उत्तराखंड

उत्तराखंड में मदरसों समेत सभी अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों के लिए तैयार हुआ नया धार्मिक पाठ्यक्रम, इसी सत्र से होगा लागू

उत्तराखंड में मदरसों समेत सभी अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों के लिए तैयार हुआ नया धार्मिक पाठ्यक्रम, इसी सत्र से होगा लागू

उत्तराखंड में मदरसों समेत सभी अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों के लिए नया धार्मिक शिक्षा पाठ्यक्रम तैयार कर लिया गया है। ऐसा करने वाला उत्तराखंड देश का पहला राज्य बताया जा रहा है। कक्षा एक से आठवीं तक का पाठ्यक्रम पहले ही तैयार हो चुका है और इसे इसी सप्ताह लागू करने की तैयारी है। वहीं, कक्षा नौवीं से 12वीं तक का पाठ्यक्रम भी तैयार कर लिया गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से जल्द इसका विमोचन कराने की योजना है।

नया पाठ्यक्रम लागू होने के बाद अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों में निर्धारित सिलेबस के अनुसार ही धार्मिक शिक्षा दी जा सकेगी। उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड को भंग कर अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन किया गया था। इसके बाद मुस्लिम, सिख, जैन, बौद्ध, ईसाई और पारसी समुदाय के शिक्षण संस्थानों के लिए पहली बार अलग धार्मिक शिक्षा पाठ्यक्रम तैयार किया गया है।

इसी सत्र से लागू होगा पाठ्यक्रम, अगले सत्र में छपेंगी किताबें

कक्षा आठवीं तक की अध्ययन सामग्री ऑनलाइन और ऑफलाइन उपलब्ध कराई जाएगी। विद्यार्थी इसी सामग्री के आधार पर पढ़ाई और परीक्षा देंगे। नौवीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए भी यही व्यवस्था लागू होगी। हालांकि, पाठ्यपुस्तकों का प्रकाशन अगले शैक्षणिक सत्र में बजट की व्यवस्था होने के बाद किया जाएगा। फिलहाल मौजूदा सत्र का आधे से अधिक समय बीत चुका है।

मान्यता नहीं लेने पर पांच लाख रुपये तक जुर्माना

सरकार ने अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम संशोधन विधेयक सदन में पारित किया है। इसके तहत नियमों का उल्लंघन कर धार्मिक शिक्षा देने वाले संस्थानों पर पांच लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके अलावा संबंधित संस्थान को बंद करने और वहां रिसीवर नियुक्त करने जैसी कार्रवाई का भी प्रावधान है।

अब तक 35 संस्थानों को मिली मान्यता

मदरसा बोर्ड के तहत पहले प्रदेश में 452 मदरसे संचालित होते थे। अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के गठन के बाद अब तक 35 संस्थानों ने प्राधिकरण से मान्यता प्राप्त की है। आधे से अधिक मदरसे बंद हो चुके हैं। वहीं, करीब 80 संस्थानों ने शिक्षा विभाग से मान्यता ली है, जबकि 100 से अधिक संस्थानों ने शिक्षा विभाग में मान्यता के लिए आवेदन किया है।

धार्मिक शिक्षा के साथ आधुनिक और सामाजिक विषय भी शामिल

नए पाठ्यक्रम में धार्मिक शिक्षा के अलावा नैतिक मूल्य, स्वतंत्रता संग्राम की गाथाएं, डिजिटल व्यवहार, नशे से बचाव और आपसी भाईचारे जैसे विषयों को भी शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को धार्मिक ज्ञान के साथ आधुनिक शिक्षा, नैतिकता और सामाजिक जिम्मेदारियों से भी परिचित कराना है।

धामी बोले- गुणवत्तापूर्ण और एकसमान शिक्षा देना प्राथमिकता

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रदेश सरकार की प्राथमिकता सभी विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण और एकसमान शिक्षा उपलब्ध कराना है। धार्मिक शिक्षा का पाठ्यक्रम तैयार हो चुका है और इसे जल्द लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मदरसों समेत सभी शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थी आधुनिक और रोजगारपरक शिक्षा प्राप्त कर राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभा सकें, यही सरकार का उद्देश्य है।

वहीं, अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह गांधी के मुताबिक, धार्मिक शिक्षा का पाठ्यक्रम धर्मगुरुओं और शिक्षाविदों की समितियों के माध्यम से तैयार किया गया है। इसके लिए शिक्षा विभाग से अलग से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है।

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