राजनीति

IDBI विनिवेश पर सियासी घमासान: राहुल गांधी के आरोपों पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का पलटवार

IDBI विनिवेश पर सियासी घमासान: राहुल गांधी के आरोपों पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का पलटवार

​नई दिल्ली: आईडीबीआई बैंक (IDBI Bank) के रणनीतिक विनिवेश और हिस्सेदारी बेचने के केंद्र सरकार के फैसले को लेकर कांग्रेस और केंद्र सरकार आमने-सामने आ गए हैं। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कांग्रेस पार्टी पर तीखा हमला बोला है। वित्त मंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस शासनकाल में बैंकों का इस्तेमाल राजनीतिक हितों और चुनिंदा लोगों को कर्ज दिलाने के लिए किया जाता था।

​वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के मुख्य बिंदु और आरोप:

​कांग्रेस पर ‘फोन बैंकिंग’ और राजनीतिक दबाव का आरोप: वित्त मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि कांग्रेस राज में बैंकों और वित्तीय संस्थानों का राजनीतिक प्रभाव के लिए दुरुपयोग किया गया। नेताओं के दबाव में ऐसे बड़े कारोबारी समूहों को ऋण दिए गए जिनके राजनीतिक संबंध थे, जो बाद में भारी-भरकम एनपीए (Non-Performing Assets) में बदल गए।

​आईडीबीआई बैंक का पुनरुद्धार: सीतारमण ने स्पष्ट किया कि एनडीए सरकार ने पेशेवर प्रबंधन, विवेकपूर्ण नीतियों और 25,000 करोड़ रुपये से अधिक के पुनर्पूंजीकरण के जरिए संकट में फंसे आईडीबीआई बैंक को उबारा और पुनर्जीवित किया है। उन्होंने कहा कि बैंक अब विकास के अगले चरण के लिए तैयार है और पूरी प्रक्रिया निर्धारित नियमों के तहत की जा रही है।

​पारदर्शिता और ऋण वितरण प्रणाली: वित्त मंत्री ने जोर देकर कहा कि अब बैंकिंग व्यवस्था में ‘फोन बैंकिंग’ और अनुचित प्रभाव का दौर पूरी तरह समाप्त हो चुका है। वर्तमान व्यवस्था में आम लोगों को आसानी से ऋण मिल रहा है और बैंक कर्मचारियों पर राजनीतिक दबाव डालने की प्रथा खत्म हो चुकी है।

​राहुल गांधी के आरोप और चिंताएं:

​इससे पहले राहुल गांधी ने केंद्र सरकार के इस कदम की आलोचना करते हुए बैंक कर्मचारियों के प्रति एकजुटता दिखाई थी:

​मुनाफे में आने के बावजूद बिक्री पर सवाल: राहुल गांधी ने कहा था कि जो बैंक सात साल पहले घाटे में था, उसने कर्मचारियों की मेहनत से ₹9,000 करोड़ से अधिक का मुनाफा कमाया है, ऐसे में उसे बेचने का औचित्य नहीं है।

​हिस्सेदारी में भारी कमी: उन्होंने दावा किया कि वर्तमान में सरकार और एलआईसी के पास बैंक की लगभग 95% हिस्सेदारी है, जो बिक्री के बाद घटकर मात्र 34% रह जाएगी।

​आरक्षण और सेवा शर्तों की आशंका: कांग्रेस नेता ने निजीकरण के कारण अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए मिलने वाले आरक्षण के प्रावधानों तथा कर्मचारियों की सेवा शर्तों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका जताई थी।

​यह पूरा राजनीतिक घटनाक्रम आईडीबीआई बैंक की प्रस्तावित बिक्री और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के भविष्य को लेकर देश की मुख्य राजनीतिक धाराओं के बीच गहरी वैचारिक और राजनीतिक भिड़ंत को स्पष्ट करता है।

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