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नेपाल-तिब्बत सीमा पर फ्लैश फ्लड से तबाही, ईशा फाउंडेशन के 80 श्रद्धालु लापता; सद्गुरु ने मांगी ग्यिरोंग जाने की अनुमति

नेपाल-तिब्बत सीमा पर फ्लैश फ्लड से तबाही, ईशा फाउंडेशन के 80 श्रद्धालु लापता; सद्गुरु ने मांगी ग्यिरोंग जाने की अनुमति

काठमांडू। नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड के बाद राहत और खोज अभियान मुश्किलों में घिर गया है। बाढ़ के कारण प्रभावित क्षेत्र में दूरसंचार सेवाएं पूरी तरह ठप हैं और सड़क मार्ग भी बाधित हो गया है। इसी बीच ईशा फाउंडेशन के 80 लोगों से संपर्क टूटने की जानकारी सामने आई है। समूह में भारत समेत 19 देशों के श्रद्धालु शामिल बताए जा रहे हैं।

80 लोगों से संपर्क टूटा

सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने एक भावुक संदेश में कहा कि प्रभावित इलाके में हुई तबाही का पैमाना बेहद गंभीर दिखाई दे रहा है। उन्होंने बताया कि समूह के लोगों के बारे में अब तक किसी तरह की आधिकारिक जानकारी नहीं मिल पाई है।

सद्गुरु ने कहा कि वह खुद प्रभावित क्षेत्र तक पहुंचने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन सभी फोन बंद हैं, दूरसंचार सेवाएं ठप हैं और सड़कें अवरुद्ध हैं। ऐसे में वहां पहुंचना संभव नहीं हो पा रहा है।

19 देशों के लोग समूह में शामिल

ईशा फाउंडेशन के मुताबिक, लापता समूह में अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस, नेपाल, नीदरलैंड्स, न्यूजीलैंड, सिंगापुर, स्पेन समेत 19 देशों के नागरिक शामिल हैं। समूह में कुल 80 लोग बताए गए हैं, जिनमें 34 पुरुष और 46 महिलाएं हैं।

इसके अलावा कुछ स्वयंसेवक और एक डॉक्टर भी आसपास के होटलों में ठहरे हुए थे, जिनसे भी संपर्क नहीं हो पाया है।

कैलाश मानसरोवर यात्रा पूरी कर लौट रहे थे श्रद्धालु

ईशा फाउंडेशन के अनुसार, यह समूह कैलाश मानसरोवर यात्रा पूरी कर काठमांडू लौट रहा था। फाउंडेशन की समन्वयक मां गम्भीरी ने बताया कि समूह के 77 यात्री तिब्बती इमिग्रेशन प्रक्रिया पूरी कर चुके थे और वापसी की तैयारी में थे।

उन्होंने बताया कि टीम की सुबह करीब 9:05 बजे समूह प्रमुख से आखिरी बार बातचीत हुई थी। लगभग 10 मिनट बाद जब दोबारा संपर्क करने की कोशिश की गई तो किसी से बात नहीं हो सकी। आशंका है कि इसी दौरान अचानक फ्लैश फ्लड ने इलाके को अपनी चपेट में लिया।

सद्गुरु ने प्रशासन से मांगी ग्यिरोंग जाने की अनुमति

सद्गुरु ने प्रशासन से अपील करते हुए कहा है कि उन्हें और कुछ स्वयंसेवकों को ग्यिरोंग जाने की अनुमति दी जाए। उनका कहना है कि उनका उद्देश्य राहत एवं बचाव अभियान में हस्तक्षेप करना नहीं, बल्कि प्रभावित परिवारों के साथ खड़ा होना और अपने समूह के लोगों के बारे में जानकारी हासिल करने के प्रयासों में सहयोग करना है।

उन्होंने कहा कि वह फिलहाल सागा में मौजूद हैं और ग्यिरोंग पहुंचने की अनुमति का इंतजार कर रहे हैं।

अचानक आई बाढ़ से मची तबाही

ईशा फाउंडेशन की ओर से बताया गया कि समूह के यात्रियों को घटना से पहले किसी तरह की चेतावनी नहीं मिली थी। सब कुछ सामान्य था और अचानक फ्लैश फ्लड आ गई।

मां गम्भीरी ने कहा कि यात्रियों ने पहले भी पहाड़ी इलाकों में छोटे भूस्खलन देखे थे, लेकिन इस बार की घटना अभूतपूर्व और कल्पना से परे थी। फिलहाल दूरसंचार व्यवस्था बाधित होने के कारण लापता लोगों की स्थिति की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

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