₹3000 में मौत का टारगेट: कैसे SIR ने BLOs को बना दिया ‘डेथलाइन’ का शिकार
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया, जो वोटर लिस्ट को अपडेट करने का दावा करती है, BLOs (बूथ लेवल ऑफिसर्स) के लिए ‘डेथलाइन’ बन चुकी है। ₹3,000 मासिक हॉनरेरियम पर काम करने वाले इन BLOs को 15.44 करोड़ वोटर्स के बीच फॉर्म भरवाने-डिजिटाइज करने का अंबार सौंपा गया है। 4 दिसंबर की डेडलाइन नजदीक आते ही तनाव चरम पर है—FIR, सस्पेंशन, आत्महत्याएं और विरोध प्रदर्शन रोज की बात हो गई।
SIR का फेज-2 4 नवंबर को शुरू हुआ, जो 9 राज्यों और 3 यूनियन टेरिटरीज में चल रहा है। UP में 1.62 लाख BLOs को घर-घर जाकर एन्यूमरेशन फॉर्म (पूर्व-भरे हुए) बांटने, भरवाने और डिजिटाइज करने का टास्क है। ECI का लक्ष्य: 4 दिसंबर तक 100% कलेक्शन, 9 दिसंबर को ड्राफ्ट रोल पब्लिश। लेकिन 24 नवंबर तक UP में सिर्फ 26.6% फॉर्म डिजिटाइज हुए, जबकि 110 मिलियन बाकी हैं। BLOs को रोज 10 मिलियन फॉर्म डिजिटाइज करने पड़ रहे—एक BLO के हिस्से में औसतन 100-200 फॉर्म।
₹3,000 हॉनेरियम पर यह काम ‘अमानवीय’ लग रहा है। ज्यादातर BLOs शिक्षक, एंगनवाड़ी वर्कर्स या क्लर्क हैं, जिन्हें डेटा एंट्री का अनुभव नहीं। पुरानी वोटर लिस्ट नॉन-सर्चेबल और एरर-प्रोन होने से फॉर्म भरना मुश्किल। ECI के आउटडेटेड SOPs और ट्रेनिंग की कमी से फॉर्म पाइल-अप हो रहे हैं। BLOs को मेडिकल लीव तक नहीं मिल रही—गाजियाबाद में 21 कर्मचारियों पर ‘नेग्लिजेंस’ का केस दर्ज। नोएडा (गौतम बुद्ध नगर) में 60+ BLOs और 7 सुपरवाइजर्स पर FIR, सस्पेंशन।
सबसे दर्दनाक: तनाव से मौतें। मलिहाबाद के BLO विजय कुमार वर्मा (45) की 14 नवंबर को ब्रेन हेमरेज से मौत। पत्नी संगीता ने बताया, “SDM 200 फॉर्म न भरने पर FIR की धमकी देते थे। पति कुर्सी से गिरे, तो अस्पताल पहुंचे—लेकिन बच न सके।” अखिलेश यादव ने परिवार को ₹2 लाख दिए, कहा, “SIR वोट चोरी का हथकंडा है।” फतेहपुर में क्लर्क सुधीर कुमार (25) ने SIR दबाव में सुसाइड की। केरल में एक BLO ने 44 गोलियां खाईं, तमिलनाडु में एंगनवाड़ी वर्कर ने सस्पेंशन की धमकी पर ओवरडोज लिया। कुल 6 मौतें, जिनमें से 3 UP में।
X (पूर्व ट्विटर) पर हंगामा मचा है। यूजर्स BLOs की कहानियां शेयर कर रहे: “₹3k में 200 फॉर्म? यह गुलामी है!” एक पोस्ट में लिखा, “ECI BLOs को मशीन समझ रही, जबकि डिजिटाइजेशन सिर्फ 10%।” सुप्रिया श्रीनाते ने वीडियो शेयर कर CEC ज्ञानेश कुमार से सवाल किया: “डेडलाइन डेथलाइन बन गई।” बंगाल में BLOs ने चुनाव कार्यालय के बाहर धरना दिया। UP प्राइमरी टीचर्स एसोसिएशन ने CM को लेटर लिखा: “मानसिक उत्पीड़न बंद हो, SIR रद्द हो।”
विपक्ष का आरोप: SIR PDA (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) वोट काटने की साजिश। TMC ने CAA-NRC से लिंक बताया। BJP ने वार रूम बनाकर MPs-MLAs को SIR मॉनिटरिंग सौंपी। ECI का दावा: “शुद्ध वोटर लिस्ट से मजबूत लोकतंत्र।” लेकिन विशेषज्ञ कहते हैं, डिजिटल इंडिया के दौर में हाइब्रिड प्रोसेस फेल है। BLOs को सपोर्ट चाहिए—ट्रेनिंग, एक्स्ट्रा स्टाफ, मुआवजा।
UP में 7 फरवरी 2026 को फाइनल रोल पब्लिश होगा, लेकिन तब तक कितने और BLOs टूटेंगे? यह SIR न केवल चुनावी प्रक्रिया, बल्कि मानवीय संवेदना का भी सवाल बन गया है। BLOs की आवाज सुनो, वरना लोकतंत्र की नींव हिल जाएगी।
