राजनीति

दुलारचंद यादव हत्याकांड: बाहुबली विधायक अनंत सिंह को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, 1 दिसंबर तक सरेंडर करने का आदेश

दुलारचंद यादव हत्याकांड: बाहुबली विधायक अनंत सिंह को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, 1 दिसंबर तक सरेंडर करने का आदेश

​नई दिल्ली/पटना: जदयू (JDU) से निष्कासित बाहुबली और मोकामा के विधायक अनंत सिंह को दुलारचंद यादव हत्याकांड मामले में सुप्रीम कोर्ट से बहुत बड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने पटना हाईकोर्ट द्वारा दी गई उनकी जमानत याचिका के आदेश पर रोक लगाते हुए अनंत सिंह को 1 दिसंबर तक सरेंडर करने का कड़ा निर्देश दिया है। इसके साथ ही अदालत ने मामले की जांच को चार महीने के भीतर पूरा करने के भी आदेश दिए हैं।

​सुप्रीम कोर्ट का रुख और बेटी की शादी का हवाला:

​जमानत को चुनौती: मार्च 2026 में पटना हाईकोर्ट ने अनंत सिंह को इस मामले में जमानत दी थी। इस फैसले को मृतक दुलारचंद यादव के पोते नीरज कुमार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने जमानत आदेश को स्थगित कर दिया।

​राहत की अपील खारिज: सुनवाई के दौरान अनंत सिंह ने अपनी बेटी की आगामी शादी का हवाला देते हुए सरेंडर से छूट देने की मांग की थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उनकी इस याचिका को स्वीकार करने से इनकार कर दिया।

​दुलारचंद यादव हत्याकांड: क्या था पूरा मामला?

​चुनाव प्रचार के दौरान हिंसक झड़प: यह घटना तब घटी जब दुलारचंद यादव जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार पीयूष प्रियदर्शी के लिए चुनाव प्रचार कर रहे थे। उसी दौरान उनका सामना अनंत सिंह के काफिले से हो गया।

​विवाद और मौत: दोनों गुटों के बीच हुए विवाद के दौरान गोलीबारी हुई, जिसमें दुलारचंद यादव गंभीर रूप से घायल हो गए और उनकी मौत हो गई। हालांकि शुरुआती जांच में गोली लगने की बात कही गई थी, लेकिन बाद में पोस्टमार्टम रिपोर्ट से खुलासा हुआ कि उनकी मृत्यु वाहन की टक्कर और छाती पर आई गंभीर चोटों की वजह से हुई थी।

​कार्रवाई: इस मामले में अनंत सिंह समेत 80 से अधिक लोगों को गिरफ्तार कर बेऊर जेल भेजा गया था, जबकि लापरवाही बरतने पर दो थाना प्रभारियों को सस्पेंड भी किया गया था।

​राजनीतिक बयानबाजी:

​सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के प्रवक्ता शक्ति यादव ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कोर्ट द्वारा सरेंडर का आदेश दिए जाने में कोई आश्चर्य नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जब तक चाहती है, लोग बाहर रहते हैं और जब चाहती है, अंदर भेज दिए जाते हैं।

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