‘जन महाभियोग’ में ज्ञानेश कुमार को हटाने और देशद्रोह का मुकदमा चलाने का प्रस्ताव पारित, खरगे-राहुल ने लगाए गंभीर आरोप
‘जन महाभियोग’ में ज्ञानेश कुमार को हटाने और देशद्रोह का मुकदमा चलाने का प्रस्ताव पारित, खरगे-राहुल ने लगाए गंभीर आरोप
नई दिल्ली, 31 अक्टूबर। ‘इंडिया’ गठबंधन के सांसदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, छात्रों और सिविल सोसाइटी के सदस्यों ने शनिवार को आयोजित ‘जन महाभियोग’ कार्यक्रम में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और उन पर देशद्रोह का मुकदमा चलाने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया। कार्यक्रम में दिसंबर 2023 में मुख्य चुनाव आयुक्त को आजीवन कानूनी कार्रवाई से सुरक्षा देने वाले कानून को रद्द करने की मांग भी उठाई गई।
‘जन महाभियोग’ का आयोजन राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के 10 राजाजी मार्ग स्थित आवास पर किया गया। कार्यक्रम में पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने स्पीकर की भूमिका निभाई।
इसमें कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, केसी वेणुगोपाल, प्रियंका गांधी, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, समाजवादी पार्टी सांसद धर्मेंद्र यादव, राजद नेता तेजस्वी यादव और तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी समेत 250 से अधिक विपक्षी सांसद शामिल हुए। मतदाता सूची से हटाए गए लोगों, छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी हिस्सा लिया।
खरगे बोले- मताधिकार गंभीर खतरे में
कार्यक्रम में प्रस्ताव पेश करते हुए मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि संविधान के तहत नागरिकों को मिला मताधिकार गंभीर खतरे में है। उन्होंने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के निर्देश पर चुनाव आयोग चला रहे हैं।
खरगे की ओर से पेश प्रस्ताव में मुख्य चुनाव आयुक्त पर भाजपा के पक्ष में वोट चोरी की साजिश रचने, मतदाता सूचियों और चुनाव परिणामों में हेरफेर करने तथा विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के जरिए 13 करोड़ 20 लाख मतदाताओं के नाम हटाने के आरोप लगाए गए।
प्रस्ताव में फॉर्म-6 में कथित गैरकानूनी संशोधन, ईसीआईनेट सॉफ्टवेयर के दुरुपयोग, मतदाता सूची संबंधी नियंत्रण को चुनाव आयोग के हाथों में केंद्रीकृत करने और निर्णय प्रक्रिया से अन्य दो चुनाव आयुक्तों को बाहर रखने जैसे आरोप भी शामिल थे। ये सभी आरोप विपक्ष की ओर से लगाए गए हैं।
खरगे ने कहा कि सात महीने पहले विपक्ष के 193 सांसदों ने दोनों सदनों में मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने के लिए महाभियोग प्रस्ताव का नोटिस दिया था, लेकिन उसे खारिज कर दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि 2014 से सत्ता में बने रहने के लिए मोदी सरकार ने राजनीतिक दलों को तोड़ने और केंद्रीय जांच एजेंसियों का दुरुपयोग करने जैसे तरीके अपनाए हैं।
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि एसआईआर के जरिए विपक्ष के समर्थक माने जाने वाले मतदाताओं के नाम सूची से हटाकर चुनावी नतीजों को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि 2023 में बनाए गए कानून के कारण मुख्य चुनाव आयुक्त को कानूनी कार्रवाई से सुरक्षा मिली हुई है।
महाराष्ट्र, हरियाणा और कर्नाटक में गड़बड़ी के आरोप
खरगे ने 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद महाराष्ट्र में हुए विधानसभा चुनाव का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि करीब 40 लाख नए मतदाताओं के नाम अवैध तरीके से जोड़े गए। उन्होंने हरियाणा में भी गड़बड़ी होने का दावा किया।
