तेजस्वी के ‘शैडो एडवाइजर’ संजय यादव: लालू परिवार की कलह के केंद्र में, रोहिणी-तेज प्रताप ने ठहराई हार की जिम्मेदारी
तेजस्वी के ‘शैडो एडवाइजर’ संजय यादव: लालू परिवार की कलह के केंद्र में, रोहिणी-तेज प्रताप ने ठहराई हार की जिम्मेदारी
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) की बुरी हार ने लालू प्रसाद यादव के परिवार को ही नहीं, बल्कि पार्टी को भी हिला दिया। हार के एक दिन बाद लालू की छोटी बेटी रोहिणी आचार्य ने एक्स पर पोस्ट कर राजनीति छोड़ने और परिवार से नाता तोड़ने का ऐलान किया, जिसमें उन्होंने तेजस्वी यादव के करीबी संजय यादव का नाम लिया। रोहिणी ने लिखा, “मैं राजनीति छोड़ रही हूं और परिवार से नाता तोड़ रही हूं। यह वही है जो संजय यादव और रमीज ने मुझसे कहा था… और मैं सारा दोष अपने ऊपर ले रही हूं।” यह पोस्ट परिवार में संजय यादव के खिलाफ बढ़ती नाराजगी को उजागर करती है, जिन्हें तेज प्रताप यादव ने पहले ‘जयचंद’ करार दिया था।
संजय यादव कौन हैं? हरियाणा मूल के संजय 2010 से आरजेडी से जुड़े हैं और राज्यसभा सांसद हैं। वे तेजस्वी यादव के सबसे विश्वसनीय सलाहकार हैं, जिन्हें ‘शैडो एडवाइजर’ कहा जाता है। संजय पार्टी की रणनीति, टिकट वितरण, वित्तीय मामलों और आंतरिक फैसलों को संभालते हैं। रोहिणी ने संजय पर हार की जिम्मेदारी न लेने और परिवार में हस्तक्षेप का आरोप लगाया। उन्होंने पत्रकारों से कहा, “मेरा कोई परिवार नहीं बचा। संजय यादव, रमीज और तेजस्वी से पूछ लो। उन्होंने मुझे परिवार से निकाल दिया क्योंकि वे जिम्मेदारी नहीं लेना चाहते।” रोहिणी ने तेजस्वी की यूपी यात्रा के दौरान संजय को वाहन की अगली सीट पर बैठने पर भी आपत्ति जताई थी।
यह विवाद नया नहीं है। तेज प्रताप ने संजय को ‘जयचंद’ कहा था, जो पार्टी में कलह का प्रतीक था। कुछ महीने पहले लालू ने तेज प्रताप को निजी विवादों के कारण पार्टी से निष्कासित कर दिया था। रोहिणी, जो 2022 में पिता को किडनी दान करने के लिए चर्चा में रहीं, ने 2024 लोकसभा चुनाव में सारण से हार का सामना किया। चुनाव से पहले उन्होंने परिवार और पार्टी अकाउंट्स अनफॉलो कर नाराजगी जाहिर की थी।
रमीज, उत्तर प्रदेश के एक राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखने वाले तेजस्वी के पुराने दोस्त हैं, जिनका भी पोस्ट में नाम आया। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने तंज कसा, “रोहिणी ने लालू को किडनी दान की, लेकिन परिवार में एक-दो लोगों के कारण सब बिखर रहा है। तेजस्वी के फाइनेंशियल मैनेजरों ने परिवार तोड़ दिया।” लोक जनशक्ति पार्टी के संजय कुमार ने कहा, “विपक्ष गायब हो गया। मुश्किल वक्त में अपने ही छोड़ देते हैं।”
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संजय का प्रभाव पार्टी में पावर सेंटर बना रहा है, जो परिवारिक फूट को बढ़ावा दे रहा। आरजेडी सूत्रों के अनुसार, लालू और राबड़ी ने तेजस्वी पर संजय के खिलाफ कार्रवाई का दबाव नहीं डाला। रोहिणी का कदम सिंगापुर में पति समीर आलम के साथ निजी जीवन पर लौटने का संकेत देता है, लेकिन यह दबाव का परिणाम लगता है। विपक्षी नेता तेजस्वी ने हार स्वीकार की, लेकिन परिवारिक संकट पर चुप्पी साधी। भाजपा आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने एक्स पर लिखा, “आरजेडी-कांग्रेस गठबंधन में चाकू चल रहे हैं। संजाय यादव पर रोहिणी का हमला तेजस्वी के करीबियों पर सवाल उठाता है।”
चुनाव में आरजेडी को 25 सीटें मिलीं, जबकि एनडीए ने 202 पर कब्जा किया। यह परिवारिक संकट पार्टी के पुनर्निर्माण को चुनौती देगा। क्या संजय यादव का प्रभाव टूटेगा? बिहार की सियासत में लालू परिवार की यह ‘महाभारत’ नया मोड़ ले रही है।
