राष्ट्रीय

26 हमलों का खूंखार मास्टरमाइंड: नक्सल सरगना हिडमा की खौफनाक कहानी

26 हमलों का खूंखार मास्टरमाइंड: नक्सल सरगना हिडमा की खौफनाक कहानी

छत्तीसगढ़ के घने जंगलों से निकला एक नाम जो दशकों तक सुरक्षा बलों का काल बनकर रहा—मदवी हिडमा। यह नक्सली सरगना, जिसे ‘बस्तर का भूत’ कहा जाता था, मंगलवार को आंध्र प्रदेश के अल्लूरी सीताराम राजू जिले के मारे डुमिल्ली जंगल में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में ढेर हो गया। 44 वर्षीय हिडमा के साथ उसकी पत्नी राजे उर्फ राजक्का और चार अन्य नक्सली भी मारे गए। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा 30 नवंबर तक खत्म करने का लक्ष्य रखे गए इस ‘मास्टरमाइंड’ का अंत नक्सलवाद के खात्मे की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। हिडमा पर केंद्र, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में कुल 1 करोड़ रुपये का इनाम था।

हिडमा का जन्म 1981 में छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के पुरवती गांव में एक गरीब आदिवासी परिवार में हुआ था। 16-17 साल की उम्र में वह बाल संगम (नक्सलियों का बच्चों का संगठन) से जुड़ा और 1990 के अंत में पीपुल्स लिबरेशन गोरिल्ला आर्मी (PLGA) में शामिल हो गया। जंगल की भौगोलिक समझ, सहनशक्ति और आक्रामकता ने उसे जल्दी ही ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया। 2010 तक वह PLGA बटालियन नंबर 1 का कमांडर बन चुका था, जो नक्सल संगठन की सबसे घातक और मोबाइल यूनिट मानी जाती थी। वह कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (माओइस्ट) की सेंट्रल कमेटी का सबसे युवा सदस्य था और बस्तर का इकलौता आदिवासी प्रतिनिधि। हिडमा ने IED ब्लास्ट, घात लगाकर हमले और गोरिल्ला युद्ध की रणनीतियां विकसित कीं। वह स्थानीय समर्थन और गुप्त संचार से बचते हुए लगातार ठिकाने बदलता रहता।

हिडमा की क्रूरता की मिसालें इतिहास के काले पन्नों में दर्ज हैं। पुलिस रिकॉर्ड्स के अनुसार, वह कम से कम 26 बड़े हमलों का मास्टरमाइंड था, जिसमें 150 से ज्यादा सुरक्षाकर्मी और नागरिक मारे गए। प्रमुख घटनाओं में 2010 का दंतेवाड़ा नरसंहार शामिल है, जहां 76 सीआरपीएफ जवान शहीद हुए—यह नक्सल इतिहास का सबसे खूनी हमला था। 2013 का झीरम घाटी हमला, जिसमें छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ कांग्रेसी नेता महेंद्र कर्मा, नंद कुमार पटेल और विद्या चरण शुक्ला समेत 27 लोग मारे गए। 2017 का बुरकापाल एम्बुश, जहां 24 सीआरपीएफ जवान शहीद हुए, और 2021 का सुकमा-बीजापुर एम्बुश, जिसमें 22 सुरक्षाकर्मी मारे गए। इसके अलावा, 2017 का मिनपा-टेकulgुडा हमला (21 जवान शहीद), 2011 का तADMETLA हमला (75 जवान शहीद) और 2021 का तारेम एम्बुश भी उसके नाम से जुड़े। हिडमा ने माओवादी विचारधारा फैलाने के लिए ‘क्रांतिकारी स्कूल’ भी स्थापित किए।

हाल के वर्षों में सुरक्षा बलों की सघन कार्रवाई ने हिडमा को घेर लिया। 2021 में मिलिंद तेलतुंबड़े के बाद से नक्सलवाद कमजोर पड़ा। अप्रैल 2025 से कर्रेगुट्टा हिल्स में 1000 से ज्यादा नक्सलियों का घेराव चला। हिडमा की मां मदवी पुंजी ने हाल ही में ससुराल का दौरा कर सरेंडर की अपील की थी। 10 नवंबर को छत्तीसगढ़ के डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने हिडमा की मां से मिलकर अंतिम प्रयास किया। लेकिन खुफिया जानकारी के आधार पर ग्रेहाउंड फोर्स ने त्रि-जंक्शन (छत्तीसगढ़-आंध्र-तेलंगाना) पर ऑपरेशन चलाया। मुठभेड़ में हिडमा समेत छह नक्सली मारे गए, और हथियार बरामद हुए।

बस्तर रेंज के आईजी सुंदरराज पट्टिलिंगम ने इसे ‘नक्सलवाद के खिलाफ सबसे बड़ा ब्रेकथ्रू’ बताया। सीएम विष्णु देव साय ने कहा, ‘हिडमा का खात्मा बस्तर में शांति की वापसी है।’ विशेषज्ञों का मानना है कि PLGA बटालियन-1 का कमांडर ढेर होने से नक्सल नेटवर्क बिखर जाएगा। अमित शाह का लक्ष्य मार्च 2026 तक नक्सल-मुक्त भारत है। हिडमा की कहानी गरीबी से हिंसा तक की यात्रा है, जो बताती है कि कैसे एक युवा आदिवासी ‘मास्टरमाइंड’ बन गया। लेकिन अब जंगल शांत हो रहे हैं—शायद स्थायी रूप से।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *