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सोनभद्र खदान हादसा: ड्रिलिंग के दौरान पहाड़ी धंसने से 2 मजदूरों की मौत, 15 अन्य मलबे में दबे; NDRF-SDRF ने शुरू किया बचाव

सोनभद्र खदान हादसा: ड्रिलिंग के दौरान पहाड़ी धंसने से 2 मजदूरों की मौत, 15 अन्य मलबे में दबे; NDRF-SDRF ने शुरू किया बचाव

उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में शनिवार दोपहर एक भयानक खनन हादसा हो गया, जिसमें दो मजदूरों की मौत हो चुकी है और 15 अन्य के मलबे में दबे होने की आशंका है। घटना ओबरा थाना क्षेत्र के बिल्ली मारकुंडी (रासपहारी) खनन इलाके में कृष्णा माइनिंग वर्क्स की पत्थर खदान में हुई। यहां ब्लास्टिंग के लिए कंप्रेसर मशीन से होलिंग (ड्रिलिंग) के दौरान अचानक पहाड़ी का लगभग 300 फीट गहरा हिस्सा धंस गया, जिससे भारी मलबा गिर पड़ा। यह हादसा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रस्तावित जनसभा स्थल से महज 5 किलोमीटर दूर हुआ, जिसके बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया।

जिला मजिस्ट्रेट बी.एन. सिंह और एसपी अभिषेक वर्मा ने तुरंत मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। डीएम ने बताया, “खदान में कुल 18 मजदूर (9 कंप्रेसर मशीनों पर 2-2) काम कर रहे थे। हादसे में मधुसूदन सिंह और दिलीप केसरी नामक दो मजदूरों के शव बरामद हो चुके हैं, जो भाई थे। बाकी 15 मजदूरों को बाहर निकालने के लिए NDRF (राष्ट्रीय आपदा मोचन बल) और SDRF (राज्य आपदा मोचन बल) की टीमें रवाना हो चुकी हैं। जेसीबी, पोकलेन और अन्य भारी मशीनरी से मलबा हटाने का काम तेजी से चल रहा है।” बचाव कार्य में एसडीएम ओबरा, सीओ ओबरा और भारी पुलिस फोर्स भी जुटी हुई है।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसा दोपहर करीब 3 बजे हुआ। मजदूर बिना पर्याप्त सुरक्षा उपकरणों के काम कर रहे थे, जो इस तरह के जोखिम भरे कार्य के लिए अनिवार्य होते हैं। खदान मालिक प्रो. दिलीप केशरी पर लापरवाही का आरोप लग रहा है। सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री के दौरे को देखते हुए खदानों में कार्य बंद करने का आदेश था, लेकिन फिर भी ड्रिलिंग जारी रही। हादसे के बाद खदान मालिक फरार बताए जा रहे हैं। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

सोनभद्र खनन क्षेत्र में ऐसी घटनाएं अक्सर होती रहती हैं, जहां अवैध और असुरक्षित खनन के कारण मजदूरों की जान पर बन आती है। 2012 में यहां अवैध खनन से 10 मजदूरों की मौत हुई थी। विशेषज्ञों का मानना है कि सख्त निगरानी और सुरक्षा मानकों का पालन न होने से ये हादसे बढ़ रहे हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन डीएम ने मृतकों के परिवारों को 5-5 लाख रुपये की सहायता राशि देने का आश्वासन दिया है।

बचाव कार्य रात भर जारी रहेगा। फिलहाल स्थिति गंभीर बनी हुई है, और सभी की निगाहें फंसे मजदूरों की सुरक्षित निकासी पर टिकी हैं। क्या यह हादसा खनन सुरक्षा पर सवाल खड़े करेगा? आने वाले घंटों में अपडेट्स का इंतजार।

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