मायका या ससुराल? विधवा महिला की मौत के बाद उसकी संपत्ति किसकी होगी – सुप्रीम कोर्ट ने साफ-साफ बता दिया!
मायका या ससुराल? विधवा महिला की मौत के बाद उसकी संपत्ति किसकी होगी – सुप्रीम कोर्ट ने साफ-साफ बता दिया!
विधवा महिला की मौत के बाद उसकी खुद की कमाई या खरीदी संपत्ति पर मायके वालों और ससुराल वालों में अक्सर झगड़ा हो जाता है। इसी सवाल पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाया। जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस रितु राज अवस्थी की बेंच ने स्पष्ट किया – “विधवा महिला की स्वअर्जित (self-acquired) संपत्ति पर उसकी मौत के बाद हिंदू उत्तराधिकार कानून-1956 की धारा 15(1) के तहत पहले उसके बच्चों (बेटा-बेटी दोनों) और पति के वारिसों का हक बनेगा। अगर बच्चे या पति नहीं हैं, तभी संपत्ति मायके वालों (मां-बाप या उनके वारिसों) को मिलेगी। ससुराल वालों का कोई अधिकार नहीं।”
कोर्ट ने 50 साल पुराने नियम को और मजबूत करते हुए कहा:
अगर महिला ने कोई वसीयत नहीं की है तो संपत्ति पहले उसके संतान और पति के वारिसों में बराबर बंटेगी।
संतान या पति के वारिस न होने पर ही संपत्ति उसके पिता की संपत्ति मानी जाएगी और मायके वालों को मिलेगी।
ससुराल वालों (देवर-जेठानी-ननद) का कोई कानूनी हक नहीं, चाहे महिला कितने भी साल ससुराल में रही हो।
मामला क्या था?
केरल की एक विधवा महिला की 1998 में मौत हो गई। उसके पति पहले ही गुजर चुके थे और कोई संतान नहीं थी। उसने अपनी कमाई से जमीन-मकान खरीदा था। ससुराल वालों ने दावा किया कि संपत्ति उनकी है क्योंकि महिला उनके घर में रहती थी। मायके वालों (भाई-बहन) ने केस किया। हाईकोर्ट ने मायके वालों के पक्ष में फैसला दिया। ससुराल वालों ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की। 27 साल बाद सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले पर मुहर लगा दी।
कोर्ट ने कहा, “महिला की संपत्ति पर ससुराल वालों का दावा सिर्फ इसलिए नहीं बनता कि वह ससुराल में रहती थी। कानून स्पष्ट है – धारा 15(1)(d) के तहत पहले बच्चे/पति के वारिस, फिर पिता के वारिस।”
आसान भाषा में नियम:
विधवा महिला की अपनी कमाई की संपत्ति → पहले बच्चे + पति के वारिस
बच्चे-पति दोनों नहीं → मायके वाले (मां-बाप या उनके वारिस)
ससुराल वालों का हक → शून्य (जब तक वसीयत न हो)
महिला अधिकार संगठनों ने फैसले का स्वागत किया। वकील फ्लाविया एग्नेस ने कहा, “यह फैसला लाखों विधवाओं के मायके वालों को न्याय देगा। ससुराल अक्सर जबरदस्ती कब्जा कर लेती थी।” वहीं कुछ लोगों ने कहा कि ससुराल में रहने वाली विधवा की देखभाल करने वालों को भी हिस्सा मिलना चाहिए, लेकिन कानून अभी ऐसा नहीं कहता।
तो अब साफ है – विधवा की अपनी संपत्ति पर मायके का हक तभी बनेगा जब उसका कोई संतान या पति का वारिस न बचा हो। बाकी मामलों में ससुराल खाली हाथ!
