Friday, July 3, 2026
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ममता बनर्जी के हाथ से फिसलेगी TMC? ऋतब्रत बनर्जी के बागी गुट ने चुनाव आयोग में ठोका ‘असली’ पार्टी और प्रतीक चिह्न पर दावा  

ममता बनर्जी के हाथ से फिसलेगी TMC? ऋतब्रत बनर्जी के बागी गुट ने चुनाव आयोग में ठोका ‘असली’ पार्टी और प्रतीक चिह्न पर दावा  

​पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में सत्ता गंवाने के बाद ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर का संकट बेहद गहरा गया है। पार्टी संस्थापक ममता बनर्जी के सामने अब न सिर्फ राजनीतिक वजूद बचाने, बल्कि अपनी ही बनाई पार्टी पर से नियंत्रण खोने का बड़ा खतरा मंडरा रहा है।

​पार्टी के बागी गुट के नेता और पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष (LoP) ऋतब्रत बनर्जी ने नई दिल्ली में पूर्ण चुनाव आयोग (ECI) से मुलाकात कर तृणमूल कांग्रेस के नाम और उसके आधिकारिक चुनाव चिह्न (जोड़ा फूल) पर अपना दावा ठोक दिया है। इस राजनीतिक घमासान के बीच चुनाव आयोग ने सक्रियता दिखाते हुए 6 जुलाई की शाम 5:30 बजे तक दोनों गुटों से उनके दावों पर लिखित जवाब मांगा है।

​बागियों के पास नंबर गेम: क्या हैं उनके दावे?

​मीडिया से बातचीत में ऋतब्रत बनर्जी ने आत्मविश्वास जताते हुए साफ किया कि उनके पास पार्टी का असली नेतृत्व है:

​दो तिहाई से ज्यादा विधायकों का समर्थन: बागी गुट का दावा है कि पार्टी के कुल 80 विधायकों में से 65 विधायकों का समर्थन उनके साथ है, जिन्होंने ममता बनर्जी के नेतृत्व से किनारा कर लिया है।

​संगठन पर कब्जा: बागियों के अनुसार, जिला परिषदों के सदस्य, पार्षद और जमीनी कार्यकर्ता बड़े पैमाने पर उनके पाले में आ चुके हैं।

​ममता बनर्जी को पद से हटाया: ऋतब्रत गुट ने बताया कि 22 जून को आयोजित पार्टी के एक विशेष राष्ट्रीय अधिवेशन में सर्वसम्मति से ममता बनर्जी को पार्टी चेयरमैन पद से हटाकर वरिष्ठ नेता अरूप रॉय को नया चेयरमैन नियुक्त कर दिया गया है।

​ममता बनर्जी खेमे की तीखी आपत्ति और दलीलें

​दूसरी तरफ, ममता बनर्जी के वफादार और ‘कालीघाट’ (ममता बनर्जी का आवास) खेमे ने चुनाव आयोग के इस रुख पर गहरी नाराजगी जताई है। टीएमसी सांसदों और प्रवक्ताओं (जैसे कुणाल घोष और सागरिका घोष) का कहना है कि:

​निष्कासित नेताओं को क्यों मिल रहा भाव?: ममता गुट का तर्क है कि जिन नेताओं को पार्टी पहले ही निष्कासित (बाहर) कर चुकी है, उनके दावों को चुनाव आयोग इतनी गंभीरता से क्यों सुन रहा है?

​”ममता के बिना TMC का कोई अस्तित्व नहीं”: वफादारों का कहना है कि तृणमूल कांग्रेस का मतलब ही ममता बनर्जी है, उनके बिना पार्टी की कल्पना करना एक ‘कॉमेडी शो’ या सर्कस जैसा है।

​संसद में भी दरार: इस बगावत का असर केवल राज्य में नहीं बल्कि दिल्ली तक दिख रहा है, जहां लोकसभा में टीएमसी के 28 में से 20 सांसदों ने ममता बनर्जी का साथ छोड़कर एक अन्य दल के साथ विलय कर लिया है।

​आगे क्या होगा?

चुनाव आयोग अब दोनों पक्षों द्वारा 6 जुलाई तक सौंपे जाने वाले सांगठनिक और विधायी (विधायकों/सांसदों के शपथ पत्र) दस्तावेजों की जांच करेगा। यदि चुनाव आयोग को बागियों का पलड़ा भारी लगा, तो वह इस गुट को असली टीएमसी मान सकता है। विवाद ज्यादा पेचीदा होने पर पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न ‘फ्रीज’ (जब्त) भी किया जा सकता है, जिससे दोनों गुटों को नए नाम और सिंबल के साथ चुनावी मैदान में जाना होगा। 6 जुलाई की समयसीमा के बाद ही बंगाल की इस सबसे बड़ी सियासी जंग की दिशा तय होगी।

 

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