देश के 12 राज्यों में ऐसे पूरा होगा SIR 2.0: चुनाव आयोग का ऐलान, जानें पूरी प्रक्रिया व विवाद
देश के 12 राज्यों में ऐसे पूरा होगा SIR 2.0: चुनाव आयोग का ऐलान, जानें पूरी प्रक्रिया व विवाद
लोकतंत्र की मजबूती के लिए चुनाव आयोग ने एक और बड़ा कदम उठाया है। मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में घोषणा की कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) का दूसरा चरण (SIR 2.0) कल 28 अक्टूबर से 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में शुरू हो जाएगा। यह पहल देश की लगभग 51 करोड़ मतदाताओं को कवर करेगी, जो 5.33 लाख पोलिंग स्टेशनों पर फैले हैं। SIR 2.0 का उद्देश्य मतदाता सूची को पूरी तरह शुद्ध करना है—डुप्लिकेट नाम हटाना, मृतक मतदाताओं को हटाना, नए वोटरों को जोड़ना और विदेशी नागरिकों की पहचान करना। आजादी के बाद यह नौवीं बार हो रहा है, पिछली बार 2002-04 में हुआ था। पहला चरण बिहार में सफल रहा, जहां 7.5 करोड़ मतदाताओं ने भाग लिया और शून्य अपीलें दर्ज हुईं। लेकिन विपक्ष इसे ‘वोट चोरी की साजिश’ बता रहा है। आइए, विस्तार से समझें कि SIR 2.0 कैसे चलेगा, किन राज्यों पर असर पड़ेगा और क्यों विवादास्पद है।
SIR 2.0: क्या है और क्यों जरूरी?
SIR मतदाता सूची का एक गहन पुनरीक्षण अभियान है, जो सामान्य वार्षिक अपडेट से कहीं ज्यादा विस्तृत है। चुनाव आयोग का कहना है कि यह सुनिश्चित करेगा कि कोई योग्य मतदाता बाहर न रहे और कोई अयोग्य नाम सूची में न रहे। सीईसी कुमार ने कहा, “यह अभियान लोकतंत्र की नींव मजबूत करेगा। बिहार में हमने 65 लाख नाम हटाए, लेकिन एक भी नया नाम नहीं जोड़ा—यह पारदर्शिता का प्रमाण है।” SIR में आधार को पहचान प्रमाण के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा, लेकिन यह नागरिकता या जन्म तिथि का प्रमाण नहीं माना जाएगा। दस्तावेजों में पासपोर्ट, जन्म प्रमाण पत्र, सरकारी आईडी या भूमि आवंटन प्रमाण पत्र शामिल हैं। प्रक्रिया डिजिटल रूप से होगी, जहां voters.eci.gov.in पर 2002-04 की पुरानी सूचियां उपलब्ध हैं।
यह अभियान 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले महत्वपूर्ण है, खासकर पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और पुदुचेरी जैसे राज्यों में। आयोग ने स्पष्ट किया कि असम को अलग रखा गया है, क्योंकि वहां सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर नागरिकता सत्यापन चल रहा है। असम के लिए अलग SIR की घोषणा होगी। महाराष्ट्र, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम और लद्दाख जैसे क्षेत्रों को मौसम या कानूनी कारणों से बाद के चरण में रखा गया है। कुल मिलाकर, SIR देशभर में 321 जिला चुनाव अधिकारियों (DEOs) और 10,000 से अधिक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (EROs) की निगरानी में चलेगा।
किन 12 राज्यों-केंद्रों में होगा SIR 2.0?
SIR 2.0 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू होगा: अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, लक्षद्वीप, मध्य प्रदेश, पुदुचेरी, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल। इनमें से कई 2026 के चुनावी राज्यों हैं। उदाहरण के लिए, उत्तर प्रदेश में 15.44 करोड़ मतदाता, 1.62 लाख पोलिंग स्टेशन और 1.92 लाख बूथ लेवल अधिकारी (BLOs) शामिल होंगे। पश्चिम बंगाल में 7.5 करोड़ मतदाता प्रभावित होंगे, जहां हाल ही में 235 अधिकारियों का तबादला हुआ है। तमिलनाडु में मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने इसे ‘लोगों के वोटिंग अधिकार छीनने की साजिश’ बताया है। केरल और गुजरात जैसे राज्य भी इस दायरे में हैं, जहां BLOs घर-घर जाकर फॉर्म वितरित करेंगे।
SIR 2.0 की पूरी प्रक्रिया: स्टेप बाय स्टेप
SIR 2.0 एक व्यवस्थित प्रक्रिया है, जो पारदर्शिता और भागीदारी पर आधारित है। आयोग ने विस्तृत टाइमलाइन जारी की है। यहां स्टेप बाय स्टेप समझें:
