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दिल्ली दंगों पर SC में पुलिस का बम फूटा: ट्रंप दौरे की टाइमिंग पर साजिश, CAA प्रोटेस्ट था कवर… जानें पूरा मामला

दिल्ली दंगों पर SC में पुलिस का बम फूटा: ट्रंप दौरे की टाइमिंग पर साजिश, CAA प्रोटेस्ट था कवर… जानें पूरा मामला

सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली दंगों के ‘बड़े साजिश’ मामले की सुनवाई ने नया मोड़ ले लिया। दिल्ली पुलिस ने कोर्ट को हलफनामा देकर दावा किया कि 2020 के फरवरी दंगे कोई सहज हिंसा नहीं, बल्कि एक सुनियोजित ‘रिजीम चेंज ऑपरेशन’ थे। पुलिस ने कहा, “प्रोटेस्ट के लिए ट्रंप के दौरे की टाइमिंग चुनी गई, यह संयोग नहीं, साजिश थी।” तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत दौरे (24-25 फरवरी 2020) के ठीक समय पर दंगे भड़काने का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय मीडिया का ध्यान खींचना और देश को बदनाम करना था। इस दौरान 53 लोग मारे गए, 533 से ज्यादा घायल हुए और 750 से अधिक FIR दर्ज हुईं।

अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने सुनवाई के दौरान पुलिस का पक्ष रखते हुए कहा, “यह हिंसा CAA के नाम पर शांतिपूर्ण प्रोटेस्ट का चेहरा लगाकर की गई थी, लेकिन असल मकसद था सांप्रदायिक सद्भाव तोड़ना, सशस्त्र विद्रोह भड़काना और राष्ट्रीय सुरक्षा को चोट पहुंचाना।” हलफनामे में चैट मैसेज, कॉल रिकॉर्ड्स और गवाह बयानों का हवाला दिया गया, जो दर्शाते हैं कि साजिश दिसंबर 2019 से ही रची जा रही थी। पुलिस ने दावा किया कि आरोपी ट्रंप का जिक्र करते हुए योजना बना रहे थे, ताकि दंगे वैश्विक मुद्दा बनें और CAA को मुसलमानों के खिलाफ ‘पोग्रोम’ (नरसंहार) के रूप में पेश किया जा सके।

मुख्य आरोपी पूर्व JNU छात्र नेता उमर खालिद को पुलिस ने ‘मेंटर’ करार दिया। हलफनामे के अनुसार, खालिद ने युवा कार्यकर्ताओं को ट्रेनिंग दी, प्रोटेस्ट साइट्स चुनीं और मैसेजिंग कोऑर्डिनेट किया। शरजील इमाम को खालिद के ‘टॉप कांस्पिरेटर’ बताया गया, जो दिसंबर 2019 में दंगों की ‘फर्स्ट फेज’ का इंजीनियर था। अन्य आरोपी गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा-उर-रहमान और मोहम्मद सलीम खान पर भी साजिश का आरोप है। पुलिस ने कहा, “ये डॉक्टर-इंजीनियर जैसे बुद्धिजीवी आतंकवादी जमीनी स्तर के हमलावरों से ज्यादा खतरनाक हैं।” उन्होंने बांग्लादेश 2024 की अशांति का उदाहरण देते हुए चेतावनी दी कि ऐसी साजिशें सरकारें गिरा सकती हैं।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की बेंच—जस्टिस अरविंद कुमार और एनवी अंजरिया—ने पुलिस से सबूत मांगे। वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने बचाव में कहा कि आरोपी 5 साल से जेल में हैं, इसलिए बेल का हक है। लेकिन पुलिस ने जोर देकर कहा, “जेल, न कि बेल—क्योंकि यह राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला है।” हाईकोर्ट ने पहले इनकी बेल खारिज की थी। पुलिस ने आगे आरोप लगाया कि साजिश पैन-इंडिया थी—दिल्ली के अलावा असम को मुख्य भूमि से जोड़ने वाले ‘चिकन नेक’ (सिलिगुड़ी कॉरिडोर) को काटकर आर्थिक चोक कराने की योजना थी।

यह मामला UAPA (Unlawful Activities Prevention Act) के तहत दर्ज है, जो दंगों को ‘बड़ी साजिश’ बताता है। दिल्ली प्रोटेस्ट सपोर्ट ग्रुप (DPSG) को साजिश का केंद्र बताया गया। पूर्व में पुलिस ने दावा किया था कि खालिद ने ‘चक्का जाम’ का आइडिया दिया था। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सुनवाई राजनीतिक रूप से संवेदनशील है, क्योंकि यह CAA विरोधी आंदोलन को साजिश के रूप में पेश करती है। जस्टिस कुमार ने पुलिस से पूछा कि ट्रंप विजिट की तारीख 8 फरवरी को ही घोषित हुई, तो साजिश कैसे पहले से? पुलिस ने चैट्स से जवाब दिया।

सुनवाई जारी है, और कोर्ट फैसला सुरक्षित रख सकता है। यह घटना दर्शाती है कि कैसे प्रोटेस्ट राजनीतिक हथियार बन सकते हैं। क्या आरोपी बेल पा पाएंगे? नजरें सुप्रीम कोर्ट पर टिकी हैं।

 

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