पीएम मोदी का इंडोनेशिया दौरा: प्रम्बानन मंदिर के संरक्षण के लिए भारत-इंडोनेशिया के बीच समझौता; एशिया में सांस्कृतिक धरोहरों को सहेज रहा भारत
पीएम मोदी का इंडोनेशिया दौरा: प्रम्बानन मंदिर के संरक्षण के लिए भारत-इंडोनेशिया के बीच समझौता; एशिया में सांस्कृतिक धरोहरों को सहेज रहा भारत
जकार्ता: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इंडोनेशिया दौरे के बीच भारत और इंडोनेशिया ने सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। दोनों देशों ने योग्याकार्ता स्थित यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल प्रम्बानन मंदिर परिसर (Prambanan Temple Complex) के संरक्षण और पुनर्स्थापना के लिए एक ‘लेटर ऑफ इंटेंट’ (आशय पत्र) का आदान-प्रदान किया है। यह समझौता प्रधानमंत्री मोदी और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता के बाद हुआ, जिसमें हिंद-प्रशांत क्षेत्र की शांति और व्यापक रणनीतिक साझेदारी पर चर्चा की गई।
प्रम्बानन मंदिर: इंडोनेशिया का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर
10वीं शताब्दी में निर्मित प्रम्बानन मंदिर इंडोनेशिया का सबसे बड़ा और दुनिया के सबसे भव्य हिंदू मंदिर परिसरों में से एक है।
भगवान शिव को समर्पित: इस परिसर के केंद्र में 47 मीटर (154 फुट) ऊंचा मुख्य शिव मंदिर स्थित है, जो प्राचीन हिंदू वास्तुकला का बेजोड़ नमूना है।
त्रिमूर्ति की पूजा: परिसर में शिव के साथ-साथ भगवान विष्णु और ब्रह्मा के भी ऊंचे मंदिर बने हैं।
रामायण की नक्काशी: मूल रूप से 240 मंदिरों वाले इस परिसर की दीवारों पर रामायण और अन्य हिंदू महाकाव्यों की कथाओं को दर्शाती बेहद बारीक नक्काशी की गई है, जो भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के प्राचीन आध्यात्मिक संबंधों का प्रतीक है।
वैश्विक मंच पर सांस्कृतिक विरासत को सहेज रही ‘मोदी सरकार’
पिछले एक दशक में भारत सरकार ने एशिया के विभिन्न देशों में स्थित महत्वपूर्ण धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहरों के पुनरुद्धार के लिए सक्रिय भूमिका निभाई है। भारत द्वारा पड़ोसी देशों में चलाए जा रहे कुछ मुख्य प्रोजेक्ट्स इस प्रकार हैं:
बांग्लादेश: 1971 में पाकिस्तान के ‘ऑपरेशन सर्चलाइट’ के दौरान नष्ट किए गए ऐतिहासिक रामना काली मंदिर का भारत की सहायता से पुनर्निर्माण कर 2021 में उद्घाटन किया गया। इसके अलावा, 300 साल पुराने जॉय काली माता मंदिर, आनंदमयी काली माता मंदिर और रामकृष्ण मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए भी भारत ने वित्तीय सहायता दी।
वियतनाम: दक्षिण-पूर्व एशिया के महत्वपूर्ण शैव केंद्रों में से एक और चंपा साम्राज्य के धार्मिक केंद्र माई सोन अभयारण्य में भारतीय दल संरक्षण कार्य कर रहा है।
म्यांमार: भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने म्यांमार के बागान पुरातात्विक क्षेत्र में भूकंप से क्षतिग्रस्त हुए 12 ऐतिहासिक पगोडाओं और प्रसिद्ध आनंद मंदिर का जीर्णोद्धार किया है।
नेपाल: 2015 के विनाशकारी भूकंप के बाद भारत ने 5 करोड़ अमेरिकी डॉलर की सहायता से सेतो मच्छिंद्रनाथ मंदिर और बुधनीलकंठ मंदिर धर्मशाला समेत 28 सांस्कृतिक विरासत स्थलों का पुनर्निर्माण शुरू किया।
कंबोडिया: दुनिया के सबसे बड़े हिंदू परिसरों में से एक अंगकोर वाट, ता प्रोहम और प्रीह विहार के संरक्षण का कार्य भारत 2022 से लगातार कर रहा है।
लाओस: लगभग 1,000 वर्ष पुराने और सनातन सभ्यता के सबसे प्राचीन प्रतीकों में से एक वाट फू शिव मंदिर की मुख्य संरचनाओं का भारत ने पुनर्स्थापन किया है।
बहरीन: खाड़ी क्षेत्र के सबसे पुराने हिंदू मंदिरों में से एक, मनामा स्थित 200 वर्ष पुराने श्रीनाथजी (श्री कृष्ण) मंदिर के पुनर्विकास के लिए भारत ने 42 लाख अमेरिकी डॉलर की परियोजना का नेतृत्व किया।
श्रीलंका: भगवान शिव को समर्पित श्रीलंका के पांच प्राचीन पंच ईश्वरमों में से एक, थिरुकेतीश्वरम मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए भारत ने 32.6 करोड़ श्रीलंकाई रुपये की अनुदान सहायता प्रदान की है।
इस प्रकार भारत न केवल अपनी सीमाओं के भीतर बल्कि पूरे एशिया में साझा सभ्यतागत और सांस्कृतिक विरासत को पुनर्जीवित करने के अपने प्रयासों को लगातार गति दे रहा है।
