राष्ट्रीय

नेपाल में विनाशकारी बाढ़ की वजह क्या थी? हिमालय में ग्लेशियर टूटने से मची तबाही

नेपाल में विनाशकारी बाढ़ की वजह क्या थी? हिमालय में ग्लेशियर टूटने से मची तबाही

नेपाल के रसुवा क्षेत्र में आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड के पीछे हिमालय के ऊंचाई वाले इलाके में ग्लेशियर के ढहने और उसके बाद बड़े पैमाने पर बर्फ, चट्टान और मलबे के नीचे की ओर आने की आशंका जताई गई है। शुरुआती सैटेलाइट विश्लेषण के मुताबिक, इस पूरी घटना की शुरुआत तिब्बत के पर्वतीय क्षेत्र में हुई हो सकती है।

4.9 तीव्रता के भूकंप से ग्लेशियर प्रभावित होने की आशंका

भारतीय राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार बुधवार सुबह 8:22 बजे 4.9 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था। इसका केंद्र रसुवा के पास बताया गया।

ISRO की प्रमुख इकाई राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र (NRSC) के शुरुआती आकलन के अनुसार, भूकंप ने संभवतः एक सर्क ग्लेशियर को अस्थिर किया। इसके बाद बर्फ और चट्टानों का बड़ा हिस्सा तेजी से नीचे गिरा, जिससे विशाल आइस-रॉक एवलॉन्च हुआ।

पहले नदी रुकी, फिर बना विनाशकारी जलसैलाब

वैज्ञानिकों के अनुसार संभावित घटनाक्रम कुछ इस तरह रहा:

भूकंप → ग्लेशियर का ढहना → बर्फ-चट्टानों का एवलॉन्च → नदी के बहाव में अस्थायी रुकावट → पानी और मलबे का जमा होना → अवरोध टूटना → अचानक भारी जलसैलाब

इस दौरान पानी अपने साथ बड़ी मात्रा में चट्टान, मिट्टी और मलबा लेकर नीचे की ओर तेजी से बढ़ा। इसका असर त्रिशूली और भोटेकोशी नदी प्रणालियों के आसपास के इलाकों में बेहद गंभीर रहा।

सर्क ग्लेशियर क्या होता है?

सर्क ग्लेशियर पहाड़ों की ऊंची ढलानों पर बने कटोरे या अर्धवृत्ताकार गड्ढेनुमा क्षेत्र में विकसित होता है। यहां लंबे समय तक बर्फ जमा होती रहती है। यदि भूकंप, तापमान में बदलाव या अन्य भूगर्भीय परिस्थितियों से ग्लेशियर अस्थिर हो जाए, तो बर्फ और उसके साथ चट्टानें अचानक नीचे खिसक सकती हैं।

ISRO ने सैटेलाइट तस्वीरों से कैसे पता लगाया?

NRSC ने आपदा से पहले और बाद की सैटेलाइट तस्वीरों की तुलना की। 24 अगस्त की Sentinel-2 तस्वीरों को 26 अगस्त की Resourcesat-2A तस्वीरों के साथ मिलाकर देखा गया। इससे नदी के बहाव में बदलाव, मलबे के जमाव और बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों की पहचान करने में मदद मिली।

क्या यह सिर्फ भूकंप से आई बाढ़ थी?

ऐसा कहना अभी जल्दबाजी होगी। उपलब्ध शुरुआती विश्लेषण में भूकंप को ग्लेशियर के अस्थिर होने का संभावित ट्रिगर माना गया है, जबकि असली तबाही ग्लेशियर/चट्टान के ढहने, नदी के अस्थायी अवरोध और उसके टूटने के बाद आई तेज बाढ़ से जुड़ी बताई जा रही है।

अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के आकलन में भी ग्लेशियर के ढहने और मलबे के बहाव जैसी प्रक्रिया की ओर संकेत किया गया है।

यानी हिमालय की ऊंचाई पर हुई एक छोटी-सी भूगर्भीय घटना ने नीचे की नदी घाटी में पानी और मलबे की बेहद शक्तिशाली लहर पैदा कर दी। यही इस आपदा की भयावहता का मुख्य कारण माना जा रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *