चीन-अमेरिका व्यापार युद्ध: ड्रोन निर्यात पर कड़े नियंत्रण के साथ चीन ने 6 अमेरिकी कंपनियों को किया ब्लैकलिस्ट
चीन-अमेरिका व्यापार युद्ध: ड्रोन निर्यात पर कड़े नियंत्रण के साथ चीन ने 6 अमेरिकी कंपनियों को किया ब्लैकलिस्ट
बीजिंग: अमेरिका द्वारा लगाए गए नए व्यापारिक प्रतिबंधों और टैरिफ के जवाब में चीन ने अमेरिका के खिलाफ कड़े जवाबी आर्थिक कदम उठाए हैं। चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने अमेरिका को भेजे जाने वाले ड्रोन, उनके कलपुर्जों व तकनीकों के निर्यात पर सख्त नियंत्रण लागू कर दिए हैं और 6 अमेरिकी कंपनियों को ब्लैकलिस्ट कर दिया है।
1. चीन के जवाबी कदम और नए प्रतिबंध
ड्रोन एक्सपोर्ट पर सख्त समीक्षा: चीन ने अमेरिका को निर्यात होने वाले डुअल-यूज़ (दोहरे उपयोग वाले) ड्रोन, उनके पुर्जों और टेक्नोलॉजी के लिए ‘केस-बाय-केस’ सख्त समीक्षा अनिवार्य कर दी है।
6 अमेरिकी संस्थाएं ब्लैकलिस्ट: जियोसाइंस रिसर्च फर्म स्ट्रैटम रिजर्वॉयर (Stratum Reservoir) और बायोटेक्नोलॉजी कंपनी एप्लाइड डीएनए साइंसेज (Applied DNA Sciences) समेत 6 अमेरिकी कंपनियों पर बैन लगाया गया है।
लेन-देन पर रोक: चीनी नागरिकों और संगठनों को इन 6 कंपनियों के साथ किसी भी प्रकार के व्यावसायिक सहयोग, लेनदेन या गतिविधि में शामिल होने से प्रतिबंधित कर दिया गया है।
अन्य कार्रवाई: इसके अलावा, चीन ने अमेरिकी अनुपालन परीक्षण फर्मों को ब्लैकलिस्ट किया है तथा ऑफिस प्रिंटर व कॉपियर के आयात पर राष्ट्रीय सुरक्षा जांच शुरू कर दी है।
2. विवाद का मुख्य कारण (ट्रम्प टैरिफ और शिनजियांग मुद्दा)
अतिरिक्त टैरिफ व रोबोटिक्स बैन: अमेरिकी प्रशासन द्वारा भारत और चीन सहित 50 से अधिक देशों पर 10% का अतिरिक्त सीमा शुल्क (Tariff) लगाने तथा चीनी निर्मित ड्रोन और रोबोटिक्स के आयात पर प्रतिबंध लगाने के बाद यह तनातनी बढ़ी है।
उइगर जबरन मजदूरी (Xinjiang Dispute): अमेरिका ने हाल ही में शिनजियांग में उइगर मुस्लिम अल्पसंख्यकों से जुड़े जबरन श्रम के आरोपों के तहत 43 चीनी कंपनियों पर आयात प्रतिबंध लगाया था।
चीन का तर्क: चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका के ये कदम चीन के “वैध हितों और अधिकारों को गंभीर नुकसान” पहुंचाते हैं और ब्लैकलिस्ट की गई कंपनियों ने शिनजियांग से जुड़े अमेरिका के “गैर-कानूनी” प्रतिबंधों का समर्थन किया है।
