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दिल्ली एसिड अटैक केस में सनसनीखेज खुलासा: पिता ने जितेंद्र को फंसाने के लिए रची साजिश

दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) की एक 20 वर्षीय छात्रा पर कथित एसिड अटैक का मामला, जो 26 अक्टूबर को सुर्खियों में आया था, अब पूरी तरह उलट गया है। पुलिस जांच में सामने आया है कि पीड़िता के पिता अकील खान ने ही इस पूरे हमले की साजिश रची थी, ताकि मुकुंदपुर निवासी जितेंद्र कुमार शर्मा और उसके दो साथियों को झूठे केस में फंसाया जा सके। अकील को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है, और उसने पूछताछ में साजिश का इकबालनामा दे दिया है। पीड़िता के बयानों में विरोधाभास और तकनीकी साक्ष्यों ने इस खुलासे को पुख्ता किया है।

घटना की शुरुआत: कथित हमला और शुरुआती आरोप

26 अक्टूबर की सुबह करीब 10:52 बजे, अशोक विहार स्थित लक्ष्मीबाई कॉलेज के पास एक युवती पर एसिड फेंके जाने की खबर आई। पीड़िता, जो दिल्ली यूनिवर्सिटी की नॉन-कॉलेजिएट वुमेंस एजुकेशन बोर्ड की सेकंड ईयर छात्रा है, को दीप चंद बंधु अस्पताल में भर्ती कराया गया। उसके दोनों हाथों पर गंभीर जलन और पेट पर हल्के छींटे थे। पीड़िता ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई कि जितेंद्र, इशान और अरमान नाम के तीन युवकों ने मोटरसाइकिल पर आकर हमला किया। उसने विस्तृत बयान दिया: जितेंद्र बाइक चला रहा था, इशान ने बोतल दी और अरमान ने एसिड फेंका। पीड़िता ने जितेंद्र पर एक महीने पहले झगड़े और पीछा करने का भी आरोप लगाया।

घटना के बाद DU छात्रों ने कॉलेज के बाहर विरोध प्रदर्शन किया, सख्त कार्रवाई की मांग की। पुलिस ने तुरंत FIR नंबर 605/2025 दर्ज की (भारतीय न्याय संहिता की धारा 124(1) और 3(5) के तहत) और क्राइम ब्रांच व फॉरेंसिक टीम तैनात की। लेकिन जांच के दौरान चीजें संदिग्ध लगने लगीं।

नया मोड़: पिता की साजिश और फर्जी हमला

पुलिस को शक हुआ जब पीड़िता ने हमलावरों की बाइक नंबर, सवारों की सटीक स्थिति और बोतल सौंपने जैसी बारीकियां बता दीं—जो किसी वास्तविक हमले में दुर्लभ है। जांच में पता चला कि घटना के समय जितेंद्र करोल बाग में था (उसकी बाइक भी वहीं खड़ी मिली), जबकि इशान और अरमान (जो भाई हैं) आगरा में मौजूद थे।

अब असली कहानी सामने आई: यह सब जितेंद्र के परिवार और अकील खान के बीच पुराने विवाद से जुड़ा था। 24 अक्टूबर (हमले से दो दिन पहले) जितेंद्र की पत्नी ने भलस्वा डेयरी थाने में अकील के खिलाफ छेड़छाड़ और ब्लैकमेल की शिकायत दर्ज कराई। जितेंद्र की पत्नी अकील की फैक्ट्री में काम करती थी, जहां अकील ने कथित तौर पर उसका यौन शोषण किया और आपत्तिजनक वीडियो बनाए। इस शिकायत पर अकील के खिलाफ मुकदमा दर्ज हो गया, और वह फरार हो गया। प्रॉपर्टी डिस्प्यूट भी चल रहा था, जिसमें जितेंद्र के परिवार ने अकील की पत्नी और भाइयों को आरोपी बनाया था।

पुलिस के अनुसार, अकील ने अपनी बेटी को शामिल कर फर्जी एसिड अटैक का ड्रामा रचा, ताकि जितेंद्र और उसके साथियों को बदनाम किया जा सके। पीड़िता ने भी साजिश में हिस्सा लिया। अकील ने पूछताछ में कबूल किया कि “झूठे केस में फंसाने के लिए यह सब किया।” पीड़िता का भाई भी फरार है, और पुलिस उसकी तलाश कर रही है।

पुलिस की कार्रवाई और आगे की जांच

दिल्ली पुलिस ने अकील को गिरफ्तार कर लिया और फर्जी शिकायत के एंगल से नया मुकदमा दर्ज किया। पीड़िता के बयान की वीडियोग्राफी की गई है, और फॉरेंसिक टीम ने अस्पताल के सैंपल्स की जांच की—जो एसिड से ज्यादा किसी हल्के रसायन जैसे लग रहे हैं। क्राइम ब्रांच अब पूरे परिवार से पूछताछ कर रही है। DCP (नॉर्थवेस्ट) ने कहा, “यह केस संदिग्ध था, अब सच्चाई सामने आ गई। वास्तविक पीड़ितों के लिए न्याय सुनिश्चित करेंगे।”

सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं: गुस्सा और चिंता

सोशल मीडिया पर यह खुलासा वायरल हो गया। यूजर्स ने इसे “फर्जी केसों का दुरुपयोग” बताते हुए वास्तविक एसिड पीड़ितों के लिए न्याय की मांग की। एक यूजर ने लिखा, “एसिड अटैक जैसे संवेदनशील मुद्दे को ब्लैकमेल के लिए इस्तेमाल करना शर्मनाक है।” टीवी चैनलों ने लाइव डिबेट चलाई, जहां विशेषज्ञों ने कहा कि 2025 में दिल्ली में 147 एसिड अटैक रिपोर्ट हुए, लेकिन ऐसे फर्जीवाड़े से जांच प्रभावित होती है।

क्या सिखाता है यह मामला?

यह घटना न केवल व्यक्तिगत दुश्मनी की गहराई दिखाती है, बल्कि फर्जी शिकायतों के खतरे को भी उजागर करती है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे केस वास्तविक पीड़ितों की आवाज को दबा देते हैं। पुलिस ने चेतावनी दी कि फर्जी साजिश रचने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। जितेंद्र के परिवार ने राहत जताई, लेकिन पीड़िता के इलाज और परिवार की काउंसलिंग पर जोर दिया। मामला अब कोर्ट में जाएगा, जहां सच्चाई पूरी तरह उजागर होगी।

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