अग्निपथ योजना के नए नियमों पर स्थिति साफ, दिसंबर 2026 के बाद भर्ती होने वालों के लिए जारी रहेगा मूल चार साल का मॉडल
अग्निपथ योजना के नए नियमों पर स्थिति साफ, दिसंबर 2026 के बाद भर्ती होने वालों के लिए जारी रहेगा मूल चार साल का मॉडल
नई दिल्ली:
केंद्र सरकार की ‘अग्निपथ’ योजना में हाल ही में किए गए बदलावों को लेकर असमंजस की स्थिति पूरी तरह साफ हो गई है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि ये नए बदलाव केवल उन नौ बैचों के अग्निवीरों पर लागू होंगे, जो वर्तमान में पहले से सेवा दे रहे हैं। वहीं, दिसंबर 2026 के बाद सेना में शामिल होने वाले नए रंगरूट फिलहाल मूल चार साल वाले मॉडल के तहत ही काम करेंगे। रक्षा अधिकारियों के अनुसार, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान द्वारा घोषित इन संशोधनों को फिलहाल मौजूदा नौ बैचों तक ही सीमित रखा गया है।
मौजूदा नौ बैचों के लिए क्या हैं नए नियम?
योजना के मूल ढांचे के मुताबिक, हर बैच के पहले 25 फीसदी सैनिक चार साल पूरे होने पर रेगुलर कैडर में शामिल होते रहेंगे, और इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है। हालांकि, बाकी बचे 75 फीसदी सैनिकों को दो साल का एक अतिरिक्त कार्यकाल (सेकंड एंगेजमेंट) दिया जाएगा।
इस व्यवस्था के तहत:
छह साल बाद रेगुलर होने का मौका: अतिरिक्त दो साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद ये सैनिक भी रेगुलर कैडर में शामिल होने के पात्र होंगे।
कोई संख्या सीमा नहीं: दूसरे समूह के लिए कोई ऊपरी सीमा (सीलिंग) तय नहीं की गई है, बशर्ते अग्निवीर सेवा में बने रहने के इच्छुक हों, शारीरिक रूप से फिट हों और उनका अनुशासनात्मक रिकॉर्ड साफ हो।
सीनियरिटी सुरक्षा: जो सैनिक दो साल की अतिरिक्त सेवा के बाद रेगुलर कैडर में आएंगे, वे अपने उन बैचमेट्स के ठीक बाद सीनियरिटी पाएंगे जो चार साल में रेगुलर हो चुके थे। वे बाद के नए बैचों के सैनिकों से जूनियर नहीं होंगे।
भविष्य की भर्तियों और सरकार का रुख
सरकार इसे योजना का ‘रोलबैक’ (वापसी) नहीं मान रही है, बल्कि इसे मौजूदा सैनिकों के लिए एक अंतरिम और अतिरिक्त व्यवस्था बता रही है। दिसंबर 2026 के बाद भर्ती होने वाले युवाओं पर चार साल का मूल ढांचा ही लागू रहेगा। भविष्य के बैचों के नियमों में बदलाव सशस्त्र बलों की समय-समय पर होने वाली जरूरतों और परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। इस स्पष्टीकरण से यह साफ हो गया है कि फिलहाल सरकार ने भविष्य के लिए नीति में लचीलापन बनाए रखा है, जबकि पहले से सेवा दे रहे जवानों को लंबा करियर बनाने का एक स्पष्ट अवसर मिल गया है।

