उत्तराखंड

उत्तराखंड में स्मार्ट मीटर लगाने का काम फिर शुरू: शिकायतों के निपटारे के बाद UPCL ने जारी किए आदेश

उत्तराखंड में स्मार्ट मीटर लगाने का काम फिर शुरू: शिकायतों के निपटारे के बाद UPCL ने जारी किए आदेश

उत्तराखंड में बिजली उपभोक्ताओं की शिकायतों के बाद कुछ दिनों के लिए रुके स्मार्ट मीटर लगाने के कार्य को फिर से हरी झंडी दे दी गई है। उत्तराखंड पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPCL) के निदेशक (परिचालन) एमआर आर्य ने सोमवार को इस संबंध में आदेश जारी कर दिए, जिसमें स्पष्ट किया गया कि शिकायतों का पूर्ण निपटारा मेगा कैंपों के माध्यम से हो चुका है। अब राज्य के सभी 13 विद्युत वितरण मंडलों—देहरादून, हरिद्वार, ऊधम सिंह नगर, नैनीताल सहित—में स्मार्ट मीटर स्थापना का काम युद्ध स्तर पर फिर शुरू हो जाएगा। UPCL का यह फैसला उपभोक्ताओं की लंबित शिकायतों को दूर करने और बिजली वितरण प्रणाली को डिजिटल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

UPCL के आदेश के मुताबिक, नवंबर 2025 में शिकायतों के मद्देनजर स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया को अस्थायी रूप से रोक दिया गया था। निदेशक आर्य ने कहा, “शिकायतों का निपटारा मेगा कैंपों में किया गया है। अब सभी लंबित मामले सुलझ चुके हैं, इसलिए स्मार्ट मीटर स्थापना का कार्य तत्काल प्रभाव से फिर शुरू कर दिया गया है।” उन्होंने जोर देकर कहा कि यह कदम केंद्र सरकार की रिवैंप्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (RDSS) के तहत चल रहा राष्ट्रीय कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य मीटर रीडिंग में मानवीय हस्तक्षेप समाप्त कर बिलिंग संबंधी शिकायतों को 50 प्रतिशत तक कम करना है। राज्य में 15 लाख से अधिक घरों में स्मार्ट मीटर लगाने का लक्ष्य है, जो उपभोक्ताओं को मोबाइल ऐप के माध्यम से रीयल-टाइम बिजली खपत की जानकारी देगा।

उत्तराखंड में स्मार्ट मीटर विवाद की जड़ बिलिंग त्रुटियां और मीटर की खराबी थीं। नवंबर मध्य में UPCL ने सभी नए कनेक्शन और पुराने मीटरों के स्थानांतरण पर रोक लगा दी थी, जब उपभोक्ताओं ने हेल्पलाइन, सीएम हेल्पलाइन और विभागीय कैंपों में हजारों शिकायतें दर्ज कराईं। एक रिपोर्ट के अनुसार, देहरादून और हरिद्वार जैसे शहरों में 20-30 प्रतिशत शिकायतें मीटर रीडिंग से जुड़ी थीं। मेगा कैंपों में UPCL ने 5,000 से अधिक शिकायतों का समाधान किया, जिसमें गलत बिलिंग सुधार, मीटर कैलिब्रेशन और रिफंड शामिल थे। ऊर्जा सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम ने फरवरी 2025 में कहा था कि स्मार्ट मीटर उपभोक्ता के हाथों में नियंत्रण देंगे, लेकिन स्थापना में देरी से उपभोक्ता असंतुष्ट थे।

अब फिर शुरू होने वाले कार्य से UPCL को राहत मिलेगी। निदेशक आर्य ने बताया कि राज्य के 33/11 केवी सबस्टेशनों पर शिकायत रजिस्टर उपलब्ध हैं, और स्मार्ट मीटर ऐप से उपभोक्ता खुद खपत मॉनिटर कर सकेंगे। इससे बिजली चोरी पर भी अंकुश लगेगा। हालांकि, विपक्ष ने इसे ‘जल्दबाजी’ बताया। कांग्रेस नेता हरिश रावत ने कहा, “शिकायतें निपट गईं तो ठीक, लेकिन मीटर की गुणवत्ता सुनिश्चित हो। पहले भी खराब मीटरों से उपभोक्ता परेशान हुए।” UPCL ने स्पष्ट किया कि सभी मीटर EESL (एनर्जी एफिशिएंसी सर्विसेज लिमिटेड) मानकों पर आधारित हैं।

यह कदम उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों के समान है, जहां UPERC ने नवंबर 2025 में UPPCL को नए कनेक्शनों के लिए स्मार्ट मीटर खरीदने का निर्देश दिया था। विशेषज्ञों का मानना है कि स्मार्ट मीटर से बिजली वितरण में पारदर्शिता बढ़ेगी, लेकिन नियमित मॉनिटरिंग जरूरी। UPCL ने अपील की कि शिकायतों के लिए हेल्पलाइन 1912 पर संपर्क करें।

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