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मनोज जरांगे की बड़ी जीत, मराठा आरक्षण देने के लिए महाराष्ट्र सरकार राजी, जानें क्या थी मांगें

मुंबई: मराठा आरक्षण आंदोलन के प्रमुख नेता मनोज जरांगे पाटिल की लंबी लड़ाई को आज बड़ी सफलता मिली है। महाराष्ट्र सरकार ने मराठा समुदाय को कुनबी जाति का दर्जा देने पर हामी भर ली है, जिससे उन्हें ओबीसी आरक्षण का लाभ मिल सकेगा। मंगलवार को जारी ‘हैदराबाद गजट’ के आधार पर मराठा समाज के लोगों को कुनबी प्रमाण पत्र जारी करने का फैसला लिया गया है। इसके लिए एक विशेष कमेटी गठित की जाएगी, जो ऐतिहासिक दस्तावेजों की जांच कर पात्र व्यक्तियों को प्रमाण पत्र प्रदान करेगी। इस निर्णय से लाखों मराठा परिवारों को सरकारी नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण मिलने का रास्ता साफ हो गया है।

आंदोलन के दूसरे दिन मुंबई के आजाद मैदान में जरांगे ने अनिश्चितकालीन अनशन शुरू किया था, जिसमें हजारों समर्थक शामिल हुए। उनकी मुख्य मांग थी कि मराठवाड़ा क्षेत्र के मराठाओं को कुनबी घोषित किया जाए, क्योंकि कुनबी ओबीसी श्रेणी में शामिल है। सरकार ने शिंदे कमेटी के माध्यम से इसकी जांच की और हैदराबाद गजट में 58 लाख परिवारों के रिकॉर्ड मिलने के बाद सहमति जताई। सेवानिवृत्त न्यायाधीश संदीप शिंदे की अगुवाई वाली कमेटी का कार्यकाल 30 जून 2026 तक बढ़ा दिया गया है, जो तहसील स्तर पर प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया को तेज करेगी। जरांगे ने कहा, “हमारी 13 महीनों की मेहनत रंग लाई। अब सभी मराठाओं को कुनबी प्रमाण पत्र मिलेगा, लेकिन आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक पूर्ण कार्यान्वयन न हो।”

यह फैसला ओबीसी समुदाय के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है, क्योंकि इससे उनके कोटे पर असर पड़ने की आशंका है। ओबीसी नेता छगन भुजबल ने चेतावनी दी कि ओबीसी आरक्षण को कोई धक्का नहीं लगना चाहिए। शरद पवार ने मराठा मांग का समर्थन किया, लेकिन केंद्र से निर्णय की अपील की। बॉम्बे हाईकोर्ट ने प्रदर्शनकारियों को आजाद मैदान खाली करने का अल्टीमेटम दिया था, लेकिन गजट जारी होने के बाद जरांगे ने अनशन समाप्त करने का संकेत दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम मराठा-ओबीसी विवाद को कम करेगा और सामाजिक सौहार्द बढ़ाएगा। सरकार ने स्पष्ट किया कि मराठा आरक्षण अलग 10% रहेगा, लेकिन कुनबी प्रमाण पत्र से अतिरिक्त लाभ मिलेगा। यह निर्णय महाराष्ट्र की राजनीति को नई दिशा दे सकता है, खासकर आगामी स्थानीय निकाय चुनावों से पहले।

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