Friday, July 3, 2026
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उत्तराखंड में समय से पहले विधानसभा चुनाव की चर्चाओं पर विराम: सीएम पुष्कर सिंह धामी ने खबरों को बताया निराधार

उत्तराखंड में समय से पहले विधानसभा चुनाव की चर्चाओं पर विराम: सीएम पुष्कर सिंह धामी ने खबरों को बताया निराधार

​उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारों में पिछले कुछ दिनों से एक चर्चा बेहद तेज है कि उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव अपने तय समय (शुरुआत 2027) से पहले, इसी साल यानी नवंबर-दिसंबर 2026 में हो सकते हैं। इन अटकलों और दावों पर अब खुद सूबे के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का बड़ा बयान सामने आया है, जिसने इन चर्चाओं पर पूरी तरह विराम लगा दिया है।

​गुरुवार (2 जुलाई 2026) को देहरादून में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान जब पत्रकारों ने सीएम धामी से समय से पहले चुनाव होने की संभावनाओं पर सवाल पूछा, तो उन्होंने साफ लहजे में इन खबरों को खारिज कर दिया।

​”समय से पहले चुनाव की कोई सूचना नहीं” — सीएम धामी

​मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पत्रकारों के सवालों का सीधा जवाब देते हुए कहा:

​”हमें किसी भी स्तर पर यह नहीं कहा गया है कि चुनाव समय से पहले हो रहे हैं। न ही शासन या पार्टी के स्तर पर इस तरह की कोई तैयारियां ही चल रही हैं। वैसे चुनाव आयोग जो भी फैसला लेगा, वह सबको मानना पड़ता है, लेकिन अभी हमारे पास औपचारिक या आधिकारिक रूप से ऐसी कोई सूचना नहीं है।”

​सीएम धामी के इस बयान से स्पष्ट है कि फिलहाल उत्तराखंड में समय से पहले विधानसभा चुनाव होने की कोई संभावना नहीं है और राजनीतिक गलियारों में तैर रही ये खबरें पूरी तरह से निराधार हैं।

​आखिर क्यों शुरू हुईं समय से पहले चुनाव की चर्चाएं?

​उत्तराखंड में पांचवीं विधानसभा का पांच साल का कार्यकाल 23 मार्च 2027 को पूरा होने जा रहा है। संवैधानिक नियमों के अनुसार, इससे पहले नई सरकार का गठन होना जरूरी है। तय शेड्यूल के हिसाब से राज्य में अगले साल की शुरुआत (फरवरी 2027) में ही चुनाव होने हैं।

​इसके बावजूद, समय से पहले (साल 2026 के अंत में) चुनाव की अटकलें लगने के पीछे मुख्य रूप से निम्नलिखित कारण रहे हैं:

​केंद्रीय नेताओं के लगातार दौरे: पिछले कुछ समय में भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टियों के शीर्ष केंद्रीय नेताओं ने उत्तराखंड के ताबड़तोड़ दौरे किए हैं, जिसे समय से पूर्व चुनावी तैयारियों से जोड़कर देखा गया।

​प्रशासनिक प्रक्रियाएं: राज्य में एसआईआर (SIR) की प्रक्रिया का तेजी से चलना।

​हरिद्वार कुंभ और जनगणना: जनवरी 2027 में हरिद्वार में प्रस्तावित कुंभ मेला और उसके ठीक बाद होने वाली राष्ट्रीय जनगणना को देखते हुए यह कयास लगाए जा रहे थे कि चुनावी टाइमलाइन में बदलाव किया जा सकता है।

​हालांकि, मुख्यमंत्री धामी के आधिकारिक स्पष्टीकरण के बाद अब यह साफ हो गया है कि सरकार और संगठन दोनों ही तय समय यानी 2027 के शुरुआत में ही चुनाव कराने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

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