जेडी वांस का विवादास्पद बयान: ‘मास माइग्रेशन अमेरिकन ड्रीम की चोरी’, पत्नी उषा को लेकर ‘भारत भेजो’ की मांग – सोशल मीडिया पर हंगामा
जेडी वांस का विवादास्पद बयान: ‘मास माइग्रेशन अमेरिकन ड्रीम की चोरी’, पत्नी उषा को लेकर ‘भारत भेजो’ की मांग – सोशल मीडिया पर हंगामा
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वांस एक बार फिर अपने विवादास्पद बयान से सुर्खियों में हैं। एक्स (पूर्व ट्विटर) पर एक पोस्ट में उन्होंने कहा कि “बड़े पैमाने पर आव्रजन अमेरिकन ड्रीम की चोरी है।” वांस ने तर्क दिया कि अप्रवासी अमेरिकी श्रमिकों के अवसरों को छीन रहे हैं और इसके विपरीत सुझाव देने वाले सभी अध्ययन ‘पुरानी व्यवस्था से अमीर बनने वालों’ द्वारा वित्त पोषित हैं। यह बयान लुइसियाना के एक निर्माण कंपनी मालिक के वीडियो पर प्रतिक्रिया में आया, जिसमें आईसीई (अमेरिकी आप्रवासन एवं कस्टम्स प्रवर्तन) की मौजूदगी से अप्रवासियों के काम पर न आने का दावा किया गया था।
वांस ने 7 दिसंबर को पोस्ट किया: “मास माइग्रेशन अमेरिकन ड्रीम की चोरी है। यह हमेशा से ऐसा ही रहा है, और इसके विपरीत सुझाव देने वाले हर पोजीशन पेपर, थिंक टैंक पीस और इकोनोमेट्रिक अध्ययन का भुगतान उन लोगों द्वारा किया जाता है जो पुरानी व्यवस्था से अमीर बन रहे हैं।” यह बयान ट्रंप प्रशासन की सख्त अप्रवासन नीतियों का हिस्सा लगता है, जहां हाल ही में 19 ‘हाई-रिस्क’ देशों से ग्रीन कार्ड, नागरिकता और शरण अनुरोधों पर रोक लगा दी गई।
लेकिन वांस का बयान उल्टा पड़ा। आलोचकों ने इसे नस्लवादी और पाखंडपूर्ण बताया, खासकर क्योंकि उनकी पत्नी उषा वांस भारतीय अप्रवासियों की बेटी हैं। उषा का जन्म सैन डिएगो में हुआ, लेकिन उनके माता-पिता आंध्र प्रदेश से 1970 के दशक में अमेरिका आए थे। सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं आईं। लेखक वजाहत अली ने लिखा, “इसका मतलब तो यह कि उषा, उनके भारतीय परिवार और मिश्रित नस्ल के बच्चों को भारत भेजना पड़ेगा।” एक यूजर ने कहा, “तुम्हारी पत्नी और बच्चे अमेरिकन ड्रीम चुरा रहे हैं।” दूसरे ने तंज कसा, “इन-लॉज से नफरत तो ठीक, लेकिन यह तो अतिशयोक्ति है?” कई ने कहा, “उषा को भारत भेज दो, अपनी ही नीति के तहत।”
यह विवाद वांस के पिछले बयानों से जुड़ गया। न्यूयॉर्क पोस्ट पॉडकास्ट में उन्होंने कहा था कि अमेरिकियों के लिए “एक ही नस्ल, भाषा या त्वचा के रंग वाले पड़ोसी पसंद करना पूरी तरह स्वीकार्य है।” उन्होंने ट्रंप प्रशासन के अप्रवासी हटाने के प्लान पर कहा, “हम जितने अधिक हो सके, उतने को हटाने की कोशिश करेंगे।” उषा के हिंदू धर्म पर भी विवाद हुआ, जब वांस ने कहा कि वे चाहते हैं कि उषा ईसाई बनें। बाद में उन्होंने स्पष्ट किया कि उषा का कोई कन्वर्जन प्लान नहीं है।
डेमोक्रेट्स और सिविल राइट्स ग्रुप्स ने वांस की आलोचना की। एक प्रवासी संगठन ने कहा, “यह सामूहिक सजा है, जो लाखों परिवारों को प्रभावित करेगी।” ट्रंप प्रशासन का कहना है कि यह सुरक्षा के लिए जरूरी है, खासकर वाशिंगटन डीसी में एक अफगान शरणार्थी द्वारा नेशनल गार्ड सदस्य की हत्या के बाद।
वांस का यह बयान 2026 मिडटर्म चुनावों से पहले रिपब्लिकन बेस को मजबूत करने की कोशिश लगता है, लेकिन यह उषा की विरासत को निशाना बना रहा है। सोशल मीडिया पर #SendUshaBack ट्रेंड कर रहा है। वांस ने अभी तक जवाब नहीं दिया, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि यह उनकी छवि को और नुकसान पहुंचाएगा। अमेरिकी अप्रवासन नीति पर बहस तेज हो गई है – क्या यह ड्रीम की रक्षा है या विभाजन की राजनीति?
