वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट: भारत में गरीबी में ऐतिहासिक गिरावट, 12 वर्षों में 49.6 करोड़ लोग गरीबी रेखा से बाहर आए
वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट: भारत में गरीबी में ऐतिहासिक गिरावट, 12 वर्षों में 49.6 करोड़ लोग गरीबी रेखा से बाहर आए
वॉशिंगटन/नई दिल्ली: विश्व बैंक (World Bank) की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने पिछले एक दशक (2011 से 2023) में गरीबी में दुनिया की सबसे तेज गिरावटों में से एक दर्ज की है। इस अवधि के दौरान देश में लगभग 49.6 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं। वर्ल्ड बैंक ने इस ऐतिहासिक सुधार के पीछे मजबूत खपत वृद्धि, रोजगार में बढ़ोतरी (विशेषकर महिलाओं की भागीदारी) और खाद्य सब्सिडी सहित सामाजिक कल्याण योजनाओं के विस्तार को मुख्य कारक बताया है।
गरीबी में गिरावट के प्रमुख आंकड़े:
निम्न-मध्यम आय वर्ग ($4.20/दिन): 2011 में इस दायरे ($4.20 प्रतिदिन, 2021 PPP मापदंड) में रहने वाली आबादी 57.7% थी, जो 2023 में घटकर 16.1% रह गई है।
अत्यधिक गरीबी ($3.00/दिन): अत्यधिक गरीबी (3 डॉलर प्रतिदिन) के नीचे रहने वाले लोगों की जनसंख्या में हिस्सेदारी 27.1% से घटकर महज 2.6% पर आ गई है।
भविष्य का अनुमान: गरीबी घटने का यह सिलसिला आगे भी जारी रहने की उम्मीद है। $4.20 प्रतिदिन की रेखा से नीचे रहने वाले लोगों की दर 2026 में 14.2% से घटकर 2028 तक 12.1% होने का अनुमान जताया गया है।
रोजगार और आय में असमानता की स्थिति:
रोजगार में रिकॉर्ड वृद्धि: 2017 से 2023 के बीच देश में रोजगार में 13.4 करोड़ लोगों की बढ़ोतरी हुई, जो कामकाजी उम्र की आबादी में हुई वृद्धि का लगभग दोगुना है। इसमें ग्रामीण महिलाओं की वैतनिक रोजगार (Paid Work) में बढ़ती भागीदारी का सबसे बड़ा योगदान रहा।
आय में असमानता की चुनौती: रिपोर्ट के अनुसार, वेतन में असमानता अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। 2023 में सबसे अधिक कमाने वाले 10% कर्मचारियों की मीडियन कमाई, सबसे कम कमाने वाले 10% कर्मचारियों की तुलना में लगभग 13 गुना अधिक दर्ज की गई।
वर्ल्ड बैंक ने निष्कर्ष निकाला है कि गरीबी में बड़ी गिरावट के बाद अब बची हुई गरीबी उन परिवारों में अधिक केंद्रित पाई गई है, जहाँ शिक्षा का स्तर कम है, संपत्तियों का अभाव है और आश्रितों का बोझ अधिक है।

