धराली आपदा: कर्नल कोठियाल के आरोपों पर भाजपा का जवाब—’गंभीर जांच होगी, विपक्ष राजनीति न करे’
धराली आपदा: कर्नल कोठियाल के आरोपों पर भाजपा का जवाब—’गंभीर जांच होगी, विपक्ष राजनीति न करे’
उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में अगस्त 2025 में आई धराली आपदा पर पूर्व सैनिक कर्नल (रिटायर्ड) अजय कोठियाल के तीखे आरोपों पर भाजपा सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि मामले की गहन जांच की जाएगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार ने स्पष्ट किया कि आपदा प्रबंधन में किसी भी लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, लेकिन विपक्ष को इस संवेदनशील मुद्दे पर राजनीति करने से बाज आना चाहिए। कर्नल कोठियाल, जो भाजपा में शामिल होने के बाद भी आपदा राहत कार्यों के लिए जाने जाते हैं, ने हाल ही में सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर सरकार पर ‘प्रशासनिक उदासीनता’ का आरोप लगाया था, जिससे सियासी हलचल तेज हो गई है।
कर्नल कोठियाल ने अपने वीडियो में दावा किया था कि धराली गांव में आई भयंकर बाढ़ और भूस्खलन के बाद प्रभावित परिवारों को अभी तक उचित मुआवजा और पुनर्वास सुविधाएं नहीं मिली हैं। उन्होंने कहा, “सरकार ने पुनर्निर्माण की जिम्मेदारी मुझे सौंपी थी, लेकिन स्थानीय प्रशासन की लापरवाही से सैकड़ों परिवार खुले आसमान तले गुजारबाकी कर रहे हैं। यह आपदा नहीं, प्रशासनिक विफलता का नतीजा है।” कोठियाल, जो 2013 की केदारनाथ आपदा के हीरो के रूप में मशहूर हैं, ने 2025 की धराली घटना में भी राहत कार्यों का नेतृत्व किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि मलबा हटाने और गांव को दोबारा बसाने के वादे खोखले साबित हो रहे हैं, जबकि करोड़ों का बजट कागजों पर ही अटका है।
भाजपा सरकार की ओर से मुख्यमंत्री कार्यालय ने मंगलवार को आधिकारिक बयान जारी कर कहा, “कर्नल कोठियाल के आरोप गंभीर हैं, और हम इन्हें हल्के में नहीं लेंगे। एक उच्च स्तरीय जांच समिति गठित की जा रही है, जिसमें आपदा प्रबंधन विभाग, स्थानीय प्रशासन और विशेषज्ञों को शामिल किया जाएगा। सच्चाई सामने आने पर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।” राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) के महाद्वीप सिंह ने बताया कि धराली में अब तक 150 करोड़ रुपये का राहत पैकेज वितरित किया गया है, जिसमें 500 परिवारों को अस्थायी आवास और 200 को मुआवजा मिल चुका है। उन्होंने कहा, “पुनर्वास कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है, लेकिन अगर कोई खामी है तो उसे सुधारेंगे।”
सरकार ने विपक्षी दलों—खासकर कांग्रेस और आप—को निशाने पर लेते हुए कहा कि वे आपदा को सियासी रोटी सेंकने का जरिया न बनाएं। भाजपा प्रदेश प्रवक्ता मनवीर सिंह चौहान ने कहा, “कर्नल कोठियाल हमारे सम्मानित नेता हैं, लेकिन विपक्ष उनके बयानों को तोड़-मरोड़कर प्रचारित कर रहा है। 2022 में कोठियाल जी ने ही भाजपा जॉइन की थी, और सरकार ने उन्हें पूर्व सैनिक कल्याण सलाहकार परिषद का अध्यक्ष बनाया। अब वे खुद जांच का हिस्सा बन सकते हैं। विपक्ष को राहत कार्यों में सहयोग करना चाहिए, न कि अफवाहें फैलानी चाहिए।” चौहान ने याद दिलाया कि अगस्त में धराली आपदा पर ही पुलिस ने भड़काऊ फेसबुक पोस्ट्स के लिए चार लोगों पर FIR दर्ज की थी, जिसमें झूठी खबरें फैलाने का आरोप था।
विपक्ष ने सरकार के बयान पर तीखा पलटवार किया। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा ने कहा, “सरकार जांच की बात तो कर रही है, लेकिन कोठियाल जैसे हीरो के आरोपों को दबाने की कोशिश हो रही है। धराली के लोग आज भी बेघर हैं, जबकि धामी सरकार पर्यटन को बढ़ावा देने में लगी है।” आम आदमी पार्टी (आप), जहां कोठियाल 2022 में सीएम फेस थे, ने कहा कि यह भाजपा का ‘कुशासन’ का प्रमाण है। पार्टी के पूर्व नेता प्रीतम सिंह ने ट्वीट कर लिखा, “कोठियाल साहब ने सच्चाई बोली, अब सरकार जांच का बहाना बना रही। उत्तराखंड को आपदा मुक्त बनाने का वादा कब पूरा होगा?”
यह विवाद उत्तराखंड की आपदा-प्रवण राजनीति को फिर उजागर कर रहा है। 2013 की केदारनाथ त्रासदी के बाद से राज्य में 2025 तक 20 से ज्यादा बड़ी आपदाएं आ चुकी हैं, जिनमें धराली जैसी घटनाएं हजारों जिंदगियां प्रभावित करती रहीं। विशेषज्ञों का कहना है कि पुनर्वास में देरी जलवायु परिवर्तन और अवैध निर्माण का नतीजा है। फिलहाल, जांच समिति के गठन से उम्मीद बंधी है, लेकिन सियासी तनाव कम होने के संकेत नहीं हैं।
