा लगाया। नेहरू ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस को पत्र लिखकर कहा कि गीत के कुछ भाग मुसलमानों को चिढ़ा सकते हैं। 26 अक्टूबर को कांग्रेस ने समझौता कर गीत को टुकड़ों में बांट दिया – सामाजिक सद्भाव का बहाना था, लेकिन यह विभाजन का बीज बोया। बाद में भारत का विभाजन हुआ। कांग्रेस ने मुस्लिम लीग के आगे सिर झुकाया, आज भी वे विवाद पैदा करते हैं।” उन्होंने ‘मिसिंग स्टैंजास’ (गायत्री मंत्र जैसे छंद) को पढ़ा, जो कथित रूप से हटा दिए गए थे।

भविष्य की प्रेरणा: “वंदे मातरम देश को शक्ति और दिशा देता है। यह हजारों वर्ष पुरानी सांस्कृतिक ऊर्जा है, स्वतंत्रता की भावना और स्वतंत्र भारत का दृष्टिकोण। सरकार इसका वैभव भावी पीढ़ियों के लिए बहाल करने का लक्ष्य रखती है। दुनिया में कहीं ऐसा कोई गीत या कविता नहीं जो सदियों तक करोड़ों लोगों को बलिदान के लिए प्रेरित करे।” पीएम ने कहा कि यह गीत आज ‘विकसित भारत’ के लिए एकजुट होने का समय है।

यह चर्चा 10 घंटे की थी, जिसमें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समापन करेंगे। राज्यसभा में मंगलवार को गृह मंत्री अमित शाह चर्चा शुरू करेंगे। विपक्ष ने पीएम के नेहरू पर आरोपों का खंडन किया, लेकिन चर्चा ने राष्ट्रीय एकता का संदेश दिया। पीएम का भाषण यूट्यूब पर वायरल हो रहा है, जहां लाखों ने इसे देखा। वंदे मातरम!

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