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दिल्ली: यमुना नदी में डाले गए केमिकल पर अखिलेश यादव ने उठाया सवाल, बोले- बिना जांच के प्रयोग संवेदनशील, गंगा तक फैलेगा प्रदूषण

दिल्ली: यमुना नदी में डाले गए केमिकल पर अखिलेश यादव ने उठाया सवाल, बोले- बिना जांच के प्रयोग संवेदनशील, गंगा तक फैलेगा प्रदूषण

छठ महापर्व से ठीक पहले दिल्ली की यमुना नदी में झाग हटाने के लिए केमिकल स्प्रे करने की घटना ने राजनीतिक हलचल मचा दी है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने दिल्ली सरकार की इस कार्रवाई पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा, “बिना जांच के केमिकल डालना संवेदनशील विषय है, क्योंकि यमुना का यह प्रदूषण गंगा तक पहुंचता है।” यादव ने मांग की है कि इसकी गहन जांच हो और तुरंत संज्ञान लिया जाए, ताकि नदियों की सफाई पर सवाल न उठे।

एक रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में यमुना के किनारों पर छठ पूजा की तैयारियों के बीच नदी पर जमा जहरीले झाग को हटाने के लिए एंटी-फोम केमिकल (सिलिकॉन डिफोमर) का छिड़काव किया गया। यह केमिकल अमोनिया और फॉस्फेट जैसे प्रदूषकों से बने झाग को नियंत्रित करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन विपक्ष का आरोप है कि यह पर्यावरण के लिए हानिकारक हो सकता है। अखिलेश ने बीजेपी शासित दिल्ली सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि नदियों को साफ रखने में केंद्र और राज्य सरकारें नाकाम साबित हो रही हैं।

राजनीतिक रंग और विवाद

– अखिलेश की मांग: छठ पर्व 25 अक्टूबर से शुरू हो रहा है, जिसमें लाखों लोग यमुना के घाटों पर सूर्य अर्घ्य देंगे। यादव ने चेतावनी दी कि बिना टेस्टिंग के केमिकल डालने से नदी का प्रदूषण और गहरा सकता है, जो गंगा जैसी पवित्र नदियों को प्रभावित करेगा। उन्होंने कहा, “सरकारें दिखावे की सफाई कर रही हैं, लेकिन असली समस्या का समाधान नहीं।”

– बीजेपी का बचाव: दिल्ली की बीजेपी सरकार ने केमिकल को लैब-टेस्टेड और पर्यावरण-अनुकूल बताया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा, “यह जरूरी कदम था ताकि छठ के दौरान नदी साफ दिखे। हम यमुना को विषैला बनाने की साजिश नहीं कर रहे।” हालांकि, आम आदमी पार्टी (AAP) ने बीजेपी पर पाखंड का आरोप लगाया, क्योंकि पहले AAP सरकार के समय इसी केमिकल को बीजेपी ने ‘विष’ कहा था।

– विपक्ष की एकजुटता: AAP ने बीजेपी को चुनौती दी कि “यमुना का एक लीटर पानी पीकर बात करें।” कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल भी इस मुद्दे पर सरकार को घेर रहे हैं।

यमुना प्रदूषण का मूल कारण

यमुना में झाग का मुख्य कारण दिल्ली के 90% घरेलू सीवेज और औद्योगिक कचरे का सीधा निर्वहन है। अमोनिया, फॉस्फेट, डिटर्जेंट और अन्य रसायनों से पानी में जहरीला झाग बनता है, जो न केवल छठ जैसे पर्वों को प्रभावित करता है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी खतरा है। सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) की रिपोर्ट बताती है कि दिल्ली से गुजरते हुए यमुना का 58% कचरा इसी शहर से आता है।पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि केमिकल स्प्रे अस्थायी समाधान है, असली जरूरत स्ट्रीट ड्रेनेज और वेस्टवाटर ट्रीटमेंट प्लांट्स को मजबूत करने की है।

भविष्य की चुनौतियां

छठ महापर्व के दौरान यमुना के प्रदूषण पर नजरें टिकी हैं। अखिलेश की यह टिप्पणी दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 से पहले राजनीतिक बहस को और तेज कर सकती है, जहां यमुना सफाई एक बड़ा मुद्दा बन चुका है। यदि जांच न हुई, तो यह विवाद राष्ट्रीय स्तर पर फैल सकता है, खासकर जब गंगा-यमुना की सफाई केंद्र सरकार की प्राथमिकता है।

अखिलेश यादव का यह बयान नदियों के संरक्षण पर एक सकारात्मक बहस छेड़ रहा है। क्या सरकार सुनवाई करेगी, यह तो समय बताएगा, लेकिन यमुना की हालत सभी के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।

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