1. फ्रीजिंग ऑफ इलेक्टोरल रोल्स (27-28 अक्टूबर 2025): आज रात 12 बजे से इन 12 क्षेत्रों में मतदाता सूची फ्रीज हो जाएगी। कोई नया नाम जोड़ा या हटाया नहीं जा सकेगा। यह कट-ऑफ डेट 2002-04 की पिछली SIR पर आधारित है। उदाहरण के लिए, दिल्ली में 2008 की सूची इस्तेमाल होगी।
2. प्रिंटिंग एंड ट्रेनिंग (28 अक्टूबर – 3 नवंबर 2025): BLOs को ट्रेनिंग दी जाएगी। हर मौजूदा मतदाता को यूनिक एन्यूमरेशन फॉर्म (गणना फॉर्म) वितरित किया जाएगा, जिसमें नाम, पता, जन्म तिथि जैसी डिटेल्स पहले से भरी होंगी। नए वोटर (18 वर्ष से ऊपर) के लिए अलग फॉर्म उपलब्ध होगा। राजनीतिक दलों के 7 लाख बूथ लेवल एजेंट्स (BLAs) इसमें सहयोग करेंगे।
3. हाउस-टू-हाउस वेरिफिकेशन (4 नवंबर – 4 दिसंबर 2025): BLOs घर-घर जाकर फॉर्म सत्यापित करेंगे। मतदाताओं को 2002-04 की पुरानी सूची से मैचिंग करनी होगी। डुप्लिकेट नामों पर सत्यापन होगा—एक व्यक्ति केवल एक फॉर्म साइन करेगा। राजनीतिक दल 50 फॉर्म एकत्र कर BLO को दे सकेंगे। नए वोटरों के लिए दस्तावेज जमा करने होंगे। प्रवासी श्रमिकों, मृतक नामों और संदिग्ध विदेशी नागरिकों पर विशेष फोकस।
4. ड्राफ्ट पब्लिकेशन एंड क्लेम्स (8-9 दिसंबर 2025 से 8 जनवरी 2026): ड्राफ्ट मतदाता सूची 8-9 दिसंबर को प्रकाशित होगी। दावे-आपत्तियां 8 जनवरी तक दर्ज की जा सकेंगी। सुनवाई और सत्यापन 9 दिसंबर से 31 जनवरी 2026 तक चलेगा।
5. फाइनल रोल पब्लिकेशन (7 फरवरी 2026): अंतिम सूची 7 फरवरी को जारी होगी। अपील प्रक्रिया समाप्त हो जाएगी।
यह प्रक्रिया डिजिटल प्लेटफॉर्म पर होगी, जहां मोबाइल ऐप से फॉर्म अपलोड किए जा सकेंगे। BLOs को स्मार्टफोन दिए जाएंगे। आयोग ने 17 उपायों से पारदर्शिता सुनिश्चित की है, जैसे वोटर हेल्पलाइन ऐप।
विवाद और विपक्ष का विरोध: ‘वोट चोरी की साजिश’?
SIR 2.0 का ऐलान होते ही विवाद छिड़ गया। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा, “ECI की विश्वसनीयता संदेह के घेरे में है। बिहार में 65 लाख नाम हटाए गए, लेकिन एक भी नया नहीं जोड़ा—यह वोट चोरी है।” तमिलनाडु के सीएम स्टालिन ने डीएमके कार्यकर्ताओं को सतर्क रहने को कहा और 2 नवंबर को एलाइड पार्टी मीटिंग बुलाई। उन्होंने पत्र लिखकर SIR को ‘अलोकतांत्रिक’ बताया। पश्चिम बंगाल में टीएमसी ने कहा कि योग्य वोटरों के नाम हटाने पर कार्रवाई करेंगे। पूर्व छत्तीसगढ़ सीएम भूपेश बघेल ने विदेशी नागरिक पहचान के दावों पर सवाल उठाए। भाजपा ने इसे ‘लोकतंत्र की सफाई’ बताया, जबकि विपक्ष ‘सांप्रदायिक साजिश’ करार दे रहा है।
सीईसी कुमार ने पलटवार किया, “ECI संवैधानिक जिम्मेदारी निभा रहा है। कोई टकराव नहीं, राज्य सरकारें सहयोग करेंगी।” बिहार में SIR सफल रहा, जहां शून्य अपीलें हुईं। विशेषज्ञों का कहना है कि SIR से धांधली रुकेगी, लेकिन समय की कमी (2026 चुनावों से पहले) से युवा वोटर प्रभावित हो सकते हैं।
SIR 2.0 का असर: युवा, प्रवासी और महिलाओं पर फोकस
SIR से 18-19 वर्ष के नए वोटरों को फायदा होगा। उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में 2 करोड़ नए वोटर जोड़े जा सकते हैं। प्रवासी श्रमिकों के लिए स्पेशल प्रावधान—ऑनलाइन फॉर्म। महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर। लेकिन विपक्ष का आरोप है कि यह अल्पसंख्यकों को निशाना बना सकता है। आयोग ने स्पष्ट किया कि सभी पर समान रूप से लागू होगा।
निष्कर्ष: पारदर्शिता की जीत या राजनीतिक खेल?
SIR 2.0 लोकतंत्र को मजबूत बनाने का प्रयास है, लेकिन विवाद इसे सियासी रंग दे रहा है। मतदाताओं से अपील है कि BLO से संपर्क करें, फॉर्म सत्यापित करें। अगर नाम गायब हो तो हेल्पलाइन 1950 पर कॉल करें। यह अभियान 2026 चुनावों को निष्पक्ष बनाएगा, लेकिन सफलता राज्य सरकारों के सहयोग पर निर्भर। आयोग की दो दिवसीय CEOs कॉन्फ्रेंस ने तैयारी मजबूत की है। अंततः, SIR वोट की ताकत को सशक्त करेगा। सभी मतदाता सक्रिय हों, ताकि लोकतंत्र की जड़ें गहरी हों।
