आजम खान की रामपुर जेल से रिहाई के तुरंत बाद ED ने किया गिरफ्तार: जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े ₹426 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग का मामला
आजम खान की रामपुर जेल से रिहाई के तुरंत बाद ED ने किया गिरफ्तार: जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े ₹426 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग का मामला
रामपुर (उत्तर प्रदेश): समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री आजम खान को शनिवार को रामपुर जेल से जमानत पर रिहा होते ही प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम ने हिरासत में ले लिया। इलाहाबाद हाई कोर्ट से फर्जी पासपोर्ट और दो पैन कार्ड (PAN Card) मामलों में जमानत मिलने के बाद वे जेल से बाहर आए थे, जहां पहले से मौजूद ईडी टीम ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तारी और हाई कोर्ट के आदेश से जुड़ी मुख्य बातें:
इलाहाबाद हाई कोर्ट से जमानत: शुक्रवार को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने फर्जी पासपोर्ट और दो पैन कार्ड मामलों में आजम खान और उनके पुत्र अब्दुल्ला आजम को जमानत दे दी थी। दोनों नेता 17 नवंबर 2025 से रामपुर जेल में बंद थे।
जेल के बाहर से गिरफ्तारी: शनिवार को रामपुर जेल का दरवाजा खुलते ही ईडी के अधिकारियों ने आजम खान को अपनी हिरासत में लिया और वाहन में बैठाकर ले गए।
कोर्ट में पेशी: जानकारी के मुताबिक, ईडी की टीम आजम खान को रविवार को गाजियाबाद स्थित विशेष PMLA कोर्ट में पेश करेगी।
ED की कार्रवाई और आरोप:
यह मामला रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण और धन जुटाने में हुई वित्तीय अनियमितताओं से संबंधित है:
54 FIR के आधार पर PMLA केस: ईडी ने उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा दर्ज 54 अलग-अलग प्राथमिकियों (FIR) के आधार पर 13 अक्टूबर को मनी लॉन्ड्रिंग (PMLA) का नया मामला दर्ज किया था। इसमें किसानों की जमीनों पर अवैध कब्जे और 2016 में सरकारी परियोजनाओं के सामान को यूनिवर्सिटी में इस्तेमाल करने के आरोप हैं।
₹426.46 करोड़ का संदिग्ध फंड:
ईडी के आकलन के अनुसार, जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण की कुल लागत ₹499.09 करोड़ है।
जौहर ट्रस्ट के आईटी रिटर्न (2013-14 से 2024-25) में मात्र ₹78.32 करोड़ का पूंजीगत खर्च दर्शाया गया था।
जांच के दौरान केवल ₹72.63 करोड़ के स्रोतों को ही वैध माना गया, जबकि शेष ₹426.46 करोड़ को ईडी ने अपराध की कमाई (Proceeds of Crime) करार दिया है।
₹1,170 करोड़ की संपत्ति अटैच: ईडी ने 28 अक्टूबर को ही जौहर यूनिवर्सिटी की 59 इमारतों और उससे जुड़ी भूमि को अस्थायी रूप से जब्त (Attach) कर लिया था, जिसकी वर्तमान बाजार कीमत लगभग ₹1,170 करोड़ आंकी गई है।
जांच एजेंसी का दावा है कि सरकारी ठेकेदारों से चंदे के रूप में प्राप्त राशि और अवैध स्रोतों से जुटाए गए धन का उपयोग यूनिवर्सिटी की संपत्तियों के निर्माण में किया गया था।

