बिहार विधानसभा में प्रोटेम स्पीकर: नाम तय, जानें इस महत्वपूर्ण पद की भूमिका
बिहार विधानसभा में प्रोटेम स्पीकर: नाम तय, जानें इस महत्वपूर्ण पद की भूमिका
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों के बाद नई सरकार गठन की प्रक्रिया तेज हो गई है। 20 नवंबर को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के शपथ ग्रहण समारोह के साथ ही विधानसभा का पहला सत्र शुरू होगा। इस सत्र में प्रोटेम स्पीकर की भूमिका अहम होगी। खबरों के मुताबिक, एनडीए ने वरिष्ठ विधायक और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी को प्रोटेम स्पीकर नियुक्त किया है। यह फैसला एनडीए के सहयोगी दलों के बीच सीटों के अनुपात में हुआ है। मांझी, जो हम (सेक्युलर) पार्टी के प्रमुख हैं, 2025 चुनाव में इमामगंज सीट से जीते हैं।
पिछले विधानसभा में भी जीतन राम मांझी को प्रोटेम स्पीकर बनाया गया था। 2020 में उन्होंने 23-24 नवंबर को नए विधायकों को शपथ दिलाई थी। इस बार भी उनकी जिम्मेदारी दो-तीन दिनों तक रहेगी, जब तक स्थायी स्पीकर का चुनाव नहीं हो जाता। बिहार विधानसभा के वर्तमान स्पीकर नंद किशोर यादव (बीजेपी) हैं, लेकिन नई सभा में यह पद बीजेपी या जेडीयू में बंटेगा। खबरें कह रही हैं कि स्पीकर पद के लिए जेडीयू के नरेंद्र नारायण यादव और बीजेपी के प्रेम कुमार प्रमुख दावेदार हैं। अमित शाह से जेडीयू नेताओं की बैठक के बाद सहमति बनती दिख रही है।
प्रोटेम स्पीकर की भूमिका क्या होती है?
प्रोटेम स्पीकर (Pro-tem Speaker) लैटिन शब्द ‘प्रोटेम्पोरे’ से आया है, जिसका मतलब है ‘अस्थायी रूप से’। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 95 के तहत राज्यपाल द्वारा नियुक्त यह पद नई विधानसभा के पहले सत्र तक ही रहता है। मुख्य भूमिकाएं:
शपथ दिलाना: नए विधायकों को शपथ दिलाना। बिहार में 243 सीटें हैं, तो सभी को शपथ दिलाने का काम प्रोटेम स्पीकर करता है।
सत्र की शुरुआत: पहला सत्र बुलाना और स्थायी स्पीकर के चुनाव की प्रक्रिया शुरू करना।
निष्पक्षता: यह पद तटस्थ होता है, इसलिए सबसे वरिष्ठ विधायक को चुना जाता है। मांझी जैसे अनुभवी नेता को प्राथमिकता दी जाती है।
सीमित अवधि: केवल 2-3 दिनों का होता है, उसके बाद स्पीकर और डिप्टी स्पीकर चुने जाते हैं।
यह पद लोकतंत्र की मजबूती का प्रतीक है, क्योंकि बिना इसके विधानसभा सत्र शुरू नहीं हो सकता। 2025 चुनाव में एनडीए ने 202 सीटें जीतीं, जबकि महागठबंधन को 35 मिलीं। नीतीश कुमार 10वीं बार सीएम बनेंगे, और कैबिनेट में 30-32 मंत्री होंगे – जेडीयू और बीजेपी को बराबर हिस्सा।
विशेषज्ञों का कहना है कि प्रोटेम स्पीकर का चयन गठबंधन की एकता दर्शाता है। जीतन राम मांझी ने कहा, “यह सम्मान बिहार की राजनीति का हिस्सा है। मैं निष्पक्षता से काम करूंगा।” तो, 20 नवंबर को गांधी मैदान पर शपथ ग्रहण के साथ बिहार की नई राजनीतिक यात्रा शुरू होगी। क्या स्पीकर पद पर अंतिम फैसला बीजेपी को मिलेगा? जल्द ही साफ हो जाएगा!