कर्नाटक के आलंद विधानसभा क्षेत्र में कथित वोटों की गड़बड़ी का मुद्दा उठाते हुए खरगे ने कहा कि मामले की जांच कर रही सीआईडी ने चुनाव आयोग से 18 बार जानकारी मांगी, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।
उन्होंने वोट चोरी के खिलाफ प्रदर्शन पर रोक लगाए जाने और विपक्षी नेताओं तथा युवाओं को हिरासत में लिए जाने का आरोप भी लगाया। खरगे ने एसआईआर की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने की मांग की।
राहुल गांधी बोले- चुनाव आयोग ने 2024 के चुनाव को अवैध माना
‘जन महाभियोग’ के आखिरी वक्ता राहुल गांधी ने कहा कि एसआईआर के जरिए करोड़ों मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। उनके मुताबिक, यह संख्या देश के हर सातवें नागरिक और कुल मतदाताओं के करीब 15 प्रतिशत के बराबर है।
राहुल गांधी ने कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव में विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच वोटों का अंतर करीब तीन प्रतिशत था, जबकि अब चुनाव आयोग कह रहा है कि 15 प्रतिशत मतदाताओं को वोट देने का अधिकार ही नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे चुनाव आयोग ने खुद स्वीकार कर लिया है कि 2024 का लोकसभा चुनाव अवैध था।
उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग एक ही समय में यह नहीं कह सकता कि 13 करोड़ 20 लाख वोट गैरकानूनी थे और उन चुनावों के बाद बनी मोदी सरकार कानूनी है। राहुल गांधी ने दावा किया कि विपक्ष के पास वोट चोरी को लेकर पर्याप्त सबूत हैं और ज्ञानेश कुमार मुख्य चुनाव आयुक्त के पद पर नहीं टिकेंगे।
राहुल गांधी ने कहा कि देश की आवाज संसद तक पहुंचनी चाहिए, लेकिन जब विपक्ष को संसद में अपनी बात रखने का अवसर नहीं मिलता, तो उसे ‘जन महाभियोग’ जैसे कार्यक्रमों के जरिए अपनी आवाज उठानी पड़ती है।
राहुल गांधी की देशद्रोह के मुकदमे की मांग
राहुल गांधी ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर ज्ञानेश कुमार को लगता है कि मोदी-शाह या कानूनी सुरक्षा उन्हें बचा लेगी, तो उन्हें देश के लोगों का मूड देखना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार ने देश की आत्मा पर हमला किया है और विपक्ष उन्हें बचने नहीं देगा।
कांग्रेस नेता ने कहा कि ज्ञानेश कुमार के खिलाफ केवल महाभियोग की कार्रवाई ही नहीं, बल्कि देशद्रोह का मुकदमा भी चलना चाहिए और उन्हें न्याय के दायरे में लाया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि विपक्ष, देश के युवा और आम नागरिक इस लड़ाई को आगे बढ़ाएंगे और जो कुछ हुआ है, उसे न तो भूलेंगे और न ही माफ करेंगे।
कई विपक्षी दलों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने रखी बात
कार्यक्रम में समाजवादी पार्टी के हरेंद्र सिंह मलिक और राजीव राय, तृणमूल कांग्रेस की सागरिका घोष और महुआ मोइत्रा, पीडीपी की महबूबा मुफ्ती, सांसद कपिल सिब्बल, एनसीपी (एसपी) के बजरंग मनोहर सोनवणे, शिवसेना (यूबीटी) के अरविंद सावंत और राजद के अभय कुशवाहा ने भी प्रस्ताव के समर्थन में वक्तव्य दिया।
इसके अलावा सीपीएम के जॉन ब्रिटास, सीपीआई के संदोश कुमार, आईयूएमएल के ईटी मोहम्मद बशीर, सीपीआई (एमएल) के सुदामा प्रसाद, जेके (एनसी) के नासिर असलम, वीसीके के थोल. थिरुमावलवन, झामुमो के बैद्यनाथ राम और केरल कांग्रेस (एम) के जोस के मणि समेत कई नेताओं ने अपनी बात रखी।
स्वराज इंडिया के अध्यक्ष योगेंद्र यादव, सामाजिक कार्यकर्ता निखिल डे, आरटीआई कार्यकर्ता अंजली भारद्वाज और छात्र नेताओं नेहा बोरा तथा ऋतु बराला ने भी प्रस्ताव का समर्थन किया।

