राजनीति

स्वामी प्रसाद मौर्य का विवादित बयान: ‘जय श्रीराम और जय बजरंगबली’ नारे दंगा कराने का लाइसेंस बने, योगी सरकार पर तीखा हमला

स्वामी प्रसाद मौर्य का विवादित बयान: ‘जय श्रीराम और जय बजरंगबली’ नारे दंगा कराने का लाइसेंस बने, योगी सरकार पर तीखा हमला

उत्तर प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री और अपनी जनता पार्टी (राष्ट्रीय) के अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य ने एक बार फिर विवादास्पद बयान देकर राजनीतिक हलचल मचा दी है। 1 नवंबर 2025 को लखनऊ में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मौर्य ने ‘जय श्रीराम’ और ‘जय बजरंगबली’ जैसे धार्मिक नारों को “दंगा कराने और नफरत फैलाने का लाइसेंस” करार दिया। उन्होंने भाजपा सरकार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर आरोप लगाया कि ये नारे अब मुस्लिम समाज के घरों, मस्जिदों और दुकानों पर तोड़फोड़ का औजार बन चुके हैं। मौर्य ने कहा, “आज एक धर्म के लोग आतंकवादी गतिविधियों पर उतर आए हैं, और ये नारे समाज में सांप्रदायिक उन्माद फैलाने के लिए इस्तेमाल हो रहे हैं।”

बयान का पूरा संदर्भ: योगी सरकार पर हमला

मौर्य का यह बयान उत्तर प्रदेश में हालिया सांप्रदायिक तनावों—जैसे बहराइच दंगे और कांवड़ यात्रा के दौरान हुई हिंसा—के बीच आया है। उन्होंने कहा, “भाजपा सरकार संविधान के मूल सिद्धांतों का उल्लंघन कर रही है। धर्म के नाम पर राजनीति करने वाले ठेकेदार नफरत फैला रहे हैं, और मुख्यमंत्री खुद ऐसी घटनाओं को बढ़ावा दे रहे हैं।” मौर्य ने दावा किया कि ये नारे अब “तोड़फोड़ का औजार” बन गए हैं, और सरकार का “कानून-व्यवस्था का ढोंग” उजागर हो रहा है। यह बयान उनकी पुरानी विवादास्पद टिप्पणियों की कड़ी में जुड़ता है, जहां उन्होंने रामचरितमानस, कांवड़ियों और हिंदू संगठनों पर सवाल उठाए थे।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं: BJP का तीखा पलटवार

भाजपा का रुख: राज्य भाजपा प्रवक्ता ने मौर्य के बयान को “हिंदू-विरोधी” और “वोटबैंक की राजनीति” करार दिया। उन्होंने कहा, “मौर्य जैसे लोग धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाकर अल्पसंख्यक तुष्टिकरण कर रहे हैं। योगी सरकार शांति बनाए रखने के लिए कटिबद्ध है।” रायबरेली में पहले भी मौर्य के राम पर बयान के खिलाफ मुकदमा दर्ज हो चुका है, और इस बार भी हिंदू युवा वाहिनी जैसे संगठनों ने विरोध जताया है।

सपा का साथ: समाजवादी पार्टी ने मौर्य का समर्थन किया, लेकिन पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि बयान व्यक्तिगत राय है। सपा ने इसे “सांप्रदायिक सद्भाव पर सवाल” बताते हुए BJP पर निशाना साधा।

अन्य दलों की प्रतिक्रिया: BSP और अन्य विपक्षी दलों ने चुप्पी साधी, जबकि RSS ने इसे “धर्मनिरपेक्षता का ढोंग” कहा।

मौर्य का राजनीतिक सफर: विवादों का साथी

स्वामी प्रसाद मौर्य, जो कभी BJP के टिकट पर विधायक बने, फिर सपा में मंत्री रहे, और अब अपनी जनता पार्टी चला रहे हैं, अक्सर जाति-धर्म के मुद्दों पर बयानबाजी से सुर्खियों में रहते हैं। 2023 में रामचरितमानस पर उनके बयान से मुकदमे हुए, और हाल में बहराइच दंगे पर उन्होंने BJP को “षड्यंत्रकारी” कहा था। यह बयान 2027 यूपी चुनाव से पहले दलित-मुस्लिम वोट बैंक को एकजुट करने की रणनीति लगता है।

यह बयान यूपी की सियासत को और ध्रुवीकृत कर सकता है।

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