महाराष्ट्र में ऑटो-टैक्सी चालकों को बड़ी राहत, मराठी सीखने के लिए मिला एक साल का अतिरिक्त समय
महाराष्ट्र में ऑटो-टैक्सी चालकों को बड़ी राहत, मराठी सीखने के लिए मिला एक साल का अतिरिक्त समय
मुंबई। महाराष्ट्र में ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा अनिवार्य किए जाने के मुद्दे पर सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने चालकों को मराठी सीखने के लिए एक साल की अतिरिक्त मोहलत देने की घोषणा की है। अब तय अवधि में मराठी नहीं सीख पाने के आधार पर फिलहाल किसी ऑटो या टैक्सी चालक का परमिट रद्द नहीं किया जाएगा।
परमिट रद्द करने की कार्रवाई पर फिलहाल रोक
सरकार के नए फैसले से उन चालकों को राहत मिलेगी, जिन्हें मराठी भाषा संबंधी नई शर्त पूरी करने के लिए अतिरिक्त समय की जरूरत है। एक साल की अतिरिक्त अवधि में चालक मराठी सीखने और निर्धारित मानकों को पूरा करने की प्रक्रिया जारी रख सकेंगे।
अप्रैल से चर्चा में है भाषा का मुद्दा
सार्वजनिक सेवा वाहनों के चालकों के लाइसेंस और परमिट को मराठी भाषा से जोड़ने का मुद्दा अप्रैल से ही चर्चा में रहा है। सरकार ने तत्काल कार्रवाई करने के बजाय चालकों को भाषा सीखने और प्रशिक्षण लेने का अवसर देने का फैसला किया था। इसके तहत 1 मई से अगस्त के मध्य तक प्रशिक्षण और सत्यापन अभियान चलाया गया।
दूसरे राज्यों से आए चालक भी बड़ी संख्या में
मुंबई, ठाणे, नवी मुंबई, पुणे समेत महाराष्ट्र के कई शहरी इलाकों में बड़ी संख्या में दूसरे राज्यों से आए लोग रहते हैं। ऑटो-टैक्सी और परिवहन क्षेत्र में भी गैर-मराठी भाषी चालकों की बड़ी भागीदारी है। ऐसे में भाषा की अनिवार्यता को लेकर चालकों के बीच चिंता बनी हुई थी।
यात्रियों से संवाद करना है मुख्य उद्देश्य
मुख्यमंत्री फडणवीस ने स्पष्ट किया कि नियम का उद्देश्य चालकों को मराठी भाषा का विशेषज्ञ बनाना नहीं है। सरकार चाहती है कि ऑटो और टैक्सी चालक यात्रियों के साथ स्थानीय भाषा में बुनियादी संवाद कर सकें।
सरकार की ओर से एक साल की अतिरिक्त मोहलत दिए जाने के बाद अब चालकों को भाषा सीखने के लिए अधिक समय मिलेगा और तत्काल परमिट कार्रवाई की आशंका भी फिलहाल टल गई है।
