तमिलनाडु का ‘श्रीपुरम गोल्डन टेंपल’: 1500 किलो सोने से सजा मां लक्ष्मी का अद्भुत मंदिर; जानिए इसकी खासियत
तमिलनाडु का ‘श्रीपुरम गोल्डन टेंपल’: 1500 किलो सोने से सजा मां लक्ष्मी का अद्भुत मंदिर; जानिए इसकी खासियत
वेल्लोर (तमिलनाडु): दीपावली के पावन अवसर पर देशभर में धन और वैभव की देवी मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना की जाती है। देवी लक्ष्मी के कई ऐतिहासिक और प्रसिद्ध मंदिरों में तमिलनाडु के वेल्लोर स्थित श्री लक्ष्मी नारायणी मंदिर अपनी अद्भुत सुंदरता और अनूठी बनावट के लिए पूरी दुनिया में अलग पहचान रखता है। इसे ‘श्रीपुरम गोल्डन टेंपल’ (Sripuram Golden Temple) के नाम से जाना जाता है, जिसकी सोने से सजी दीवारें और नक्काशी श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर देती हैं।
1,500 किलो सोने से बना मंदिर:
वेल्लोर जिला प्रशासन और आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस मंदिर को सोने से सजाने में असाधारण कारीगरी का उपयोग किया गया है:
1.5 टन सोने का इस्तेमाल: मंदिर के बाहरी और आंतरिक हिस्सों पर लगभग 1,500 किलोग्राम (1.5 टन) शुद्ध सोने की परत चढ़ाई गई है।
हस्तनिर्मित नक्काशी: कारीगरों ने सोने को बेहद पतली पन्नियों में बदलकर, तांबे की प्लेटों पर हाथ से बारीक नक्काशी की।
वैदिक और पारंपरिक डिजाइन: दीवारों और छतों पर की गई कलाकारी में पारंपरिक द्रविड़ शैली के साथ-साथ वैदिक परंपरा से जुड़े धार्मिक प्रतीकों को दर्शाया गया है।
मंदिर से जुड़ी प्रमुख विशेषताएं और आकर्षण:
100 एकड़ में फैला परिसर: वेल्लोर के थिरुमलाइकोडी क्षेत्र में स्थित यह मंदिर लगभग 100 एकड़ के विशाल क्षेत्र में फैला हुआ है। इसका निर्माण ‘श्री नारायणी पीठम ट्रस्ट’ द्वारा कराया गया था और साल 2007 में इसे श्रद्धालुओं के लिए खोला गया था।
1.8 किमी लंबा ‘स्टार-शेप्ड’ (सितारा आकार) रास्ता: मुख्य मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को एक सितारे (Star) के आकार में बने रास्ते से होकर गुजरना पड़ता है। लगभग 1.8 किलोमीटर लंबे इस रास्ते के दोनों ओर प्राकृतिक हरियाली है और जगह-जगह जीवन, सत्य और मानवता से जुड़े आध्यात्मिक संदेश लिखे गए हैं।
’सर्वतीर्थम’ पवित्र जलकुंड: मंदिर परिसर में एक पवित्र सरोवर है जिसे ‘सर्वतीर्थम’ कहा जाता है। मान्यता है कि इसमें देश की प्रमुख पवित्र नदियों का जल सम्मिलित किया गया है।
सर्वधर्म समभाव का संदेश: आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, यह मंदिर बिना किसी जाति, धर्म, नस्ल या समुदाय के भेदभाव के पूरी मानवता के लिए खुला है, जहां देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु दर्शन और आत्मिक शांति के लिए पहुंचते हैं।

