टेरर फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग को लेकर FATF का एक्शन: उत्तर कोरिया, ईरान और म्यांमार ब्लैकलिस्ट में बरकरार, काउंटरमेजर्स की चेतावनी
टेरर फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग को लेकर FATF का एक्शन: उत्तर कोरिया, ईरान और म्यांमार ब्लैकलिस्ट में बरकरार, काउंटरमेजर्स की चेतावनी
वैश्विक वित्तीय निगरानी संस्था फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) ने आतंक फंडिंग, मनी लॉन्ड्रिंग और वित्तीय अपराधों से निपटने में गंभीर कमियों को लेकर उत्तर कोरिया (DPRK), ईरान और म्यांमार को अपनी ब्लैकलिस्ट (हाई-रिस्क जुरिस्डिक्शंस) में बरकरार रखा है। पेरिस में हुई ताजा बैठक में FATF ने इन देशों को “कॉल फॉर एक्शन” की श्रेणी में रखते हुए सभी सदस्य देशों से इनके साथ सख्ती बरतने और एन्हांस्ड ड्यू डिलिजेंस लागू करने का आह्वान किया है। अगर सुधार न हुए, तो काउंटरमेजर्स (वित्तीय प्रतिबंध) लगाए जा सकते हैं। यह फैसला वैश्विक वित्तीय प्रणाली को इन देशों से उत्पन्न जोखिमों से बचाने के लिए लिया गया है।
FATF की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, ये तीनों देश मनी लॉन्ड्रिंग (ML), टेररिस्ट फाइनेंसिंग (TF) और प्रोलिफरेशन फाइनेंसिंग (PF) के खिलाफ प्रभावी तंत्र विकसित करने में विफल रहे हैं। उत्तर कोरिया पर विशेष चिंता जताई गई है, क्योंकि वह हथियारों के प्रसार (WMD) के लिए अवैध फंडिंग कर रहा है और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सिस्टम से कनेक्टिविटी बढ़ा रहा है। ईरान का एक्शन प्लान 2018 में ही समाप्त हो चुका था, जबकि म्यांमार को 2022 से ब्लैकलिस्ट में रखा गया है। अक्टूबर 2025 तक प्रगति न होने पर इनके खिलाफ और सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।
ब्लैकलिस्ट में बने रहने के प्रमुख कारण
– उत्तर कोरिया (DPRK): मनी लॉन्ड्रिंग, टेरर फंडिंग और WMD फाइनेंसिंग में गंभीर रणनीतिक कमियां। FATF ने चेतावनी दी कि DPRK की अंतरराष्ट्रीय फाइनेंशियल सिस्टम से बढ़ती जुड़ाव PF जोखिम बढ़ा रही है। काउंटरमेजर्स लागू हैं।
– ईरान: 2018 में समाप्त एक्शन प्लान पूरा नहीं किया। हालांकि अक्टूबर 2025 में UN टेरर फाइनेंसिंग कन्वेंशन से जुड़े कानून को मंजूरी दी, लेकिन मुख्य कमियां बरकरार हैं। काउंटरमेजर्स लागू।
– म्यांमार: 2022 से ब्लैकलिस्ट पर। ML/TF के खिलाफ एक्शन प्लान पर पर्याप्त प्रगति नहीं। वित्तीय खुफिया के उपयोग, ट्रांसनेशनल ML केसों की जांच और आपराधिक संपत्ति जब्ती में कमी। अक्टूबर 2025 तक सुधार न होने पर काउंटरमेजर्स की चेतावनी। एन्हांस्ड ड्यू डिलिजेंस लागू।
FATF ने 2025 में अल्जीरिया, अंगोला, बुल्गारिया, बुर्किना फासो, कैमरून, कोट डी आइवर, कांगो, केन्या, लाओ पीडीआर, मोनाको, मोजांबिक, नामीबिया, नेपाल, नाइजीरिया, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण सूडान, सीरिया, वेनेजुएला और वियतनाम जैसे कई देशों की प्रगति की समीक्षा की। ग्रे लिस्ट (इनक्रेज्ड मॉनिटरिंग) से क्रोएशिया को हटाया गया, लेकिन ब्लैकलिस्ट में कोई बदलाव नहीं।
प्रभाव: वैश्विक वित्तीय सिस्टम पर क्या असर?
ये देश ब्लैकलिस्ट पर रहने से अंतरराष्ट्रीय बैंकों और वित्तीय संस्थाओं को इनके साथ लेन-देन में सतर्क रहना पड़ता है, जो व्यापार, निवेश और रेमिटेंस को प्रभावित करता है। FATF के अनुसार, यह कदम वैश्विक फाइनेंशियल सिस्टम को ML/TF/PF जोखिमों से बचाने के लिए जरूरी है। भारत जैसे देशों ने पहले ही इनके साथ सख्ती बरती है, जैसे DPRK के साथ सभी फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन पर प्रतिबंध।
FATF प्रेसिडेंट एलिसा डे एंडा मैड्राजो ने कहा, “ये देश वैश्विक फाइनेंशियल सिस्टम के लिए खतरा बने हुए हैं। सुधार के बिना कठोर कदम उठाए जाएंगे।” यह फैसला पाकिस्तान की ग्रे लिस्ट से निकलने की प्रक्रिया को भी प्रभावित कर सकता है, जहां टेरर फाइनिंग पर सवाल बरकरार हैं।
यह एक्शन न केवल इन देशों पर दबाव बढ़ाएगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर फाइनेंशियल क्राइम्स के खिलाफ मजबूत संदेश देगा। क्या ये देश सुधार के रास्ते पर लौटेंगे?
