सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को दिया झटका, इस राज्य में फिर से मनरेगा योजना शुरू करने के दिए निर्देश
ग्रामीण भारत के लिए एक बड़ी राहत! सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र सरकार की विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) को खारिज कर दिया, जिसमें पश्चिम बंगाल में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) को फिर से शुरू करने के कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ अपील की गई थी। इस फैसले से बंगाल के लाखों ग्रामीण मजदूरों को 100 दिनों की गारंटीड मजदूरी का हक मिलेगा, जो मार्च 2022 से बंद पड़ी योजना को 1 अगस्त 2025 से बहाल करेगा।
सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसमें जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता शामिल थे, ने कहा, “हमें लगता है कि विवादित आदेश में कोई हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है। एसएलपी खारिज।” यह फैसला केंद्र की उस अपील पर आया, जिसमें मनरेगा में कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोप लगाए गए थे। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केंद्र को भ्रष्टाचार रोकने के लिए विशेष शर्तें लगाने की पूरी छूट है, लेकिन योजना को अनिश्चितकाल के लिए रोकना संभव नहीं।
पृष्ठभूमि: तीन साल से बंद पड़ी योजना
मनरेगा, जो ग्रामीण परिवारों को सालाना 100 दिनों की मजदूरी की गारंटी देती है, पश्चिम बंगाल में मार्च 2022 से बंद थी। केंद्र सरकार ने धारा 27 के तहत फंड रोक दिए थे, क्योंकि राज्य में फंड के कथित दुरुपयोग और भ्रष्टाचार की शिकायतें आई थीं। इससे राज्य के करीब 2.5 करोड़ मजदूर प्रभावित हुए, जिन्हें न केवल नई नौकरियां मिलनी बंद हो गईं, बल्कि पुराने बकाया भुगतान भी अटक गए। 2021-22 में बंगाल को मनरेगा के तहत 7,507 करोड़ रुपये मिले थे, लेकिन उसके बाद एक पैसा भी नहीं।
कलकत्ता हाईकोर्ट ने जून 2025 में केंद्र को निर्देश दिया था कि योजना 1 अगस्त से फिर शुरू हो। हाईकोर्ट ने कहा था, “योजना को अनिश्चितकाल तक रोकना एनआरईजी एक्ट के खिलाफ है। केंद्र भ्रष्टाचार रोकने के लिए अन्य राज्यों में न लगाई जाने वाली शर्तें लगा सकता है, लेकिन मजदूरों का हक नहीं छीन सकता।” केंद्र ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, लेकिन वहां भी हार गया।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं: टीएमसी का जश्न, केंद्र पर निशाना
फैसले के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने इसे “बंगाल की ऐतिहासिक जीत” करार दिया। अभिषेक बनर्जी, महुआ मोइत्रा, किर्ति आजाद और डेरेक ओ’ब्रायन जैसे नेताओं ने सोशल मीडिया पर खुशी जाहिर की। सीएम ममता बनर्जी ने कहा, “यह जनता का पैसा है, केंद्र का निजी फंड नहीं। लाखों गरीबों को न्याय मिला। केंद्र अब तुरंत बकाया फंड जारी करे।” विपक्ष ने इसे केंद्र की “राजनीतिक साजिश” बताया, जो राज्य के गरीबों को निशाना बना रही थी।
वहीं, केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने तर्क दिया था कि जांच पूरी होने तक फंड न दिए जाएं, लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया। एक्टिविस्ट्स और सिविल सोसाइटी ग्रुप्स ने आरोप लगाया कि केंद्र ने हाईकोर्ट के आदेश का पालन ही नहीं किया।
क्या होगा आगे?
सुप्रीम कोर्ट के फैसले से मनरेगा 1 अगस्त 2025 से पूरे बंगाल (चार जिलों को छोड़कर, जहां जांच चल रही है) में बहाल हो जाएगी। केंद्र को फंड जारी करने के साथ-साथ जांच जारी रखने की छूट है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला न केवल बंगाल बल्कि पूरे देश के लिए मिसाल बनेगा, जहां ग्रामीण रोजगार का अधिकार सर्वोपरि है। राज्य सरकार ने कहा है कि वह बकाया मजदूरी के भुगतान के लिए तैयार है, बशर्ते केंद्र अपना हिस्सा दे।
यह फैसला ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने वाला साबित हो सकता है, खासकर जब महंगाई और बेरोजगारी की मार झेल रहे मजदूरों को सांस मिलेगी। बंगाल सरकार ने केंद्र से तत्काल 100-दिनों की योजना के फंड रिलीज करने की मांग की है।
