राजनीति

दिवाली पर ‘सिर्फ हिंदू व्यापारियों से शॉपिंग’ वाले बयान पर अजित पवार सख्त! NCP विधायक संग्राम जगताप से मांगा जवाब, कारण बताओ नोटिस जारी

दिवाली पर ‘सिर्फ हिंदू व्यापारियों से शॉपिंग’ वाले बयान पर अजित पवार सख्त! NCP विधायक संग्राम जगताप से मांगा जवाब, कारण बताओ नोटिस जारी

महाराष्ट्र में दिवाली से ठीक पहले राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP, अजित पवार गुट) के विधायक संग्राम जगताप के विवादित बयान ने राजनीतिक हलचल मचा दी है। ‘हिंदू आक्रोश मोर्चा’ सभा में जगताप ने लोगों से अपील की थी कि “दिवाली की खरीदारी केवल हिंदू दुकानदारों से करें, ताकि हिंदू व्यापारियों का आर्थिक बहिष्कार न हो।” इस बयान पर NCP प्रमुख और उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने सख्त रुख अपनाते हुए जगताप को ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी करने की घोषणा की है। पवार ने इसे “पूरी तरह गलत और अस्वीकार्य” बताते हुए कहा कि यह पार्टी की सेक्युलर विचारधारा के खिलाफ है।

बयान का विवादास्पद क्रम: सभा से सोशल मीडिया तक

– क्या कहा जगताप ने?: सोलापुर जिले के अहिल्यानगर (अहमदनगर) में शनिवार को ‘हिंदू आक्रोश मोर्चा’ सभा के दौरान जगताप ने कहा, “दिवाली पर हिंदू व्यापारियों का समर्थन करें। सिर्फ उनकी दुकानों से सामान खरीदें।” बाद में वीडियो वायरल होने पर उन्होंने सफाई दी कि यह बयान “पहलगाम आतंकी हमले” (जम्मू-कश्मीर में हाल की घटना) से प्रेरित था, और इसका उद्देश्य हिंदू एकता मजबूत करना था। लेकिन विपक्ष ने इसे “धार्मिक ध्रुवीकरण” का प्रयास बताया।

– वायरल प्रभाव: वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैला, जिससे मुस्लिम समुदाय में आक्रोश फैल गया। महायुति गठबंधन में BJP और शिवसेना के साथ NCP की साझेदारी पर सवाल उठने लगे।

अजित पवार का सख्त रुख: पार्टी छवि को बचाने का प्रयास

– फटकार का बयान: रविवार को मीडिया से बातचीत में पवार ने कहा, “यह बयान NCP की नीतियों के बिल्कुल खिलाफ है। पार्टी धर्मनिरपेक्षता पर आधारित है, और कोई भी नेता ऐसा बयान नहीं दे सकता जो सामाजिक सद्भाव बिगाड़े। जगताप को जिम्मेदारी से बोलना चाहिए।” उन्होंने जगताप के पिता (पूर्व विधायक अरुण जगताप) का जिक्र करते हुए कहा, “जब तक अरुणकाका जीवित थे, सब ठीक चलता था। अब बिना संरक्षण के और सतर्क रहना जरूरी है।”

– कारण बताओ नोटिस: पवार ने तुरंत कार्रवाई का ऐलान किया। नोटिस में जगताप को 48 घंटे में सफाई देने का समय दिया गया है। विश्लेषकों का कहना है कि यह कदम NCP की सेक्युलर छवि बचाने और महाराष्ट्र निकाय चुनावों से पहले ध्रुवीकरण से बचने का प्रयास है।

– पार्टी का आंतरिक दबाव: NCP के अन्य नेता भी जगताप के बयानों से असहज हैं। जगताप तीन बार के विधायक हैं, लेकिन हाल में उनके चरम हिंदुत्व वाले बयान (जैसे फुले-आंबेडकर विचारधारा से हटकर) पार्टी के वोट बैंक को प्रभावित कर रहे हैं।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं: BJP का समर्थन, विपक्ष का हमला

– BJP का पक्ष: महायुति में BJP के मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल ने जगताप का समर्थन किया। उन्होंने कहा, “हिंदू व्यापारियों का समर्थन करना गलत नहीं। यह आर्थिक एकजुटता का मुद्दा है।”

– विपक्ष का तंज: कांग्रेस और शिवसेना (UBT) ने इसे “सांप्रदायिक राजनीति” का नमूना बताया। संजय राउत ने ट्वीट किया, “दिवाली सबकी है, लेकिन कुछ लोग इसे हथियार बना रहे हैं।” AIMIM ने मुस्लिम व्यापारियों के बहिष्कार का आरोप लगाया।

– सामाजिक प्रभाव: मुंबई और अहमदनगर में सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई। कुछ ने इसे “बॉयकॉट कैंपेन” का हिस्सा बताया, जबकि अन्य ने सद्भाव की अपील की।

यह विवाद महाराष्ट्र की सियासत में धार्मिक ध्रुवीकरण को फिर उजागर कर रहा है, खासकर दिवाली से पहले। जगताप का जवाब आने के बाद पार्टी की अगली कार्रवाई तय होगी।

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