देश में जनगणना 2027 के दूसरे चरण की तैयारी तेज: 25 जनवरी से शुरू होगी आबादी की गिनती; पहली बार जुड़े 13 नए सवाल और जाति का कॉलम
देश में जनगणना 2027 के दूसरे चरण की तैयारी तेज: 25 जनवरी से शुरू होगी आबादी की गिनती; पहली बार जुड़े 13 नए सवाल और जाति का कॉलम
नई दिल्ली: भारत में बहुप्रतीक्षित जनगणना के दूसरे चरण की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, देश में जनसंख्या की गिनती (पॉपुलेशन एन्यूमरेशन) का काम 25 जनवरी 2027 से 28 फरवरी 2027 तक संचालित किया जाएगा।
जनगणना का शेड्यूल और प्रक्रिया:
जनगणना की समय-सीमा: अधिकांश राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मुख्य गणना 25 जनवरी से 28 फरवरी 2027 के बीच होगी।
चुनावी और बर्फबारी वाले राज्यों में बाद में: अगले साल की शुरुआत में होने वाले विधानसभा चुनावों (उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर) तथा बर्फबारी वाले इलाकों (लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के प्रभावित क्षेत्र) में यह प्रक्रिया बाद में आयोजित की जाएगी।
स्व-गणना (Self-Enumeration) का विकल्प: घर-घर जाकर डेटा जुटाने से पहले नागरिकों के लिए 10 जनवरी से 24 जनवरी 2027 तक स्व-गणना (सेल्फ एन्युमरेशन) का डिजिटल विकल्प उपलब्ध रहेगा।
विशाल जनशक्ति का उपयोग: इस वृहद कार्य में लगभग 34 लाख एन्युमरेटर लगाए जाएंगे, जिनमें सरकारी शिक्षकों के साथ-साथ पहली बार निजी स्कूलों के शिक्षकों और संस्थागत कर्मियों को भी शामिल करने की अनुमति दी गई है। एक एन्युमरेटर को औसतन 750–800 लोगों का ब्लॉक दिया जाएगा।
दूसरे चरण की मुख्य विशेषताएं और पूछे जाने वाले सवाल:
दूसरे चरण में प्रत्येक परिवार से 40 सवाल पूछे जाएंगे (जो 2011 की जनगणना की तुलना में 13 नए सवाल अधिक हैं) और एक परिवार पर औसतन 20-25 मिनट का समय लगेगा:
जाति का कॉलम (जातीय डेटा संग्रह): स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार SC/ST के अलावा सभी नागरिकों के लिए जाति से जुड़ा कॉलम जोड़ा गया है। नागरिक ड्रॉप-डाउन लिस्ट से या दिए गए कॉलम में अपनी जाति दर्ज करा सकते हैं। साथ ही ‘जाति नहीं बताना चाहते’ और ‘कोई जाति नहीं’ जैसे विकल्प भी दिए गए हैं।
रोजगार एवं माइग्रेशन: काम की प्रकृति, आर्थिक गतिविधि, काम की तलाश/उपलब्धता, कार्यस्थल की दूरी, जन्मस्थान, प्रवास (माइग्रेशन) का कारण और वर्तमान स्थान पर रहने की अवधि जैसे विस्तृत सवाल पूछे जाएंगे।
अन्य व्यक्तिगत व डिजिटल विवरण: डिजिटल साक्षरता, कोविड-19 टीकाकरण, बैंक खाते की स्थिति, पासपोर्ट, वोटर आईडी, मोबाइल नंबर और आधार आदि से जुड़े सामान्य जानकारी संबंधी प्रश्न शामिल होंगे।
डिजिटल जनगणना पर 11,718 करोड़ रुपये का बजट:
पूर्णतः डिजिटल स्वरूप: यह भारत की पहली पूरी तरह से डिजिटल जनगणना होगी, जिसके लिए केंद्र सरकार ने ₹11,718 करोड़ के बजट को मंजूरी दी है।
पृष्ठभूमि: उल्लेखनीय है कि यह जनगणना मूल रूप से 2021 में आयोजित की जानी थी, लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण इसे स्थगित करना पड़ा था। इससे पूर्व अंतिम बार 2011 में जनगणना हुई थी, तब भारत की कुल जनसंख्या 121 करोड़ दर्ज की गई थी।

